30 दिन में चेकपोस्ट खोलने के आदेश: भ्रष्टाचार के अड्डे फिर चालू; हाई कोर्ट के आदेश से मचा बवाल, सरकार की ‘सुशासन’ नीति पर उठे तीखे सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते बंद परिवहन चेकपोस्ट फिर से शुरू होंगे। हाई कोर्ट के 30 दिन में इन्हें खोलने के आदेश ने न सिर्फ सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि ट्रांसपोर्ट जगत में भी जबरदस्त विरोध की आग भड़का दी है। जिन नाकों को अवैध वसूली का अड्डा बताकर बंद किया गया था, उन्हें दोबारा खोलने की कवायद अब ‘सुशासन’ के दावे पर सीधा हमला मानी जा रही है।
सरकार पर अवमानना की तलवार
मामला 3 जनवरी 2023 के आदेश की अवमानना से जुड़ा है, जिस पर हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी बंद परिवहन चेकपोस्ट 30 दिनों में फिर शुरू किए जाएं। 1 जुलाई 2024 से राज्य सरकार ने आरटीओ नाकों को बंद कर दिया था, यह कहते हुए कि इससे भ्रष्टाचार और अवैध वसूली पर रोक लगेगी। लेकिन अब कोर्ट के आदेश ने पूरी व्यवस्था को उलटने की स्थिति बना दी है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों का विरोध...फिर लौटेगा भ्रष्टाचार
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और इंदौर ट्रक ऑपरेटर एंड ट्रांसपोर्ट एसो. ने फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अध्यक्ष सीएल मुकाती का कहना है कि चेकपोस्ट कभी भी ओवरलोडिंग रोकने का साधन नहीं रहे, बल्कि ये केवल अवैध वसूली के केंद्र बन गए थे।
चालकों की पीड़ा: जाम, वसूली और उत्पीड़न
ट्रांसपोर्टर्स के अनुसार, चेकपोस्ट के दौर में हालात बेहद खराब थे। घंटों लंबा जाम, चेकिंग के नाम पर देरी, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न, खुलेआम अवैध वसूली हो रही थी। चेकपोस्ट बंद होने के बाद व्यवस्था सरल हुई, लेकिन अब फिर से वही पुरानी व्यवस्था लौटने का खतरा है।
सरकार के फैसले का बचाव
संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि एक जुलाई 2024 को चेकपोस्ट बंद करना प्रदेश में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम था। उनका दावा है कि इससे ट्रक चालकों को जाम, देरी और प्रताड़ना से राहत मिली थी।
अब अगली लड़ाई अदालत में
एआईएमटीसी और आईटीओटीए ने साफ कर दिया है कि वे हाईकोर्ट की डबल बेंच में रिवीजन पिटीशन दाखिल करेंगे। संगठनों का कहना है कि वे लाखों ट्रक चालकों के हित और ‘भ्रष्टाचार मुक्त परिवहन व्यवस्था’ को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
भ्रष्टाचार के ‘सबूत’ पेश करने की तैयारी
संगठनों ने दावा किया है कि वे अदालत में ऐसे ठोस प्रमाण पेश करेंगे, जिनमें एक परिवहन सिपाही के पास से करोड़ों की संपत्ति, 52 किलो सोना और 250 किलो चांदी बरामद होने जैसे मामले शामिल हैं। साथ ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा अवैध वसूली पर लिखे गए पत्र को भी आधार बनाया जाएगा।
तकनीक बनाम चेकपोस्ट... नया सिस्टम बनाम पुराना खेल
केंद्र सरकार के एमओआरटीएच नियमों के तहत अब टोल प्लाजा पर ऑटोमैटिक वेटिंग सिस्टम और ओवरलोडिंग पर चार गुना पेनाल्टी की व्यवस्था लागू की जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है, जब तकनीक से निगरानी संभव है, तो फिर भ्रष्टाचार से बदनाम चेकपोस्ट की जरूरत क्यों?
असली लड़ाई अब शुरू हुई
क्या चेकपोस्ट की वापसी से फिर वही ‘वसूली राज’ लौटेगा? या सरकार और कोर्ट मिलकर ऐसा मॉडल बनाएंगे जिसमें पारदर्शिता भी रहे और नियमों का पालन भी? फिलहाल, आदेश ने साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश में परिवहन व्यवस्था पर टकराव अभी खत्म नहीं हुआ, बल्कि असली लड़ाई अब शुरू हुई है।
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