15 दिन में एक लेन तोड़ने के दिए आदेश: बीआरटीएस हटाने में देरी पर हाई कोर्ट सख्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में बिगड़ते ट्रैफिक और बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने में हो रही देरी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट में कड़ी सुनवाई हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा कि जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति अब नहीं चलेगी।
सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल, पीडब्ल्यूडी के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, डीएसपी ट्रैफिक और बीआरटीएस तोड़ने वाला ठेकेदार मौजूद रहे।
अधिकारियों ने एलिवेटेड कॉरिडोर और रैलिंग को लेकर तर्क रखे, जिस पर कोर्ट ने कहा कि ईमानदारी और ठोस योजना के साथ काम क्यों नहीं हो रहा? कोर्ट ने साफ कहा कि विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जबकि परेशानी जनता को उठानी पड़ रही है।
ऐसी बहानेबाजी नहीं चलेगी, कहते हुए खंडपीठ ने निर्देश दिए कि तय समय में काम न होने पर ठेकेदार के साथ निगम पर भी पेनल्टी लगाई जाए।
एलिवेटेड कॉरिडोर पर सवाल
बीआरटीएस के स्थान पर प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के तर्क पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि इससे शहर की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। वर्तमान बीआरटीएस पहले से ही यातायात अव्यवस्था और आम जनता के लिए गंभीर असुविधा का कारण बना है, यह टिप्पणी रिकॉर्ड पर ली गई।
पीडब्ल्यूडी ने बताया कि एलआईजी से नवलखा तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर बनने तक बीआरटीएस की एक तरफ की रैलिंग 11 किमी में से 6 किमी बैरिकेड के रूप में जरूरी है। इस पर याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया ने विरोध जताते हुए कहा कि बीआरटीएस हटाने का निर्णय स्वयं सरकार का था, फिर भी मामला एक साल से अधिक समय से अटका है।
एलिवेटेड कॉरिडोर का बहाना बनाकर पूर्व आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है, यह तर्क रखा गया। उन्होंने यह भी बताया कि 2019 में मंजूर एलिवेटेड कॉरिडोर का शिलान्यास जनवरी 2024 में हुआ, फिर भी ठोस और समयबद्ध योजना सामने नहीं है। अन्य शहरों के उदाहरण देते हुए इंदौर को प्रशासनिक प्रयोग बनाए जाने की आलोचना की गई।
ठेकेदार पर सख्ती, संयुक्त बैठक के निर्देश
सुनवाई में ठेकेदार ने नुकसान का हवाला देकर रैलिंग और बस स्टॉप हटाने में असमर्थता जताई। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सार्वजनिक जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता। निगम कमिश्नर को ठेकेदार के खिलाफ ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
खंडपीठ ने कलेक्टर, निगम कमिश्नर और अधिवक्ताओं की समिति की संयुक्त बैठक कर ठोस योजना बनाने को कहा। कोर्ट ने निर्देश दिए कि 15 दिन में बीआरटीएस के एक तरफ की लेन का हिस्सा तोड़कर रिपोर्ट पेश की जाए। अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
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