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एमजी रोड पर बंसीधर बजा रहा भ्रष्टाचार की बंसी

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 मार्च 2026, 3:29 pm
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एमजी रोड पर बंसीधर बजा रहा भ्रष्टाचार की बंसी

एक लाख स्क्वेयर फीट का प्लॉट और एक-एक लाख स्क्वेयर फीट की तीन बिल्डिंगें खड़ी कर चुका, अब चौथी का निर्माण शुरू, कैसे बना नक्शा?

राजेंद्र खंडेलवाल 98931-90781 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम, बिल्डर और नेताओं के भ्रष्ट गठबंधन का ताजा उदाहरण एमजी रोड पर नजर आया है। जिन जिम्मेदारों पर शहर को सुव्यवस्थित करने की जिम्मेदारी है, वो ही इस शहर को पलीता लगाने से नहीं चूक रहे। एमजी रोड पर इंद्रप्रस्थ टॉवर के सामने एक लाख स्क्वेयर फीट के प्लॉट पर बिल्डर बंसीधर अग्रवाल ने एक-एक लाख स्क्वेयर फीट की तीन बिल्डिंगें तो वैसे ही तान दी और अब चौथी बिल्डिंग बना रहा है। बड़ा सवाल ये है कि इसका नक्शा नगर निगम में कैसे पास हो गया?

एमजी रोड पर ट्रैफिक की समस्या का आए दिन रोना रोने वाले नेता-अधिकारी भ्रष्ट गठजोड़ करके खुद ही इस समस्या को बढ़ा रहे हैं और बेचारे भोले-भाले वाहन चालकों से जबरन जजिया कर की तरह चालान बनाकर वसूली कर रहे हैं।

इंद्रप्रस्थ टॉवर के सामने बंसीधर अग्रवाल, उसकी पत्नी माया, बेटे विजय और बेनीप्रसाद अग्रवाल ने मिलकर पहले बंसी प्लाजा, फिर बंसी ट्रेड टेंडर और इसके बाद माया मेंशन बनाया।

ये तीनों भी अवैध हैं क्योंकि ये जी+3 की अनुमति वाले हैं लेकिन मौके पर 4 से 5 मंजिला तक तने होकर लोगों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। ये तीनों कमर्शियल कॉम्पलेक्स एक लाख स्क्वेयर फीट के प्लॉट पर बन गए हैं। क्या ये संभव है? ये प्लॉट कुल एक लाख स्क्वेयर फीट का है और इस पर ये तीनों बिल्डिंगें एक-एक लाख स्क्वेयर फीट की हैं।

क्या ये बिल्डर अग्रवाल के साथ नेताओं-नगर निगम के अधिकारियों के साथ गठजोड़ के बिना संभव था? वर्षों से ये तीनों बिल्डिंगें इंदौर की छाती पर भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और ट्रैफिक समस्या के साथ मंूग दल रही हैं।

न एमओएस छोड़ा, न एफएआर का पालन, सब घोलकर पी गया अग्रवाल
मामले में शहर के आरटीई एक्टिविस्ट और पूर्व पार्षद परमानंद सिसौदिया ने आपत्ति लगाई है। अपनी आपत्ति में उन्होंने कहा है कि इंद्रप्रस्थ टॉवर के सामने बंसी ट्रेड सेंटर, माया मेंशन, बंसी प्लाजा के पास 100 स्क्वेयर फीट निर्माण की भी अनुमति नहीं मिल सकती क्योंकि भूमि विकास नियम 1984 के नियम 212 के अनुसार, इस परिसर में ग्राउंड कवरेज 33 प्रतिशत तक का ही होगा यानी 33 प्रतिशत निर्माण ही संभव है, लेकिन तीनों बिल्डिंगों में 42 प्रतिशत का निर्माण किया जा चुका है।

यानी 9 प्रतिशत ज्यादा। आश्चर्य की बात है कि निगम ने उद्यान, पार्किंग आदि की चुराई हुई 20 हजार स्क्वेयर फीट निर्माण की अनुमति दे दी है, जबकि पहले तो ये अतिरिक्त निर्माण को तोड़ना था। इसके बाद बात आती है एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेशो की। ये 1.5 प्रतिशत ही हो सकता है यानी 1.50 लाख स्क्वेयर फीट से ज्यादा का निर्माण नहीं किया जा सकता लेकिन भ्रष्ट बिल्डर बंसीधर अग्रवाल ने नेताओं और अधिकारियों के साथ साठगांठ करके वैसे ही 1.86 लाख स्क्वेयर फीट पर तीनों बिल्डिंगें तान दी हैं।

शर्म की बात है कि नगर निगम इस अतिरिक्त निर्माण का हाऊस टैक्स भी वसूल रही है। कैसे? जो निर्माण अवैध है, उसका टैक्स निगम कैसे वसूल सकती है? और तो और, निगम ने इन अवैध निर्माणों का नक्शा भी पास कर रखा है। जाहिर है कि निगम के अधिकारी और नेता मिलकर अवैध निर्माण को वैध करने की साजिश रच चुके हैं।

तीसरी बार, इन अवैध बिल्डिंगों की ऊंचाई की है। कोई भी बिल्डिंग 40 मीटर से ज्यादा ऊंची नहीं हो सकती यानी अधिकतम चार मंजिला तक बनाई जा सकती है। लेकिन भ्रष्ट बिल्डर बंसीधर अग्रवाल ने तीनों बिल्डिंग माया मेंशन, बंसी ट्रेड सेंटर, बंसी प्लाजा में अवैध मंजिलें तान रखी है और वो भी इस शहर के जागरूक नागरिकों की नाक के नीचे।

ये कैसे हो गया? नगर निगम के अधिकारी और शहर के नेता के गठजोड़ और पैसों की हवस का खामियाजा शहर की बेचारी निरीह जनता भुगतने को मजबूर हो रही है। अधिकतम चार मंजिला भवनों के निर्माण के नियम के विपरित माया मेंशन 5 मंजिल का और बंसी ट्रेड सेंटर 6 मंजिल का खड़ा होकर नेता-अधिकारी की सरपरस्ती में शहर के लोगों को मुंह चिढ़ा रहा है।

कहां से आई 20 हजार स्क्वेयर फीट जगह?
सिसौदिया ने बताया कि नियम ये है कि दोनों बिल्डिंगों के बीच 25 फीट का एमओएस छोड़ा जाना चाहिए। यानी दोनों ओर से 12-12 स्क्वेयर फीट। इस पर उद्यान व पार्किंग होते हैं, लेकिन बंसीधर अग्रवाल इन जमीनों को भी खा गया। तीनों बिल्डिंगों के बीच में 6 फीट का एमओएस भी नहीं छुटा है।

बंसीधर का पेट इतने पर भी नहीं भरा और वो एमजी रोड और जंजीरवाला चौराहा की ओर जाने वाले मार्ग पर सेटबैक भी खा गया। ये जमीनें खाकर उसने 20 हजार स्क्वेयर फीट जगह बचा ली जिस पर वो एक और बिल्डिंग का निर्माण कर रहा है।

ये बड़ा सवाल

तीन करोड़ रुपए का खेल नक्शा पास करने में
सिसौदिया का आरोप है कि इस अवैध चुराई हुई जमीन पर कमर्शियल कॉम्पलेक्स का नक्शा आखिरकार नगर निगम में कैसे पास हो गया? ये बड़ा सवाल है। खबर है कि इसमें तीन करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। जो नेता से लेकर अधिकारियों तक बंटे हैं। अब अग्रवाल परिवार इसे 50 हजार स्क्वेयर फीट की दर से बेचेगा और करीब 350 करोड़ रुपए कमाएगा।

यानी शहर की छाती पर पैसों की हवस में न केवल अग्रवाल परिवार बल्कि नेता और अधिकारी मूंग दलेंगे। उन्होंने बताया कि बंसी प्लाजा का निर्माण 1973 में किया गया था और 2005 में उनकी आपत्ति के बाद शासन ने नक्शा निरस्त कर दिया था। तब से लेकर आज तक सब चुपचाप बैठे रहे और अब अचानक निगम ने नक्शा पास कर दिया।

ये कैसे हो गया? जाहिर है कि सभी का भ्रष्ट गठजोड़ हुआ है। शातिर बंसीधर अग्रवाल व उसके परिजनों ने जमीन का विभाजन नहीं कराया था। यदि विभाजन करा लेता तो चारों बिल्डिंग के लिए जमीन तय हो जाती लेकिन उसे जान-बूझकर ऐसा नहीं किया। अब निगम अधिकारी कहते हैं कि हमने सारे रिकार्ड नष्ट कर दिए हैं लेकिन मेरे पास सारे रिकार्ड मौजूद हैं।

ट्रैफिक की बड़ी उलझन का जिम्मेदार ये भ्रष्ट गठजोड़
एमजी रोड पर ट्रैफिक को लेकर अधिकारी आए दिन कोई न कोई प्रयोग करते हैं। लोगों को परेशान करते हैं। बेचार भोले-भाले वाहन चालकों के हेलमेट को लेकर या अन्य कारणों से चालान बनाते हैं लेकिन दूसरी ओर ऐसे भ्रष्ट बिल्डरों को बख्श देते हैं जो शहर में जमीनों की खुली हेराफेरी, चोरी करते हैं और उस पर पैसा बांटकर निर्माण करते हैं और करोड़ों कमाते हैं।

नियम के विपरीत 6 मंजिला निर्माण कर रहा
बंसीधर अग्रवाल का परिवार सारे नियम-कायदों को ताक में रखकर अब इस चुराई हुई 20 हजार स्क्वेयर फीट जमीन पर एक और कमर्शियल बिल्डिंग बना रहे हैं। इसके लिए दो मंजिला तलघर खोदा जा रहा है। इससे ऊपर चार मंजिला कमर्शियल कॉम्पलेक्स बनेगा। न एमओएस है और न ग्राउंड कवरेज क्योंकि चुराई हुई जमीन है।

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