सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी विभाग; स्कूल और अस्पताल भी 'इंडस्ट्री' के दायरे में, लंबित मामलों में कर्मचारियों को राहत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभागों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों से जुड़े श्रम विवादों पर बड़ा फैसला सुनाया है।
9 जजों की संविधान पीठ ने 6:3 के बहुमत से 1978 के Bangalore Water Supply फैसले में तय 'ट्रिपल टेस्ट' के मूल ढांचे को बरकरार रखा, हालांकि उसके कुछ पहलुओं को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप स्पष्ट और पुनर्गठित किया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्याख्या Industrial Disputes Act, 1947 के तहत आने वाले मामलों तक सीमित है। 21 नवंबर 2025 से लागू Industrial Relations Code, 2020 की व्याख्या इस फैसले से प्रभावित नहीं होगी
1978 के फैसले ने बदली थी 'उद्योग' की परिभाषा
सुप्रीम कोर्ट ने Bangalore Water Supply and Sewerage Board बनाम A. Rajappa मामले में 1978 में 'उद्योग' की व्यापक व्याख्या की थी।
इस फैसले के तहत किसी संस्था की गतिविधि को केवल इस आधार पर उद्योग की श्रेणी से बाहर नहीं किया जा सकता कि वह सरकारी, गैर-लाभकारी या सेवा आधारित संस्था है।
फैसले ने सरकारी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं, अस्पतालों और कई अन्य संगठित गतिविधियों में काम करने वाले कर्मचारियों के श्रम अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी आधार तैयार किया था।
क्या है 'ट्रिपल टेस्ट'?
1978 के फैसले में किसी गतिविधि को 'उद्योग' मानने के लिए तीन प्रमुख कसौटियां तय की गई थीं। इनमें संगठित और व्यवस्थित गतिविधि, नियोक्ता-कर्मचारी के सहयोग से उसका संचालन और लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाली वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन अथवा वितरण शामिल था।
अब सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि इस मूल ढांचे ने समय की कसौटी पर काफी हद तक मजबूती दिखाई है, लेकिन इसके कुछ हिस्सों को अधिक स्पष्ट करने की जरूरत है। इसलिए कोर्ट ने ट्रिपल टेस्ट को नए तरीके से परिभाषित किया है।
6 जजों ने माना- मामला संविधान पीठ के सामने सुनवाई योग्य
9 जजों की पीठ में 6 जजों ने माना कि इस मामले को संविधान पीठ के सामने सुनवाई के लिए लाना उचित था। वहीं तीन जजों ने अलग राय रखते हुए रेफरेंस को सुनवाई योग्य नहीं माना।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ 1978 के फैसले की व्यापक व्याख्या की समीक्षा कर रही थी। सवाल यह था कि बदलते कानूनी और सामाजिक परिवेश में 'उद्योग' की पुरानी परिभाषा को किस हद तक लागू रखा जाए।
लंबित श्रम विवादों पर क्या होगा असर?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Industrial Disputes Act, 1947 के तहत अदालतों, ट्रिब्यूनल, श्रम प्राधिकरण या अन्य संबंधित मंचों के सामने लंबित मामलों का निपटारा 1978 के फैसले में निर्धारित सिद्धांतों के आधार पर किया जा सकता है।
वहीं जिन मामलों में अंतिम फैसला हो चुका है, उन्हें इस नए फैसले के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। यानी पुराने और लंबित विवादों के लिए कोर्ट ने कानूनी स्थिति को स्थिर रखने की कोशिश की है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए फैसला क्यों अहम?
इस फैसले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों से जुड़े कई पुराने श्रम विवाद 'उद्योग' की परिभाषा के सवाल से जुड़े रहे हैं।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर सरकारी कर्मचारी या हर स्कूल-अस्पताल का कर्मचारी स्वतः 'वर्कमैन' या श्रम कानूनों के तहत संरक्षित कर्मचारी घोषित हो गया है।
किसी संस्था या गतिविधि पर कानून लागू होगा या नहीं, यह संबंधित मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय किया जाएगा।
नए Labour Code पर नहीं पड़ेगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सीमा भी तय की है। कोर्ट ने कहा कि 1978 के Bangalore Water Supply फैसले की व्याख्या को Industrial Relations Code, 2020 के तहत 'उद्योग' की परिभाषा समझने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
अर्थात 21 नवंबर 2025 से लागू नए श्रम कानून के तहत 'उद्योग' की व्याख्या उसके अपने प्रावधानों और संदर्भ के आधार पर होगी।
कर्मचारियों और संस्थानों के बीच विवादों में महत्वपूर्ण पड़ाव
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पुराने श्रम कानून के तहत चल रहे विवादों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे एक ओर कर्मचारियों के लंबित दावों के निपटारे का रास्ता साफ हुआ है।
वहीं दूसरी ओर सरकारी और अन्य संस्थानों के लिए यह स्पष्ट हो गया है कि पुराने मामलों में 1978 के सिद्धांतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि, नए Industrial Relations Code के लागू होने के बाद भविष्य के मामलों में 'उद्योग' की पहचान किस तरह होगी, यह अलग कानूनी ढांचे के तहत तय किया जाएगा।
संबंधित समाचार

दोपहिया वाहन चुराने वाला बदमाश गिरफ्तार:लाखों रुपए कीमत की बाइक बरामद; वारदात से पहले पुलिस ने दबोचा

फार्मा कंपनी में बॉयलर फटा:5 लोगों की मौत; 10 गंभीर घायल, रेस्क्यू जारी

मौत के बाद शव को लेकर मचा बवाल महासंघ के पहुंचते ही सुलझा विवाद:वी वन हॉस्पिटल का मामला

किसने पीसीसी चीफ को ‘कांग्रेस का मेल राखी सावंत' बताया:सीएम डॉ. मोहन यादव की नकल पर साधा निशाना

नगर निगम में वसूली से परेशान कचरा गाड़ी चालक ने जहर खाया, हालत गंभीर

एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या:युवक ने डंडे से किए ताबड़तोड़ वार; इलाके में फैली सनसनी

नगर निगम का घोटाला:आरटीआई में छिपाए कर्मचारी; घर बैठे बांट रहे वेतन

इस गिरोह के दो गुर्गों को जमानत नहीं:बिल्डर्स और रसूखदारों को धमकाने के आरोप

जिस दिन एआई चला गया उस दिन कितनी नौकरियां बचेंगी:बौद्धिक आत्महत्या की ओर बढ़ते कदम

बैंक मैनेजर बनकर साइबर ठगी:केवायसी बंद होने का डर दिखाया; क्यूआर कोड भेजकर खाते से रकम निकालने का आरोप, एक गिरफ्तार

नीलोफर हत्याकांड:एक महीने से फरार पति गिरफ्तार; बचने के लिए बदला हुलिया, पुलिस ने 5 राज्यों में 10 हजार किमी किया पीछा

पटेल नगर बावड़ी कांड के बाद भी नहीं जागा प्रशासन

शंका के दायरे में पलासिया पुलिस की कार्यप्रणाली:बंटी नागर की आत्महत्या के मामले में रसूखदारों को परेशान करने पर जोर

सिगरेट जलाते ही गैस सिलेंडर हुआ ब्लास्ट:70 प्रतिशत झुलसा युवक; कमरे की दीवार भी गिरी

जोन में संपत्ति कर घोटाला:दो कर्मचारी हुए निलंबित

इंदौर की हरियाली पर फिर वार:25 से ज्यादा पेड़ काटे; नगर निगम की अनुमति पर उठे सवाल

देखिये वीडियो, होटल में पत्नी ने पति को दूसरी महिला के साथ पकड़ा:पुलिस के सामने जड़े थप्पड़; दोनों की हुई है लव मैरिज

सड़क बना दी और विभाग को खबर नहीं:करोड़ों की वनभूमि पर 3 महीने तक चला निर्माण

गोशालाओं को ₹101 करोड़ देंगे अमित शाह:255 करोड़ के डेयरी प्लांट का करेंगे भूमिपूजन

गांधी जयंती पर बच्चों ने दांडी यात्रा के स्वरूप में की मेट्रो ट्रेन से यात्रा:250 से अधिक बच्चों ने पहली बार किया सफर, गूंजे देशभक्ति गीत
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!