अब इस थाने की पुलिस पर सवालिया निशान: आधी रात को बुजुर्ग किसान को डराने के आरोप; कहां पहुंचा मामला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर ।
इंदौर पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लसूड़िया थाने के विवाद के बाद अब बाणगंगा थाना पुलिस पर एक 64 वर्षीय बुजुर्ग किसान को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और अनुचित दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ तक पहुंच गया है।
कौन हैं जसराज मेहता?
बाणगंगा क्षेत्र निवासी जसराज मेहता (64 वर्ष) पेशे से किसान हैं। उनका आरोप है कि 15 से 20 साल पुराने एक कथित प्लॉट बिक्री मामले में किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके खिलाफ झूठी शिकायत की, जबकि मेहता का कहना है कि उन्होंने कभी कोई प्लॉट बेचा ही नहीं। इतना ही नहीं बाणगंगा क्षेत्र में उनके नाम कोई जमीन भी नहीं है। इसके बावजूद पुलिस लगातार उन्हें थाने बुलाकर समझौता करने और पैसे लौटाने का दबाव बनाती रही। उनकी बेटी के प्लॉट पर अवैध कब्जे का आरोप भी है, जिस पर वे अलग से कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं।
बयान मांगा, लेकिन दर्ज नहीं किया
याचिका में बताया गया कि मेहता को बार-बार थाने बुलाया गया, लेकिन तीन बार पहुंचने पर भी उनका बयान दर्ज नहीं किया गया। 2 अप्रैल 2026 थाना पहुंचे, लेकिन थाना प्रभारी की छुट्टी का हवाला देकर बयान नहीं लिया गया। उनसे समय मांगने का आवेदन लिखवाया गया। 19 अप्रैल फिर बुलाया गया, फिर भी बयान दर्ज नहीं हुआ। दोनों बार बयान की जगह समझौते और पैसे लौटाने का दबाव बनाया गया। शिकायत की कॉपी तक नहीं दी गई।
सबसे गंभीर आरोप: आधी रात घर पर दबिश
20 अप्रैल की रात करीब 12 बजे जसराज मेहता के मुताबिक 8 पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और दावा किया कि उनके खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है और वे गिरफ्तार करने आए हैं। जबकि उस वक्त कोई FIR दर्ज ही नहीं थी।मेहता का कहना है कि घर में लगे CCTV कैमरों में यह पूरी घटना रिकॉर्ड है।
उनके अधिवक्ता अजय मिश्रा ने दावा किया कि उनके पास लगातार तीन दिनों के CCTV फुटेज हैं, जिनमें पुलिसकर्मी रात 1 से 2 बजे के बीच घर के बाहर आते-जाते नजर आ रहे हैं। अधिवक्ता का आरोप है कि थाना प्रभारी सियाराम गुर्जर के निर्देश पर यह डराने-धमकाने की कोशिश की गई।
पुलिस आयुक्त तक गई शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
जसराज मेहता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से पुलिस कमिश्नर और डीसीपी जोन-3 को नोटिस भेजकर निष्पक्ष जांच और किसी वरिष्ठ अधिकारी से मामले की जांच कराने की मांग की। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने पर उन्हें मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
बुजुर्ग और बीमार, फिर भी राहत नहीं
मेहता ने बताया कि वे कई बीमारियों से जूझ रहे हैं और इस उम्र में लगातार थाने के चक्कर और रात की दबिशों से उन पर गहरा मानसिक दबाव पड़ रहा है। फिर भी पुलिस ने उनकी परिस्थितियों का कोई संज्ञान नहीं लिया।
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