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एक बार फिर एसआई के कारण निपटे टीआई बिरथरे: ड्राइवर खुदकुशी कांड में डीसीपी ने किया लाइन अटैच; सोमला डकैत की जमानत मामले में भी हो चुके लाइन हाजिर

KHULASA FIRST

संवाददाता

10 अप्रैल 2026, 2:20 pm
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एक बार फिर एसआई के कारण निपटे टीआई बिरथरे

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राजेंद्र नगर थाने से उठी एक मौत की गूंज अब पूरे पुलिस कमिश्नरेट की साख पर सवाल बनकर खड़ी है। टैक्सी ड्राइवर अभिषेक पाटिल का सुसाइड वीडियो सामने आने के बाद रिश्वतखोरी, मारपीट और पुलिसिया दबाव के गंभीर आरोपों ने महकमे की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला दिया है।

कार्रवाई की आंधी में जहां सब इंस्पेक्टर मनोहर पाल सस्पेंड हो चुके हैं, वहीं टीआई नीरज बिरथरे को भी लाइन अटैच कर दिया गया है। खास बात यह कि राजेंद्र नगर थाने से एसआई मनोहर पाल के कारण निपटे टीआई नीरज बिरथरे पहले बाणगंगा टीआई रहते एसआई कमल किशोर के कारण लाइन हाजिर हुए थे। कार्रवाई कुख्यात सोमला डकैत की जमानत हो जाने के चलते हुई थी।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों पलास परिसर (राऊ) निवासी ड्राइवर अभिषेक पाटिल ने खुदकुशी कर ली थी। मौत से पहले उसने जो वीडियो छोड़ा, उसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। वीडियो में उसने साफ आरोप लगाया कि एक एक्सीडेंट केस को दबाने के एवज में एसआई मनोहर पाल ने उससे 50 हजार रुपए मांगे गए।

रकम नहीं देने पर थाने में उसके साथ मारपीट और प्रताडऩा की गई। यह आरोप सीधे-सीधे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। घटना के बाद महकमे में हड़कंप मच गया। जोन-1 के डीसीपी कृष्ण लालचंदानी ने पहले एसआई मनोहर पाल को सस्पेंड किया था।

एसआई मनोहर पाल ने अपनी कॉलर बचाने के लिए बताया था कि उस दौरान टीआई नीरज बिरथरे और एडीसीपी जोन-1 सुमित केरकेटा भी थाने पर मौजूद थे। डीसीपी ने एसीपी (गांधीनगर) निधि सक्सेना को जांच सौपी थी। थाने के सीसीटीवी फुटेज निकाले जाने पर टीआई बिरथरे भी अभिषेक से बात करते हुए नजर आए हैं।

टीआई ने अभिषेक के लंबे बालों पर टिप्पणी भी की थी, लेकिन एक्सिडेंट का केस दर्ज नहीं करवाया। जांच प्रभावित न हो इसलिए डीसीपी ने टीआई नीरज बिरथरे को कल लाइन अटैच कर दिया। एसआई के साथ टीआई की भूमिका पर भी जांच बैठाई है।

यह कदम महज औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि जांच की आंच अब थाने के शीर्ष तक पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, सवाल सिर्फ एक एसआई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी जांच का विषय है कि थाना प्रभारी अपने अधीनस्थों पर नियंत्रण रखने में क्यों नाकाम रहे।

क्या वरिष्ठ अधिकारियों को समय रहते मामले की सही जानकारी नहीं दी गई, या जानबूझकर इसे दबाने की कोशिश हुई जांच इन्हीं बिंदुओं पर आगे बढ़ रही है, जो कि अब निर्णायक मोड़ पर है।

परिजन के बयान निभाएंगे अहम भूमिका
मामले को और उलझाने वाली बात यह है कि अब मृतक अभिषेक के चरित्र को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। कुछ लोग आत्महत्या की वजह उसका गर्लफ्रेंड से विवाद और शराब की लत बता रहे हैं। पुलिस ने भी उसका आपराधिक रिकॉर्ड सामने रखा है, जिसमें विभिन्न थानों में आठ केस दर्ज है।

हालांकि, सवाल यह है कि क्या ये बातें पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं? घटनास्थल से जुड़े लोगों, वाहन चालक और एक ऑटो ड्राइवर की तलाश जारी है, ताकि पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके।

मृतक के मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल भी जांच के दायरे में हैं। परिजनों के बयान भी इस केस में अहम भूमिका निभाने वाले हैं। एसीपी की जांच रिपोर्ट तय करेगी कि यह मामला सिर्फ विभागीय कार्रवाई तक सीमित रहेगा या फिर बड़े स्तर पर जवाबदेही तय होगी।

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