मेले पर हाईकोर्ट की मुहर: बिना नोटिस मंजूरी रद्द करना गलत; एमआईसी का फैसला निरस्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कर्बला मैदान में लगने वाले पारंपरिक मेले को लेकर चल रहे विवाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मेले की अनुमति बहाल करते हुए मेयर इन काउंसिल (MIC) द्वारा मंजूरी निरस्त करने के फैसले को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्ष को बिना नोटिस दिए और उसका पक्ष सुने बिना अनुमति रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।
यह याचिका वक्फ कर्बला इंतेजामिया कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल हमीद नियारगर की ओर से दायर की गई थी, जिसमें मध्यप्रदेश शासन, मेयर इन काउंसिल और नगर निगम आयुक्त को पक्षकार बनाया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा- एकतरफा कार्रवाई स्वीकार्य नहीं
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि नगर निगम पहले ही मेले की अनुमति दे चुका था और उसके आधार पर तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। इसके बाद अचानक एमआईसी ने अनुमति रद्द कर दी, जबकि संबंधित पक्ष को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर।
कोर्ट ने माना कि इस तरह पारंपरिक मेले की अनुमति एकतरफा तरीके से रद्द नहीं की जा सकती। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 25 जून को एमआईसी द्वारा पारित निर्णय को निरस्त (क्वैश) कर दिया।
अगले वर्ष के लिए भी जारी किए दिशा-निर्देश
हाईकोर्ट ने भविष्य में विवाद से बचने के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि अगले वर्ष से मेला आयोजित करने के लिए आयोजकों को कम से कम दो माह पहले आवेदन देना होगा। वहीं नगर निगम को भी आवेदन पर कम से कम 25 दिन पहले निर्णय लेना होगा, ताकि सभी शर्तें और उनका पालन स्पष्ट रूप से तय किया जा सके।
क्या है पूरा विवाद
नगर निगम ने पहले कर्बला मैदान में मेले की अनुमति दी थी। बाद में महापौर को इसकी जानकारी मिलने पर उन्होंने आपातकालीन वर्चुअल एमआईसी बैठक बुलाई। बैठक में यह सवाल उठाया गया कि वर्ष 2025 में मेले की अनुमति की शर्तों का उल्लंघन हुआ था, ऐसे में दोबारा अनुमति कैसे दी गई।
बैठक में यह भी कहा गया कि प्रशासन के दबाव में अनुमति दी गई। इसके बाद MIC ने प्रस्ताव पारित कर पहले जारी अनुमति को संशोधित करते हुए केवल ताजिए ठंडे करने की अनुमति देने और मेला एवं दुकानों पर रोक लगाने का निर्णय लिया।
निगम ने लगाया था शर्तों के उल्लंघन का आरोप
नगर निगम का तर्क था कि कर्बला मैदान निगम की भूमि है और पिछले वर्ष आयोजकों ने दुकानों का किराया निगम के खाते में जमा नहीं कराया था, जिससे अनुमति की शर्तों का उल्लंघन हुआ।
निगम का यह भी दावा था कि इस बार भी औपचारिक अनुमति मिलने से पहले ही मौके पर दुकानें लगनी शुरू हो गई थीं।
हालांकि हाईकोर्ट ने फिलहाल बिना नोटिस अनुमति निरस्त करने की प्रक्रिया को गलत मानते हुए मेले की अनुमति बहाल कर दी है।
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