क्राइम ब्रांच के दो पुलिसकर्मी एटीएस की रडार पर: सीडीआर के काले खेल का खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

टावर लोकेशन से पकड़ाए, पूछताछ में खुल सकते हैं बड़े राज
डिटेक्टिव एजेंसी संचालक से लिंक पैसों के बदले बेचते थे कॉल डिटेल!
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कानून के रखवालों पर ही गोपनीय जानकारी के सौदे का गंभीर आरोप लगा है। क्राइम ब्रांच के दो पुलिसकर्मियों को आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। मामला आम लोगों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) बेचने से जुड़ा है, जिसने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अब मामले ने तूल पकड़ लिया है और आशंका जताई जा रही है कि मामला सिर्फ दो पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं है। एटीएस अब पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। अगर आरोप सही साबित हुए तो यह मामला पुलिस महकमे के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों एटीएस को इंदौर में 'इंदौर डिटेक्टिव सर्विस चलाने वाले मुकेश तोमर के बारे में जानकारी लगी थी। मुकेश तोमर पर आरोप था कि वह किसी भी व्यक्ति की कॉल हिस्ट्री, लोकेशन, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और मूवमेंट तक की जानकारी उपलब्ध कराने का दावा करता था।
एटीएस ने जांच शुरू करते हुए डिटेक्टिव एजेंसी के संचालक मुकेश तोमर की कॉल डिटेल खंगाली तो उसमें क्राइम ब्रांच के सिपाही रवींद्र का नंबर सामने आया। खुलासा हुआ कि मुकेश तोमर लोगों की निजी जानकारी निकालने का धंधा चला रहा था और पुलिसकर्मियों की मदद से यह नेटवर्क संचालित हो रहा था।
एटीएस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए सिपाही रवींद्र को उसके घर से उठा लिया। वहीं, ये भी खुलासा हुआ कि मुकेश तोमर के संबंध क्राइम ब्रांच के ही एएसआई राम पाल से हैं। एटीएस ने जानकारी निकाली तो उसके धोखाधड़ी के एक मामले में कार्रवाई के लिए महाराष्ट्र के लिए निकलने की बात सामने आई।
इसके चलते एटीएस ने टॉवर लोकेशन के आधार पर एएसआई रामपाल तक पहुंच गई। एएसआई राम को उस वक्त पकड़ा गया जब वह एक अन्य पुलिसकर्मी के साथ महाराष्ट्र जा रहा था।
संदेही नंबरों के साथ बताए नंबर भी जोड़ लेते थे
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुलिसकर्मी केस की जांच का बहाना बनाकर कंपनियों से सीडीआर निकलवाते थे। संदेही के साथ-साथ अन्य लोगों के नंबर जोड़कर उनकी भी कॉल डिटेल हासिल कर ली जाती थी, जिसे बाद में मोटी रकम लेकर बेचा जाता था।
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