मां ने दिया जीवन का अनमोल तोहफा: पांच बरस के बेटे को लिवर का हिस्सा दान कर बचाई जान; वर्ल्ड लिवर डे पर पढ़िये भावुक प्रसंग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आज यानी 19 अप्रैल को मनाए जा रहे वर्ल्ड लिवर डे के अवसर पर शहर में ‘जीवन का उत्सव’ नामक एक भावुक और प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘लिवर से गुफ्तगू—एक कप कॉफी के साथ’ थीम पर आधारित इस आयोजन में लिवर ट्रांसप्लांट से नई जिंदगी पाने वाले मरीजों और अंगदान करने वाले डोनर्स ने अपने अनुभव साझा किए। इस वर्ष की थीम Solid Habits, Strong Liver यानी मजबूत आदतें, स्वस्थ लिवर पर केंद्रित रही।
बदलती जीवनशैली बन रही बड़ा खतरा
लिवर विशेषज्ञ डॉ. अजय के. जैन ने चेतावनी दी कि खराब खानपान, अनियमित दिनचर्या और बढ़ते शराब सेवन के कारण लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि जब लिवर पूरी तरह काम करना बंद कर देता है, तब ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचता है। डॉ. सुधांशु यादव ने कहा कि डोनर परिवारों के त्याग को समझने से समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ती है और सोच में सकारात्मक बदलाव आता है।
मां बनी जिंदगी की रक्षक
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब 5 वर्षीय मिहिर और उसकी मां पिंकी की कहानी सामने आई। गंभीर रूप से बीमार मिहिर को बचाने के लिए डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी। ऐसे में उसकी मां ने बिना किसी हिचक के अपने लिवर का एक हिस्सा दान कर दिया। सफल ऑपरेशन के बाद आज मिहिर पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है।
भारत में जरूरत ज्यादा, उपलब्धता कम
डॉ. शोहिनी सिरकार और डॉ. सुचिता जैन ने बताया कि भारत में हर साल करीब 50 हजार मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन डोनर्स की कमी के कारण केवल 5 हजार मरीजों का ही ट्रांसप्लांट हो पाता है।
काउंसलर देबी चटर्जी के अनुसार, अंधविश्वास और जागरूकता की कमी अंगदान के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है।
साहस और उम्मीद की मिसालें
62 वर्षीय एडवोकेट मस्तान सिंह छाबड़ा ने बताया कि 2020 में लिवर कैंसर का पता चलने के बाद उन्हें महज तीन दिनों के भीतर कैडेवर डोनेशन के जरिए लिवर मिल गया। आज वे अनुशासित जीवनशैली और नियमित व्यायाम के साथ स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
वहीं, 49 वर्षीय सुनील मेहरा ने भी अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि 8 साल पहले एक डोनर की वजह से उन्हें नया जीवन मिला। उन्होंने भावुक होकर कहा, “हम हमेशा जीवित नहीं रह सकते, लेकिन अंगदान के जरिए किसी और के भीतर हमेशा जीवित रह सकते हैं।”
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए विशेषज्ञों की सलाह
ताजे फल और हरी सब्जियों को आहार में शामिल करें, नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाएं, समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट कराएं और शराब और धूम्रपान से दूरी बनाए रखें। यह आयोजन न सिर्फ चिकित्सा जागरूकता का मंच बना, बल्कि मानवता, त्याग और जीवनदान की अनमोल भावना को भी उजागर कर गया।
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