पाटलिपुत्र में अब नया सम्राट: मध्य प्रदेश के ‘मामा’ बने सत्ता परिवर्तन के मॉनिटर
KHULASA FIRST
संवाददाता

बिहार की राजनीति में ‘युग परिवर्तन’ अब पहली बार भाजपा राज
बिहार का आज से बदल जाएगा राजपाट, ‘सुशासन बाबू’ की आज आखिरी कैबिनेट
आज चुना जाएगा बिहार का नया मुख्यमंत्री, राज्य के इतिहास में पहली बार बनेगा भाजपा का सीएम
सम्राट चौधरी के नीतीश के उत्तराधिकारी बनने के दिख रहे साफ संकेत, आवास की सुरक्षा बढ़ाई गई
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के मार्गदर्शन में होगा सत्ता परिवर्तन, मोदी-शाह ने बनाया पर्यवेक्षक
नीतीश कुमार के पुत्र निशांत की भी आज से राजनीति में एंट्री, उपमुख्यमंत्री बनने के आसार
मुख्यमंत्री के नाम पर अब तक सस्पेंस गहरा, शाम तक सामने आ जाएगा नया चेहरा
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्राचीन भारत के मगध प्रांत का का प्राणबिंदु ‘पाटलिपुत्र’ आधुनिक भारत में आज फिर एक बार चर्चा में है। कभी धनानंद के राज में आचार्य चाणक्य ने इसी पाटलिपुत्र के लिए चंद्रगुप्त जैसे राजा का चयन किया था। तब भी सत्ता ही नहीं, युग का परिवर्तन हुआ था।
मंगलवार को फिर से वही स्थिति बन रही है। एक बार फिर न सिर्फ सत्ता, बल्कि राज्य में एक युग परिवर्तन हो रहा है। ‘सुशासन बाबू’ के युग का समापन होगा और राज्य में कमलदल का प्रादुर्भाव होगा। राज्य के इतिहास में पहली बार कमलदल के हाथ में राजनीतिक कमान जा रही है।
मंगल को ही पाटलिपुत्र का नया ‘सम्राट’ भी तय होने जा रहा है। शाम तक ये स्पष्ट हो जाएगा कि पाटलिपुत्र का सम्राट कौन होगा, कौन सत्ता की सरदारी का ‘चौधरी’ होगा? पाटलिपुत्र के इस सत्तारोहण से मध्य प्रदेश का नाता भी जुड़ गया है। अपने सूबे के ‘मामा’ इस युग परिवर्तन के पर्यवेक्षक बनाए गए हैं। उनकी मॉनिटरिंग में पहले कमलदल अपना नया नेता और फिर एनडीए अपना मुखिया चुनेगा।
बस, चंद घंटे शेष हैं। पुराने मगध प्रांत और आज के बिहार में नीतीश कुमार युग खत्म हो जाएगा। 21 साल से बिहार की राजनीति ही नहीं, पूरे राज्य का पर्याय बने नीतीश अब पटना छोड़, दिल्ली रवाना हो जाएंगे। किसी को उम्मीद नहीं थी कि बिहार में नीतीश के रहते सत्ता परिवर्तन हो जाएगा।
लेकिन मोदी-शाह के युग में भाजपा ऐसा कर गुजरी। नीतीश कुमार अब दिल्ली में टीम मोदी का हिस्सा होंगे और उनके हिस्से की हुकूमत की हिस्सेदार अब भाजपा होगी। इसी नई हुकूमत का सरदार कौन होगा? इस पर सस्पेंस बहुत गहरा है, लेकिन शाम तक साफ हो जाएगा सत्ता का नया चेहरा।
कुछ देर बाद नीतीश कुमार की आखिरी कैबिनेट बैठक होगी और उसके बाद उनका इस्तीफा। इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में पुत्र निशांत उत्तराधिकारी मनोनीत होंगे। पुत्र की राजनीति में एंट्री जदयू की डिमांड पर हो रही है। नीतीश ने तो परिवार को राजनीति से दूर ही रखा था।
पुराने समय के पाटलिपुत्र और वर्तमान के पटना में आज सुबह से राजनीति चरम पर है। राज्य में पहली बार भाजपा का सीएम जो बनने जा रहा है। मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य हो गए हैं। अब वे मोदी सरकार में नई भूमिका में नजर आएंगे।
राज्य में नए सीएम के नाम पर भरचक गर्मी में भी कुहांसा छाया हुआ है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि मौजूदा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी नई सरकार के मुखिया होंगे। पटना के राजनीतिक हालात भी इस बात का इशारा कर रहे हैं कि चौधरी ही ‘पाटलिपुत्र’ के नए ‘सम्राट’ होंगे।
चौधरी के आवास पर सख्त की गई सुरक्षा, जदयू नेताओं की उनसे निरंतर होती मुलाकात व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रधान सचिव की चौधरी से मुलाकात से संकेत नजर आ रहा है कि सम्राट ही सत्ता के चौधरी होंगे। हालांकि ये बिहार है। यहां नीतीश के रहते ऐनवक्त पर कुछ भी हो सकता है और कोई ‘जतिनराम’ भी सत्ता की वैतरणी का ‘मांझी’ हो सकता है।
पटना में हो रही ये राजनीतिक युग परिवर्तन की घटना का साक्षी मध्य प्रदेश भी होगा। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व मौजूदा केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान की अगुआई व मार्गदर्शन में नए नेता का चयन होगा। शिवराज विशेष विमान से दोपहर 12 बजे पटना पहुंच रहे हैं।
वे सत्ता परिवर्तन के लिए लग रही दो अलग-अलग क्लास के मॉनिटर होंगे। पहले उनकी अगुआई में भाजपा विधायक दल की बैठक होगी। शाम 4 बजे होने वाली इस बैठक में भाजपा विधायक दल अपना नेता चुनेगा। इसके बाद एनडीए की बैठक होगी, जिसमें घटक दल मिलकर मुख्यमंत्री के नाम का चयन करेंगे।
राज्य को नया मुख्यमंत्री 15 अप्रैल को मिलेगा। दो उपमुख्यमंत्री भी पूर्व की तरह बनाए जाएंगे। इनमें एक नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार होंगे। निशांत की ये सत्ता की राजनीतिक एंट्री होगी। वे अभी ताजा-ताजा 20 मार्च को ही राज्य राजनीति में आए हैं।
सुबह 9 बजे दफ्तर पहुंच जाते थे नीतीश
बिहार में सत्ता परिवर्तन भले ही हो जाएगा, लेकिन राज्य के बाशिंदे नीतीश कुमार को भुला नहीं पाएंगे। उनकी कार्यशैली ने राज्य में एक अलग ही पहचान बनाई। परिवारवाद की राजनीति से दूर उन्होंने अपनी छवि एक ईमानदार नेता के रूप में बना रखी थी।
ये ही कारण था कि वे देश के ऐसे पहले नेता रहे, जिसके दल ने कभी भी राज्य की सत्ता में पूर्ण बहुमत हासिल नहीं किया, लेकिन सत्ता पर राज किया। नीतीश कुमार भी 9 महीने के जतिनराम मांझी के कार्यकाल को छोड़ दें तो करीब 21 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे।
बहुमत किसी भी दल का आया हो, चुनाव बाद सीएम को लेकर उनका ही चयन हुआ। वे बिहार की राजनीति के पर्याय ही नहीं, अपरिहार्य रहे। सुबह 9 बजे वे दफ्तर पहुंच जाते थे। भले ही अफसर आएं या न आएं।
उनकी इस कार्यशैली के चलते बिहार सरकार का वर्क कल्चर पूरी तरह से कॉरपोरेट कल्चर की तरह डेवलप हो गया था, जहां ढिलाई की कोई जगह नहीं थी।
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