नियमों की आड़ में चालानी कार्रवाई से भड़का आक्रोश
KHULASA FIRST
संवाददाता

पाटनीपुरा पर नगर निगम की मोबाइल कोर्ट का बड़ा एक्शन: 15-20 गाड़ियों के काफिले और 80 कर्मचारियों के साथ दी दबिश
नगर निगम की गुंडागर्दी, महिला दुकानदार से अभद्रता और अवैध वसूली का आरोप
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के पाटनीपुरा क्षेत्र में शनिवार को नगर निगम की मोबाइल कोर्ट की कार्रवाई के दौरान जबरदस्त हंगामा और तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। स्वास्थ्य विभाग और रिमूवल टीम के भारी-भरकम अमले ने जैसे ही इलाके में प्रवेश किया, व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया और सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। निगम की इस कार्यवाही के खिलाफ व्यापारियों ने जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि निगम की टीम छोटी-मोटी गलतियों को निकालकर दुकानदारों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रही है।
नगर निगम की इस बड़ी कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य अधिकारी गौतम भाटिया, राजेश जायसवाल और लखन शास्त्री के साथ रिमूवल टीम के बबलू कल्याण्डे सहित करीब 70 से 80 निगम कर्मी मौके पर पहुंचे थे। 15 से 20 गाड़ियों के विशाल काफिले को देखकर क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
मुनिसिपल मजिस्ट्रेट मुकेश गुप्ता की मौजूदगी में मोबाइल कोर्ट ने मौके पर ही सुनवाई करते हुए नियमों के उल्लंघन पर 35 से अधिक चालान काटे। स्वास्थ्य अधिकारी गौतम भाटिया ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि इन चालानों की राशि 1000 रुपये से लेकर 3500 रुपये तक निर्धारित की गई थी।
कार्रवाई का तरीका बना विरोध का कारण: हंगामे का मुख्य कारण जुर्माने की भारी-भरकम राशि और कार्रवाई का तरीका रहा। व्यापारियों का आरोप है कि दुकानों के बाहर लगे साइन बोर्ड और चबूतरों (ओटला) को भी अतिक्रमण बताकर चालानी कार्रवाई की जाने लगी। दुकानदारों का कहना था कि यदि सामान फुटपाथ या सड़क पर हो तो वे कार्रवाई के विरोध में नहीं हैं, लेकिन दुकान के भीतर के दस्तावेजों को लेकर की जा रही यह सख्ती स्वीकार्य नहीं है। व्यापारियों ने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया कि मामूली तकनीकी खामियों को आधार बनाकर उन पर आर्थिक दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
निगम के तर्क और व्यापारियों का कड़ा रुख
कार्रवाई के दौरान व्यापारियों ने आरोप लगाया कि निगम की टीम ने अकारण ही मोर्चा खोल दिया और दस्तावेजों की जांच के नाम पर दबाव बनाने का प्रयास किया। जब विरोध प्रदर्शन तेज हुआ, तो स्थिति को देखते हुए निगम की टीम को वापस लौटना पड़ा। दूसरी ओर, निगम अधिकारियों का कहना है कि वे केवल नियमों के अनुसार ही कार्रवाई कर रहे थे और पूर्व में भी इस तरह की चेतावनियां दी जा चुकी हैं। फिलहाल, पाटनीपुरा के व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में इसी तरह बिना ठोस कारण और अनावश्यक आर्थिक दंड की कार्रवाई की गई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।
सीमा विवाद में उलझी पुलिस; परदेशीपुरा ने टाला मामला, तुकोगंज थाने में दिया आवेदन
शहर के पाटनीपुरा मालवा मिल पुल के पास नगर निगम की रिमूवल टीम द्वारा की गई कार्रवाई ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। वर्षों से चाय-नाश्ते की दुकान चलाने वाली सुमन तिवारी ने निगम कर्मियों पर दुकान में जबरन घुसकर महिलाओं से बदसलूकी करने और अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना के विरोध में शहर के वकील भी मैदान में उतर आए हैं।
घटना के अनुसार, मालवा मिल पुल के समीप स्थित सुमन तिवारी की दुकान पर शनिवार को निगम की टीम अचानक पहुंची। आरोप है कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के कर्मचारी दुकान के भीतर घुस गए और वहां मौजूद महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज शुरू कर दी।
पीड़िता रितु तिवारी का कहना है कि विरोध करने पर कर्मियों ने न केवल अभद्रता की, बल्कि लगभग 2000 रुपये और कीमती सामान की अवैध वसूली के प्रयास किए। जब इस पूरी घटना को मोबाइल में कैद करने की कोशिश की गई, तो कर्मचारियों ने जान से मारने की धमकी देते हुए फोन छीनने का प्रयास किया।
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना स्थल की भौगोलिक स्थिति के कारण पीड़ित परिवार को घंटों तक न्याय के लिए भटकना पड़ा। सड़क के एक तरफ स्वर्णकारों की दुकानें परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में आती हैं, जबकि दूसरी तरफ सुमन तिवारी की दुकान तुकोगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
जब पीड़ित पक्ष शिकायत लेकर परदेशीपुरा थाने पहुँचा, तो पुलिस ने सीमा विवाद का हवाला देकर मामला टाल दिया। इसके बाद पीड़ित पक्ष द्वारा तुकोगंज थाने में लिखित आवेदन दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला अभिभाषक संघ के पूर्व अध्यक्ष राम भदौरिया के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता पीड़ित परिवार के समर्थन में आगे आए हैं।
मौके पर धर्मेंद्र साहू, प्रकाश यादव, चेतन तिवारी, प्रभात पांडे, हनी चौहान, मोहित सिलावट और शिवानी चौधरी सहित कई कानूनविदों ने पहुँचकर पुलिस की निष्क्रियता और निगम की तानाशाही के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है।
वकीलों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द ही दोषी निगम कर्मियों पर अवैध वसूली और महिला उत्पीड़न की धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल तुकोगंज पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है।
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