नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव नोटिफिकेशन विवाद: इंदौर हाईकोर्ट से सरकार को राहत; अंतरिम रोक से इनकार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश में नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के चुनाव से जुड़े नोटिफिकेशन विवाद में इंदौर हाईकोर्ट से राज्य सरकार को अहम राहत मिली है। हाल ही में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बिना सभी पक्षों को सुने अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। यह मामला उन अध्यक्षों के निर्वाचन और उनके वित्तीय अधिकारों से जुड़ा है, जिनके चुनाव के बाद विधिवत नोटिफिकेशन जारी नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
15 याचिकाओं पर सुनवाई, अगली तारीख 19 मई
इंदौर हाईकोर्ट में इंदौर-उज्जैन संभाग के आठ जिलों से संबंधित कुल 15 याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें नगर पालिका अध्यक्षों के चुनाव और उनके वित्तीय अधिकारों को चुनौती दी गई है। इनमें से चार मामलों में पहले ही अदालत अंतरिम राहत देते हुए अध्यक्षों के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगा चुकी है। वहीं, शेष 11 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद जस्टिस प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 19 मई की तारीख तय की है।
बिना पक्ष सुने रोक नहीं: कोर्ट
हाल ही में दायर याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने अध्यक्षों के अधिकारों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संबंधित चुनाव हुए चार वर्ष बीत चुके हैं, ऐसे में बिना निर्वाचित अध्यक्षों का पक्ष सुने अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा। कोर्ट के इस रुख से फिलहाल संबंधित नगरपालिकाओं के अध्यक्षों और राज्य सरकार को राहत मिली है।
कहां-कहां से आईं याचिकाएं
ये याचिकाएं उज्जैन, खरगोन, देवास, धार, आगर-मालवा, रतलाम, राजगढ़ और बड़वानी जिलों की विभिन्न नगर पालिकाओं से जुड़ी हैं। जावरा, नागदा और सोनकच्छ जैसे कुछ मामलों में पहले ही वित्तीय अधिकारों पर रोक लग चुकी है, जबकि अन्य नगरपालिकाओं जैसे बड़ावदा, बागली, पडाल्याखुर्द, तराना, बाबड़ी, खाचरौद, मंडलेश्वर, बरोड, सैलाना, सतवास और कुक्षी में शासन से जवाब मांगा गया है।
विवाद की शुरुआत और कानूनी उलझन
इस पूरे विवाद की शुरुआत बड़वानी जिले के पानसेमल से हुई, जहां अध्यक्ष के चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी गई कि उसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ था। मई 2024 में इंदौर हाईकोर्ट ने इस मामले में अध्यक्ष के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद श्योपुर का मामला सामने आया, जिसने सरकार की कानूनी स्थिति को और जटिल बना दिया। ग्वालियर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार के जवाबों में विरोधाभास सामने आया, जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और यहां तक टिप्पणी की कि सरकार “बेंच हंटिंग” कर रही है और न्यायालय को गुमराह कर रही है।
क्या रही मूल गड़बड़ी
यह पूरा विवाद उस समय की प्रक्रिया से जुड़ा है, जब राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराए गए थे। उस दौरान ओबीसी आरक्षण का मामला अदालत में लंबित था और राहत मिलने के बाद चुनाव जल्दबाजी में कराए गए।
चुनाव परिणामों की अधिसूचना तो जारी हुई, लेकिन कई मामलों में अध्यक्षों के निर्वाचन की औपचारिक अधिसूचना शहरी विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी नहीं की गई। यही चूक अब बड़े कानूनी विवाद का कारण बन गई है।
98 नगरपालिकाओं पर असर की आशंका
इस विवाद का असर व्यापक हो सकता है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश की 98 नगर पालिकाओं और 247 नगर परिषदों के अध्यक्षों के पद और उनके वित्तीय अधिकार इस कानूनी विवाद के चलते प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल इंदौर हाईकोर्ट के ताजा रुख से सरकार को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक यह मामला प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए चुनौती बना रहेगा।
संबंधित समाचार

पीठासीन अधिकारी की जान बचाने वाले जवान सम्मानित:चुनाव ड्यूटी के दौरान आया था हार्ट अटैक

भारतीय किसान संघ ने बिजली की आपूर्ति को लेकर की चर्चा:विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक से की भेंट

व्यापारियों का विवाद बना जानलेवा:मारपीट के बाद बुजुर्ग व्यापारी की मौत; मारे थे लात-घूंसे

लेंसकार्ट शोरूम पर प्रदर्शन करके कर्मचारियों को बिंदी-टीका लगाया:हिंदू कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!