स्कूली किताबों के नाम पर खुली लूट: आखिर कब रुकेगी यह मोनोपॉली
KHULASA FIRST
संवाददाता

अंशुल पंडित स्वतंत्र लेखक खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बच्चों की शिक्षा एक पवित्र और आवश्यक व्यवस्था मानी जाती है, जो वर्तमान में कुछ निजी दुकानदारों और व्यवस्थाओं की मोनोपॉली का शिकार बनती जा रही है। नए सिलेबस की किताबों के नाम पर अभिभावकों को खुलेआम लूटा जा रहा है।
शहर के स्कीम 71 स्थित नाकोड़ा स्टेशनरी और राजेंद्र नगर की अग्रवाल स्टेशनरी पर सेंट जोसेफ स्कूल का पूरा कोर्स केवल सेट के रूप में दिया जा रहा है। अभिभावक यदि केवल 1-2 किताबें लेना चाहें, तो उन्हें मना कर दिया जाता है।
दुकानदारों का साफ कहना है- हम सेट नहीं तोड़ेंगे। कहीं कहा जाता है- 10 तारीख के बाद आना, जब सेट बचेंगे तब किताब अलग से दी जाएगी। अन्यथा 10 दिन बाद भी थक-हारकर मजबूरन पूरा सेट ही खरीदना होगा। इसके चलते जिन अभिभावकों के पास पहले से कुछ किताबें हैं, वे भी पूरा सेट खरीदने को विवश हैं।
2nd क्लास का सेट लगभग 2700 रुपए का है। ऐसे में मान लें कि जरूरत मात्र 700 रुपए की किताबों की है, तो दुकानदारों की मनमानी के चलते वे किताबें, जो छोटे बच्चों के काम आ सकती थीं, रद्दी में बेचना पड़ेंगी।
यह सीधी-सीधी आर्थिक लूट नहीं तो क्या है? इसके लिए जिम्मेदार कौन है, शिक्षा विभाग? स्कूल प्रबंधन या ये स्टेशनरी दुकानदार? अथवा इन सबकी मिलीभगत से चल रही कोई सुनियोजित मोनोपॉली?
शासन-प्रशासन तत्काल संज्ञान लें
अभिभावकों की मांग है कि शासन और प्रशासन तत्काल संज्ञान लें और इस प्रकार की मोनोपॉली व जबरन बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए। दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो। साथ ही अभिभावकों को स्वतंत्र रूप से किताबें खरीदने का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
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