खबर
Top News

बच्चों की मौत पर उपहास उड़ाने वाले अधिकारी को मिला संरक्षण: भ्रष्टाचार और बदजुबानी का सांवेर मॉडल

KHULASA FIRST

संवाददाता

10 अप्रैल 2026, 4:01 pm
145 views
शेयर करें:
बच्चों की मौत पर उपहास उड़ाने वाले अधिकारी को मिला संरक्षण

सांवेर बीआरसी पटेल पर संगीन आरोपों के बाद भी केवल जांच कराने का खेल

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शिक्षा विभाग की मर्यादाओं को ताक में रख मनमानी करने वाले सांवेर के बीआरसी मुकेशचंद्र पटेल के काले कारनामों ने विभाग की साख को धूल-धूसरित कर दिया। बच्चों की जान की परवाह न करते हुए “जिसको मरना है, वो मरेगा’ जैसा संवेदनहीन बयान देने वाले इस अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई महज एक छलावा साबित हुई।

गंभीर आरोपों के बावजूद ऊंचे रसूख और साठगांठ के चलते हर बार की तरह जांच की फाइल दबा दी गई, जिससे भ्रष्ट तंत्र के हौसले बुलंद हैं। दस्तावेजों से साफ है कि वरिष्ठ अधिकारी ठोस कार्रवाई के बजाय केवल जांच करवाने का खेल खेलकर दोषी को बचाने का रास्ता बना रहे हैं।

इसी कड़ी में जिला परियोजना समन्वयक संजय कुमार मिश्रा द्वारा 26 मार्च को जारी आदेश ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। मुकेश पटेल के विरुद्ध समाचार-पत्रों में प्रकाशित खबरों की जांच के लिए महू और देपालपुर के बीआरसी को निर्देशित किया गया।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि जांच का यह खेल केवल समय काटने और मामले को ठंडा करने के लिए रचा गया। जब शिकायत सीधे कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ तक पहुंची, तो किसी वरिष्ठ स्वतंत्र समिति के बजाय समकक्ष अधिकारियों से जांच करवाना केवल खानापूर्ति प्रतीत होती है।

विवादों से पुराना नाता रहा पटेल का
11 सितंबर 2025 को जारी कारण बताओ सूचना-पत्र (क्र. 3030) के अनुसार समीक्षा बैठक में जब जर्जर भवनों और बारिश में बच्चों की सुरक्षा पर चर्चा हुई, तब पटेल ने कहा “जिसको मरना है वह मरेगा।‘ इस गंभीर कदाचरण पर सख्त कार्रवाई के बजाय मामले को रफा-दफा कर दिया गया।

इसी का नतीजा है कि पटेल अब अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ भी अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज पर उतर आए। 2 अप्रैल 2026 को कलेक्टर कार्यालय में मनोज राठौर सहित दर्जनों कर्मचारियों ने सामूहिक शिकायत दर्ज कराई कि वे पटेल की प्रताड़ना के कारण मानसिक तनाव में हैं।

भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि खुलासा फर्स्ट में खबर प्रकाशित होने के बाद अब साक्ष्यों को ठिकाने लगाने का दौर शुरू हो गया। जो कूलर और पंखे महीनों से दफ्तर से नदारद थे और जिनका भुगतान कागजों पर पहले ही हो चुका था, वे अब जांच के डर से रातोरात कार्यालय पहुंचा दिए गए।

पटेल द्वारा दी जा रही यह सफाई कि पुताई के कारण सामान दुकानदार के पास रखा था, विभाग की आंखों में धूल झोंकने की एक और नाकाम कोशिश है। निजी स्कूलों की मान्यता के नाम पर लाखों की वसूली और जनशिक्षकों के यात्रा भत्ते में कमीशनखोरी ने सांवेर शिक्षा केंद्र को वसूली का अड्डा बना दिया।

हैरानी की बात यह कि एक तरफ बीआरसी खुद को पदमुक्त करने के लिए आवेदन देने का दावा कर रहे, वहीं दूसरी तरफ वे चुनौती दे रहे हैं कि पद से नहीं हटेंगे और आरोप लगाने वालों को अंजाम भुगतना पड़ेगा। एक शासकीय सेवक का यह अहंकारी रवैया प्रशासनिक संरक्षण की ओर इशारा करता है। अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन जांच करवाने के इस खेल को खत्म कर ठोस दंडात्मक कार्रवाई करेगा।

जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते जिम्मेदार
सांवेर बीआरसी मुकेशचंद्र पटेल के विरुद्ध अखबारों में प्रकाशित खबर आपके माध्यम से संज्ञान में आई। उसकी हम जांच करवाएंगे। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। पटेल ने स्कूली बच्चों को लेकर की गई अमानवीय टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से अपनी गलती मानते हुए विभागीय ग्रुप में लिखित में स्वीकार किया था कि वह शब्द गलती से मुंह से निकल गए थे। उन्होंने भविष्य में ऐसी गलती की पुनरावृत्ति नहीं करने का आश्वासन भी दिया था। भ्रष्टाचार के आरोपों पर दो सदस्यीय टीम बनाकर जांच करवाएंगे। -संजय कुमार मिश्रा, जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केंद्र, इंदौर

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!