अब भाजपा बताए, उसके बाप में है कितना दम: वंदे मातरम् न गाने पर रुबीना-फौजिया की जाएगी पार्षदी; भाजपाई परिषद ये कर पाएगी
KHULASA FIRST
संवाददाता

भाजपा की निगम परिषद हर बार देखती रह जाती है, मुस्लिम महिला पार्षद हर बार परिषद बैठक में अपने 'एजेंडा' का मुजाहिरा कर जाती हैं
पिछली परिषद में सम्मेलन के दौरान पढ़ी गई थी नमाज, इस बार वंदे मातरम् पर लगा दी बाप के नाम की ललकार
इंदौर में हुए दर्दनाक अग्निकांड के हताहतों को सांत्वना के लिए नहीं शब्द, खामनेई की मौत पर बहाए आंसू, श्रद्धांजलि भी दे दी
भाजपा की परिषद सिर्फ नारे लगाने, कमिश्नर को पत्र लिखने, थाने में एफआईआर करवाने की रस्म अदायगी तक सीमित
बाप के नाम पर चैलेंज के बाद अब परिषद के सामने दम दिखाने की खड़ी हुई चुनौती, सबकी नजरें अब मेयर, एमआईसी व सभापति पर
कांग्रेस ने तो दिखा दिया दम, केके मिश्रा, चिंटू चौकसे की दो-टूक से गद्गद् हुए इंदौरी, अब पटवारी की बारी
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
किसी के बाप में दम है तो वंदे मातरम् करवाकर दिखाए...! कांग्रेस की मुस्लिम महिला पार्षदों की इस चुनौती के बाद अब भाजपा बताए, उसके बाप में कितना दम है। ये तल्ख बयान औसत इंदौरी का है, जो ‘बाप में दम’ वाली दंभोक्ति के बाद से जबरदस्त रूप से आहत हैं।
इंदौर का मानना है कि मुस्लिम महिला पार्षदों के बाप में तो दम था, जो वे भाजपा से भरी-पूरी परिषद में ये चैलेंज कर रवाना हो गईं, लेकिन 48 घंटे बीतने के बाद भी भाजपा क्या कर रही है? सिवाय ‘भारत में रहना होगा तो वंदे मातरम् कहना होगा' जैसे ‘अनादिकाल' से लग रहे नारे गुंजाने के, संभागायुक्त के नाम पर पत्र लिखने और थाने में जाकर एफआईआर दर्ज करवाने की रस्म अदायगी के।
राष्ट्र की अस्मिता से जुड़े इस मसले पर भाजपा से अच्छा व दमदार काम तो उम्मीद से विपरीत कांग्रेस कर गुजरी। काम भी ऐसा किया कि इंदौरी गद्गद् हो गए, लेकिन जिन इंदौरियों ने अहिल्या नगरी में भाजपा की निगम परिषद बनवाई, वह 48 घंटे बाद भी राष्ट्रगीत का सम्मान कायम नहीं करवा पाई। वह भी ‘ट्रिपल इंजिन' सरकार के दौर में!
म सला अल्पसंख्यक बहुल खजराना, आजाद नगर इलाके की महिला पार्षद रुबीना खान व फौजिया शेख का है। रुबीना जहां सदैव मुखर रहती हैं तो फौजिया ज्यादातर खामोश। रुबीना तेवर के लिए तो फौजिया अपनी सौम्य छवि के लिए जानी जाती हैं, लेकिन वंदे मातरम् के मुद्दे पर दोनों का मिजाज एक-सा हो गया।
हो भी क्यों नहीं? वे कोई गलत थोड़े ही कर रहीं? वे वही कर रही हैं, जो उनके समर्थक वोटर्स के मिजाज से मेल खाता है। तभी वे निगम परिषद बैठक के मौके का इस्तेमाल नमाज पढ़ने के लिए भी कर लेती हैं, तो ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई को श्रद्धांजलि भी दे देती हैं।
अबकी बार वे वंदे मातरम् पर बाप के नाम का चैलेंज कर देती हैं कि है किसी में दम? यही नहीं, उस राजनीतिक दल को भी भाड़ में फेंक देती हैं, जिसके दम पर उनकी राजनीति ही नहीं, 2-3 दशक से दाल-रोटी भी चल रही है। यानी मुस्लिम महिला पार्षद अपने समर्थक वोटर्स से जुड़े एजेंडे से रत्तीभर भी दूर नहीं रहती।
हर बार परिषद की बैठक में वे अपने इसी ‘एजेंडा’ का मुजाहिरा कर शान से मुस्कुराते हुए रवाना हो जाती हैं। शहर के लिए वे भले ही खलनायिका हो जाती हों, लेकिन अपनी रियाया के बीच हीरो बनकर उभरती हैं। अपनी कौम व अपने वोटर्स के प्रति इससे अच्छी वफादारी और क्या हो सकती है? वे तो वही अब कर रही हैं, जिसके लिए वे पर्दानशीन होने के बाद भी राजनीति में आई हैं।
लिहाजा दिक्कत मुस्लिम महिला पार्षद के व्यवहार का नहीं है। मसला चुनी हुई निगम परिषद की बेबसी और परिषद बैठक के संवैधानिक नियम-कायदों की अनदेखी का है। 48 घंटे से ये अनदेखी व बेबसी इंदौर व इंदौरी एक बार फिर देख रहे हैं।
कांग्रेस ने तत्काल दिखाया दम, भाजपाई विरोध अब तक बेदम
वंदे मातरम् के मसले पर इंदौर की कांग्रेस ने न सिर्फ अकेले इंदौर, बल्कि देशभर को चौंका दिया। पार्टी व नगर निगम सदन के नेता चिंटू चौकसे तथा पार्टी के सर्वाधिक मुखर प्रवक्ता केके मिश्रा इस मुद्दे पर जिस बेबाकी से सामने आए, उससे न सिर्फ राजनीति से जुड़े लोग, बल्कि शहर भी चौंका।
चिंटू चौकसे ने दो-टूक कहा कि जिन्हें वंदे मातरम् से आपत्ति है, उनका कांग्रेस में कोई स्थान नहीं। मिश्रा ने वंदे मातरम् से कांग्रेस के नाते का खुलासा कर साफ कर दिया कि आजादी के इस जयघोष से असली नाता कांग्रेस का ही है, शेष भले ही इस नारे से लाड़ कर ‘उंगली कटाकर शहीद’ हो रहे हों।
‘भाड़ में जाए कांग्रेस’ जैसा घमंड चिंटू चौकसे ने पलभर भी मंजूर नहीं किया और एक तरह से ऐसे शब्द बोलने वाली रुबीना खान को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि अभी महिला पार्षद की पार्टी से बेदखली पर प्रदेश नेतृत्व की मुहर लगना शेष है।
फिर भी चौकसे के इस एक्शन ने साफ कर दिया कि वंदे मातरम् के मुद्दे पर कांग्रेस में कितना दम है। कट्टर भाजपाई व औसत इंदौरी भी कांग्रेस नेताओं के इस एक्शन से गद्गद् हुए। अब बारी प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की है कि वह क्या एक्शन लेंगे?
सबकी नजरें अब मेयर सभापति व एमआईसी पर
बाप में दम के मुस्लिम महिला पार्षदों के चैलेंज के बाद अब सबकी नजरें महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सभापति मुन्नालाल यादव व एमआईसी पर टिकी हुई हैं। सभापति ने तो कमिश्नर को पत्र लिखा है, लेकिन थाने में नारेबाजी करने के बाद भी अब तक एफआईआर की कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि मामला पुलिस रिपोर्ट का बनता भी हैं कि नहीं।
कानून के जानकार मेयर भी नजरों में हैं कि क्या वे अनवर डकैत की तरह महिला पार्षदों की पार्षदी भी ले पाएंगे? मसला हिंदू संगठनों के पाले में जाने से भाजपा की निगम परिषद के लिए आगे की राह आसान नहीं, क्योंकि अब भाजपा परिषद ‘मातृसंस्था’ की कसौटी पर भी कसी जाएगी। मामला वंदे मातरम् की प्रतिष्ठा से जो जुड़ा है।
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