मोहन का राजधर्म: राजधर्म और सुशासन की मिसाल: आपसी सहमति से खुला विकास का मार्ग
KHULASA FIRST
संवाददाता

भरोसे का राज (मोहन) धर्म
सांप्रदायिक सौहार्द का 'उज्जैन मॉडल':
जहां नफरत पर भारी पड़ा विकास और जन-विश्वास
डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश में पिछली सदी से लेकर आज के आधुनिक युग तक हिंदू-मुस्लिम भाईचारा और समभाव जिस तरह से सांप्रदायिक तनाव, विद्वेष, हिंसा और अविश्वास का पर्याय बन चुका या बना दिया गया, वह एक मजबूत राष्ट्र के लिए बेहद शर्मनाक और चुनौतीपूर्ण है।
देश की सरकारें इस समस्या से लगातार जूझ रही हैं। आजादी के बाद से आज तक इस समस्या का समाधान सरकारें नहीं ढूंढ़ पाईं।
ऐसी कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मध्य प्रदेश के उज्जैन में सामाजिक, आर्थिक और सनातन विकास के लिए शाही मस्जिद सहित 16 मस्जिदों व अन्य देवस्थानों के बाधक हिस्सों को शांतिपूर्ण और मिलजुलकर हटाया गया, वह मुख्यमंत्री के राजधर्म का आदर्श उदाहरण कहा जा रहा है।
समाजशास्त्री कहते हैं कि राजनीति को एक तरफ रखते हुए उज्जैन का यह उदाहरण एक केस स्टडी है।
निष्पक्षता से इसका विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि एक शासक अपने राजधर्म का निष्पक्ष रूप से पालन करे तो राष्ट्र को स्थिर करने वाली और राष्ट्रीय विकास में बाधक इस समस्या का समाधान मुश्किल नहीं है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों और सुशासन के साथ अपने राजधर्म निर्वहन से यह साबित होता है।
एक शासक द्वारा राजधर्म का पालन कैसे होता है... वेद-पुराण और शास्त्र जिस तरह से राजधर्म को परिभाषित करते हुए बताते हैं कि हिंदू-मुस्लिम या किसी भी समुदाय के बीच आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता और सरकार के प्रति अटूट जन-विश्वास ही आधुनिक भारत में सर्वोच्च राजधर्म और सुशासन का वास्तविक परिचायक है।
आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) के अनुसार ‘प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्’ यानी प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है और प्रजा के हित में ही उसका हित। कौटिल्य ने निरंकुशता को नकारा और राजा के लिए प्रजा की सुरक्षा, न्याय व आर्थिक समृद्धि को सर्वोच्च राजधर्म माना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदर्भ में यह सूत्र वाक्य अत्यंत महत्वपूर्ण क्यों नहीं कहा जाना चाहिए? उज्जैन का विकास मॉडल तो यही कहता है कि मुख्यमंत्री ने एक अलग तरह के शासन-प्रशासन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
ऐसा कहना किसी तरह की अतिशयोक्ति नहीं है, यदि उज्जैन के सिंहस्थ मॉडल को बिना किसी पूर्वाग्रह के देखा और समझा जाए तो सांप्रदायिक समभाव की स्थापना से कैसे सरकार के प्रति आमजन के भरोसे को जमीन पर उतारा जा सकता है, यह इसका जीता-जागता उदाहरण है।
उज्जैन में सड़क मार्ग में बाधक बन रहे धार्मिक स्थलों के बाहरी हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया में मुस्लिम समुदाय ने कानून और प्रशासन का साथ दिया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और उनकी पारदर्शी नीतियों पर अटूट भरोसा जताते हुए स्थानीय नागरिकों ने शांति व भाईचारे का परिचय दिया।
यह मुख्यमंत्री के प्रति अल्पसंख्यकों के बढ़ते विश्वास, भरोसे और सुशासन की उस अभिव्यक्ति को दर्शाता है, जहां बिना किसी तनाव के आपसी सहमति और संवाद के जरिये विकास को गति दी जा रही है।
यह इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार सबके लिए समान नियमों और निष्पक्षता के साथ काम करती है, तो जनता का शासन और शासक दोनों पर विश्वास मजबूत होता है। यह तभी संभव हो सकता है, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की तरह राजधर्म का निर्वाह किया जाए।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना और लोकतांत्रिक ढांचे में आज का राजधर्म आधुनिक मूल्यों के साथ प्राचीन भारतीय दर्शन का ही विस्तार है। मुख्यमंत्री की कार्यशैली और प्रदेश में समभाव आधारित उनकी सरकार का राजधर्म बताता है कि सरकार सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखती है।
अब तक के अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया...
किसी भी प्रकार की कट्टरता, हिंसा या नफरत फैलाने वाली ताकतों के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसा करने वालों के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के कठोर कार्रवाई करने से प्रदेश सरकार पीछे नहीं हटेगी।
मुख्यमंत्री के इस भरोसे का ही नतीजा है कि उज्जैन में विकास कार्यों को हिंदू हो या मुस्लिम समान रूप से अपनाते हुए प्रगति की राह को प्रशस्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का यहां लगातार प्रयास है कि किसी भी अन्य समुदाय के मन में यह विश्वास होना चाहिए कि राज्य उनके अधिकारों और गरिमा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुस्लिम या किसी भी समुदाय के बीच आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता और सरकार के प्रति अटूट जन-विश्वास ही आधुनिक भारत में सर्वोच्च राजधर्म और सुशासन का वास्तविक परिचायक है।
सुशासन और जन-विश्वास की अनूठी मिसाल उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए मुस्लिम समाज के सहयोग के रूप में सामने आई है। यह मुख्यमंत्री के अपने प्रयासों का ही नतीजा है कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द और सुशासन की एक मिसाल देखने को मिली है।
मुख्यमंत्री के लिए देश के राजनीतिक और चुनावी नफरत के माहौल में अल्पसंख्यक समुदाय का भरोसा जीतना आसान नहीं था। इसके लिए एक शासक को त्याग, समर्पण और निष्पक्षता के उदाहरण प्रस्तुत करना होते हैं। ऐसा ही उदाहरण डॉ. मोहन यादव ने पेश किया।
इसने लोगों के मन में सरकार के प्रति निष्पक्ष भाव से सम्मान और भरोसा पैदा किया। मुख्यमंत्री द्वारा विकास कार्यों में बाधक खुद अपने पैतृक घर के हिस्से को तोड़े जाने की शुरुआत करने के बाद स्थानीय मुस्लिम समाज ने भी आगे आकर विकास कार्यों में पूरा सहयोग दिया।
सड़क मार्ग में बाधक धार्मिक स्थलों के बाहरी हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया में मुस्लिम समुदाय ने कानून और प्रशासन का साथ दिया।
मजबूत होगा सामाजिक व आर्थिक इकोसिस्टम
बदलते दौर में अल्पसंख्यकों ने विकास के सड़क विज्ञान को बखूबी समझने के प्रयास किए। वे समझ गए हैं कि नफरत और हिंसा अब मायने नहीं रखती। जरूरी है मजबूत आजीविका और आर्थिक संसाधनों के साथ सामाजिक समरसता और तनावमुक्त शांतिपूर्ण शहर।
सड़कें चौड़ी होने से शहर में यातायात सुगम होगा, जिससे व्यापार-व्यवसाय करने वाले हर वर्ग और हर धर्म के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। आधुनिक और चौड़े मार्गों से उज्जैन के आर्थिक इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी, जो आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय रोजमर्रा के जीवन में एक-दूसरे के पूरक और पर्याय हैं, जिनका साझा विकास ही शहर की असली ताकत है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और कठिन होमवर्क से बनी बात...
इस पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और सहज बनाने के पीछे मुख्यमंत्री के निर्देशों के साथ-साथ उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और पुलिस प्रशासन का लंबा व कठिन होमवर्क तथा सतत संवाद शामिल रहा।
अधिकारियों ने स्थानीय नागरिकों और समाज के प्रबुद्धजन के साथ बैठकर संवाद स्थापित किया, जिसके परिणामस्वरूप लोगों ने अफवाहों से ऊपर उठकर विकास में सहयोगात्मक रुख अपनाया।
यह पूरी घटना यह साबित करती है कि यदि नीयत साफ हो और सरकार के प्रयास सच्चे मन से हों, तो बड़ी से बड़ी बाधाएं भी संवाद से हल हो जाती हैं। उज्जैन का यह मॉडल आज पूरे प्रदेश में सुशासन और जन-विश्वास का एक नया प्रतीक बन गया है।
बाबा महाकाल की सब पर समान कृपा
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में आस्था, विकास और सामाजिक समरसता का अनूठा समन्वय देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कठिन परिश्रम, विजन और दूरगामी योजनाओं के चलते यह प्राचीन नगर देश का एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बनता जा रहा है।
बाबा महाकाल के आशीर्वाद और शहर के विकास का लाभ केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख और ईसाई हर वर्ग को सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक संबल मिला है।
स्थानीय व्यापार और आर्थिक पहिए को गति मिलने से अल्पसंख्यकों समेत हर तबके की प्रगति हुई है। इस सच्चाई को मुस्लिम समाज भी भली-भांति समझता है कि अनादिकाल से महाकाल के दरबार में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के कारण ही उज्जैन का व्यापार और हर वर्ग का जीवन फल-फूल रहा है।
कई छोटे-से मुस्लिम व्यापारी और व्यवसायी बाबा महाकालेश्वर के कारण ही आज अपने कारोबार को प्रदेश, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने में सफल हुए हैं।
अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा सड़क चौड़ीकरण जैसे विकास कार्यों में स्वेच्छा से आगे आकर सहयोग करना और प्रशासन का साथ देना इसी गहरी समझ का परिणाम है। यह इस बात का प्रमाण है कि महाकाल की इस पावन नगरी में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास ही असली राजधर्म और सुशासन की सबसे बड़ी ताकत है।
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