भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष ने पेश किए दस्तावेज: कोर्ट में दावों पर नई बहस तेज; एएसआई सर्वे की वीडियो पर अगली सुनवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हाईकोर्ट में चल रहे धार भोजशाला विवाद की सुनवाई के दौरान कल मुस्लिम पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट सलमान खुर्शीद ने कई अहम ऐतिहासिक दस्तावेज और संदर्भ अदालत में पेश किए। इनके आधार पर धार के इतिहास और भोजशाला परिसर से जुड़े दावों को लेकर नई कानूनी बहस शुरू हो गई है।
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लिखे गए एक पत्र और लेखक रामसेवक गर्ग की पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि धार का ऐतिहासिक विकास और विनाश अलग-अलग दौर में हुआ। पक्ष का तर्क था कि लगभग 1100 ईस्वी के आसपास गुजरात के राजवंश द्वारा धार पर आक्रमण किया गया था, जिसके बाद शहर बुरी तरह प्रभावित हुआ।
मुस्लिम पक्ष ने अदालत में कहा कि बाद में मुस्लिम शासकों ने पहले से उजड़े हुए शहर का पुनर्निर्माण और प्रशासनिक व्यवस्था संभाली थी, न कि किसी नए विध्वंस की स्थिति उत्पन्न की थी। उनके अनुसार यह ऐतिहासिक तथ्य उन दावों को चुनौती देता है, जिनमें मुस्लिम शासकों को धार के विनाश के लिए जिम्मेदार बताया जाता है।
ब्रिटिश म्यूजियम के दस्तावेज पर भी बहस
सुनवाई के दौरान ब्रिटिश म्यूजियम से जुड़े एक पत्र को भी अदालत में पेश किया गया। इसमें उल्लेख है कि जिस प्रतिमा को वाग्देवी (सरस्वती) बताया जा रहा है, उसे दरअसल जैन धर्म की ‘अंबिका’ देवी की प्रतिमा माना गया है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह दस्तावेज भोजशाला से जुड़े कई ऐतिहासिक दावों की पुनः समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि भोजशाला परिसर वर्ष 1904 से संरक्षित स्मारक घोषित है और यह केंद्र सरकार के अधीन आता है, इसलिए इस स्थल पर किसी भी प्रकार के निजी स्वामित्व या एकतरफा दावे स्वीकार्य नहीं हैं।
याचिकाकर्ता अब्दुल समद और नूर मोहम्मद शेख की ओर से भी पक्ष रखा गया, जिसमें कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेज इतिहास को समझने में मदद करते हैं, जबकि एएसआई की स्थिति इसे एक संरक्षित पुरातात्विक स्थल के रूप में स्पष्ट करती है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि एएसआई सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी सभी पक्षों को 27 अप्रैल तक उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने कहा है कि अगली सुनवाई इसी वीडियो साक्ष्य के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी, जिससे मामले की दिशा तय हो सकेगी।
फिलहाल यह मामला ऐतिहासिक तथ्यों और कानूनी दावों के बीच एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेजों के आधार पर मजबूत दलीलें पेश कर रहे हैं।
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