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कोर्ट में घिर गया नारायण सांई 55 लाख बकाया पर सख्त रुख: 7 साल से एक रुपया नहीं

KHULASA FIRST

संवाददाता

25 मार्च 2026, 2:58 pm
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कोर्ट में घिर गया नारायण सांई 55 लाख बकाया पर सख्त रुख

फैमिली कोर्ट में हंगामा: पत्नी ने मांगी संपत्ति कुर्की, जेल से पेश हुआ आसाराम का बेटा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भरण-पोषण के मामले में फिर विवादों में घिरे नारायण सांई को फैमिली कोर्ट में पेश किया गया, जहां उनकी पत्नी द्वारा लगाए गंभीर आरोपों और बकाया राशि को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। करीब सात वर्षों से पत्नी को एक भी रुपया नहीं देने के आरोपों के बीच यह मामला अब कानूनी सख्ती के नए मोड़ पर पहुंच गया है।

अदालत में सुनवाई के दौरान पत्नी पक्ष ने साफ कहा कि अब सिर्फ आदेश नहीं, बल्कि संपत्ति कुर्क कर भुगतान कराया जाए। गुजरात की जेल में बंद नारायण सांई को कड़ी सुरक्षा के बीच इंदौर लाया गया। कोर्ट परिसर में उनके समर्थकों की मौजूदगी ने माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया।

कैदी वाहन से उतरते समय सांई ने समर्थकों की ओर इशारा कर अभिवादन भी किया, जिससे कुछ देर के लिए हलचल हो गई। मामले की जड़ में 2018 का वह अदालत आदेश है, जिसमें नारायण सांई को अपनी पत्नी को हर महीने 50 हजार रुपए भरण-पोषण के रूप में देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन पत्नी का आरोप है कि बीते सात सालों में उन्होंने एक भी किस्त अदा नहीं की। इसी कारण बकाया राशि अब बढ़कर लगभग 55 लाख रुपए तक पहुंच चुकी है।

पत्नी जानकी हरपलानी की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह न्यायालय के आदेश की अवहेलना है। उन्होंने दलील दी कि यदि अब भी सख्ती नहीं दिखाई गई, तो ऐसे मामलों में कानून का डर खत्म हो जाएगा।

संपत्ति नीलामी की मांग से बढ़ा दबाव- सुनवाई के दौरान सबसे अहम मोड़ तब आया, जब पत्नी पक्ष ने अदालत से मांग की कि नारायण सांई की संपत्ति जब्त कर उसकी नीलामी की जाए और उससे प्राप्त राशि पत्नी को दिलाई जाए। यह मांग सीधे तौर पर अदालत के आदेशों को लागू कराने की दिशा में एक सख्त कदम मानी जा रही है।

करीब एक घंटे चली सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। अदालत ने सभी पहलुओं को सुनने के बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए सुरक्षित रखा।

आपराधिक मामलों की छाया
गौरतलब है कि नारायण सांई 2013 से गुजरात की सूरत जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चल चुके हैं। इस पृष्ठभूमि ने भी इस पूरे प्रकरण को और अधिक चर्चित बना दिया है। अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अदालत संपत्ति कुर्की और नीलामी जैसे कड़े कदम उठाएगी या फिर आरोपी को भुगतान के लिए एक और मौका दिया जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत सख्त रुख अपनाती है, तो यह अन्य मामलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। फैमिली कोर्ट में हुई इस पेशी के बाद अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि क्या अदालत बकाया 55 लाख रुपए की वसूली के लिए सख्त कदम उठाती है या नहीं। फिलहाल, यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के एक अहम मोड़ पर खड़ा है, जहां से आगे की दिशा तय होगी।

1995 में शादी, फिर बढ़ते गए विवाद
जानकारी के अनुसार, नारायण सांई और जानकी हरपलानी की शादी 1995 में हुई थी। शुरुआती वर्षों के बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गए थे। हालात इतने बिगड़े कि पत्नी ने इंदौर फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर दी।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2018 में तलाक हो गया और उसी दौरान भरण-पोषण का आदेश भी पारित किया गया। नारायण सांई के वकील ने अदालत में यह तर्क रखा कि जब भरण-पोषण का आदेश दिया गया था, उस समय वह पहले से ही जेल में बंद थे।

ऐसे में नियमित भुगतान संभव नहीं हो सका। हालांकि, इस तर्क पर पत्नी पक्ष ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि जेल में होना भुगतान न करने का बहाना नहीं हो सकता, क्योंकि आरोपी के पास संपत्ति और संसाधन उपलब्ध हैं।

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