न तारीख, न सुनवाई फैसला फटाफट: भाजपा के तीनों उम्मीदवार राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित
KHULASA FIRST
संवाददाता

नाराज राहुल के समक्ष पटवारी ने दी सफाई, प्रदेश प्रभारी की भूमिका पर लगा सवालिया निशान
कांग्रेस गुहार लगाती रही, कहीं से भी नहीं मिली राहत, न आयोग कुछ बोला, न सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
चुनाव आयोग अंतिम समय तक बैठा रहा खामोश, जैसे ही नामांकन वापसी का समय हुआ, भाजपा को जीत दे दी
हार के बाद कांग्रेस में घमासान, भोपाल से दिल्ली शिफ्ट हुई चुनावी सरगर्मी
दिल्ली में हुई बैठक में बड़े नेताओं के निशाने पर रहे अध्यक्ष जीतू पटवारी व प्रभारी हरीश चौधरी
प्रदेश के कांग्रेस विधायकों को नहीं मिला राष्ट्रपति से मुलाकात का समय, पार्टी करेगी इंतजार
दिल्ली में आज कांग्रेस विधायकों का पैदल मार्च, पार्टी मुख्यालय से अकबर रोड की तरफ करेंगे कूच
नटराजन को चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस ने दी बड़ी जिम्मेदारी, पंजाब का प्रभारी बनाया
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
न तारीख, न सुनवाई... फैसला फटाफट जैसे सन्नी देओल के फिल्मी डायलॉग की तरह मध्य प्रदेश में राज्यसभा का चुनाव मुकम्मल हो गया। जबरदस्त राजनीतिक उठापठक, शह-मात के खेल, छल-कपट-षड्यंत्र व भितरघात से लबरेज ये चुनाव मध्य प्रदेश की सियासत में पक्ष व प्रतिपक्ष के बीच जबरदस्त कलह भी घोल गए।
आयोग की तरफ से भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्वाचित घोषित कर दिए गए। न वोटिंग हुई, न फ्लोर पर कोई टेस्ट हुआ, रिटर्निंग अधिकारी ने भाजपा के रजनीश अग्रवाल, महेश केवट और तरुण चुघ को निर्विरोध विजय का सर्टिफिकेट जारी कर दिया।
निर्विरोध निर्वाचन के ये हालात कांग्रेस की एकमात्र प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्ती से निर्मित हुए थे। इस मसले पर कांग्रेस न्याय के लिए दर-दर भटकती रही, लेकिन कहीं से भी कोई मदद नहीं मिली।
न चुनाव आयोग की चौखट से, न सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर। राष्ट्रपति ने भी मिलने का समय नहीं दिया। आयोग भी चुप्पी धारण कर बैठ गया और इधर मध्य प्रदेश में कांग्रेस का भट्ठा बैठ गया।
पार्टी अपनी तयशुदा एकमात्र सीट से भी हाथ धो बैठी और भाजपा अपने कोटे से एक सीट ज्यादा ले उड़ी। अब कांग्रेस की राज्यसभा चुनाव की आगे की रणनीति व पार्टी में पसरे तमाम संताप व कलह की केंद्र राजधानी दिल्ली हो गई है।
प्रदेश के इस बार के राज्यसभा चुनाव ने न सिर्फ राजनीति के जानकारों, दलीय कार्यकर्ताओं व चुनावी रणनीतिकारों, बल्कि जनसामान्य को भी हतप्रभ किया, जिनका राज्यसभा चुनाव से दूर-दूर तक वास्ता नहीं, वे भी हैरत में रहे कि ऐसा भी होता है। एक छोटी-सी कानूनी चूक के लिए क्या देश की राजनीति व चुनावी प्रक्रिया में कोई रियायत नहीं होती है?
कोई नियम-कायदे ऐसे नहीं कि इतने अहम चुनाव में पीड़ित पक्ष को कुछ राहत दे सकें। कुछ नहीं भी तो कम से कम सुनवाई ही कर ले? इस सहित कई सवाल मध्य प्रदेश में मुकम्मल हुए उच्च सदन के ताजा चुनाव से उभरकर न सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र, बल्कि जन-जन में चर्चा का विषय है।
नटराजन के नामांकन-पत्र में जिस तरह की चूक हुई थी, वह इतनी बड़ी नहीं थी कि वे चुनावी दौड़ से ही बाहर कर दी गईं। बावजूद इसके न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि जनसामान्य को भी ये उम्मीद थी कि भोपाल नहीं तो दिल्ली से नटराजन को राहत मिल जाएगी।
लेकिन चुनाव आयोग तो ऐसी खामोशी ओढ़कर बैठ गया, जैसे कुछ हुआ ही न हो। इस खामोशी को तब तक पूरा वक्त दिया गया, जब तक नाम वापसी की तारीख व समय निर्धारित था।
जैसे ही गुरुवार की दोपहर के 3 बजे, महज 20 मिनट बाद ही भोपाल में रिटर्निंग अधिकारी ने भाजपा के तीनों उम्मीदवार को जीत का सर्टिफिकेट दे दिया।
अब नटराजन की लड़ाई चुनाव आयोग से निकलकर अदालत की चौखट पर पहुंच गई। कोर्ट के तौर-तरीकों से तो ये देश वाकिफ ही है न?
राहुल गुस्से में, कांग्रेस में पसरी तूफान से पहले की खामोशी
प्रदेश में अपनी पसंदीदा प्रत्याशी के साथ हुई हरकत से कांग्रेस आलाकमान बुरी तरह आहत व नाराज भी है। प्रदेश के तमाम विधायक दिल्ली तलब कर लिए गए हैं। प्रदेश नेतृत्व की भी हाजिरी दिल्ली दरबार में लग गई।
बताते हैं कि इस मामले में राहुल गांधी का गुस्सा चरम पर है। अध्यक्ष सहित पार्टी का पूरा प्रदेश नेतृत्व सवालों के घेरे में है। प्रभारी हरीश चौधरी की भूमिका पर तो सीधे सवालिया निशान ही लग गया है कि इनकी अब कोई जरूरत भी है क्या? नाराज राहुल के समक्ष अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सफाई भी दी, लेकिन ये कितनी कारगर होगी, वक्त आने पर पता चलेगा।
दिल्ली के तमाम बड़े नेताओं के निशाने पर फिलहाल पटवारी व चौधरी ही हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुआई में पूरे घटनाक्रम पर अहम बैठक की गंभीरता से सब सकते में हैं।
उधर, कांग्रेस एमपी में मिले ‘दगे’ से आहत तो है, लेकिन नटराजन को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रही है। प्रदेश के सभी विधायकों की राष्ट्रपति से मुलाकात तो तय नहीं हो पाई, लेकिन आज दोपहर 2 बजे कांग्रेस विधायकों का पैदल मार्च निकलेगा।
ये मार्च कांग्रेस मुख्यालय से शुरू होगा। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर भी पार्टी की नजरें व उम्मीदें हैं। प्रदेश में मात खाने के बाद भी नटराजन की अहमियत पार्टी ने साबित कर दी। उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया गया है, जहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होना हैं।
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