राजघराना संपत्ति विवाद में बड़ा बयान: कौन बोलीं; मां को हमेशा झुकना पड़ा, कई बातें हमसे छिपाई गईं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।
सिंधिया परिवार की संपत्ति का विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इसी बीच शिवांगिनी सिंह का साक्षात्कार सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपनी मां प्रतिमा देवी और परिवार के भीतर लंबे समय से चली आ रही परिस्थितियों को लेकर कई बातें कहीं।
शिवांगिनी ने दावा किया कि परिवार में सबसे बड़ी होने के कारण उनकी मां को कई बार झुकना पड़ा और उन्हें चुप रहना पड़ा।
शिवांगिनी ने कहा कि उनके परिवार में संस्कारों को हमेशा सबसे ऊपर रखा गया है। उन्होंने कहा कि यही संस्कार उनकी पहचान और सबसे बड़ी विरासत हैं।
संपत्ति विवाद को लेकर उन्होंने अपनी मां के हक की बात भी रखी और कहा कि पद्मा राजे के हिस्से पर उनकी मां का अधिकार होना चाहिए।
मां को परिवार के कई मामलों से दूर रखने का दावा
शिवांगिनी सिंह के मुताबिक, उनकी मां को परिवार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें नहीं बताई जाती थीं। संपत्ति से जुड़े मामलों में भी वह सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोलती थीं। उनका दावा है कि परिवार के भीतर किसी विषय पर सवाल उठाने पर भी उनकी मां को रोक दिया जाता था।
शिवांगिनी ने कहा कि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही। उनके अनुसार, अब जब संपत्ति विवाद सामने आया है तो परिवार की कई ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं, जिनके बारे में उन्हें और उनकी मां को पहले पूरी जानकारी नहीं थी।
पद्मा राजे के हिस्से पर मां का हक होने की बात
शिवांगिनी ने अपनी दादी पद्मा राजे का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी संपत्ति में जो हिस्सा उनकी मां के हिस्से में आता है, उस पर उनका अधिकार होना चाहिए। हालांकि, संपत्ति के कानूनी बंटवारे और हिस्सेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के जरिए ही होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पद्मा राजे की बेटियों में प्रतिमा देवी और कनिका देवी के नाम भी इस विवाद से जुड़े पक्षकारों में सामने आए हैं। ऐसे में शिवांगिनी का बयान संपत्ति विवाद के पारिवारिक पक्ष को सामने रखता है।
'हमें पहले पूरी बात नहीं बताई गई'
शिवांगिनी ने कहा कि परिवार के कई सदस्य लंबे समय तक पूरी जानकारी से दूर रहे। उन्होंने दावा किया कि परिवार की दूसरी शाखाओं से बातचीत होती थी, लेकिन उनकी मां और उन्हें कई मामलों में अलग रखा गया।
उन्होंने कहा कि अब धीरे-धीरे कई तथ्य सामने आ रहे हैं और इसी वजह से उन्होंने अपनी मां के अधिकार को लेकर आवाज उठाई है।
तीनों दादियों से माफी भी मांगी
साक्षात्कार के दौरान शिवांगिनी सिंह ने परिवार की तीनों दादियों के प्रति सम्मान जताते हुए भावुक अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि उनसे कोई गलती हुई हो तो उन्हें माफ किया जाए।
उन्होंने खुद को परिवार का छोटा सदस्य बताते हुए कहा कि बड़ों से माफी मांगना और उनका सम्मान करना उनके संस्कारों का हिस्सा है।
'संस्कार ही हमारी सबसे बड़ी विरासत'
शिवांगिनी ने अपनी मां से मिली सीख का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा संस्कारों को सबसे ऊपर रखने की सीख दी गई।
उन्होंने कहा कि मां ने उन्हें मजबूत संस्कारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके मुताबिक, संपत्ति से बड़ी विरासत परिवार के संस्कार हैं और यही उनकी असली पहचान है।
माधवराव सिंधिया की याद साझा की
बातचीत के दौरान शिवांगिनी ने स्वर्गीय माधवराव सिंधिया से जुड़ी बचपन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि माधवराव उन्हें बहुत प्यार करते थे और बचपन में गोद में लेकर महल के बगीचे में घुमाया करते थे।
शिवांगिनी ने कहा कि माधवराव से भी उन्हें संस्कार और जीवन से जुड़ी कई सीख मिलीं, जिन्हें वह आज भी याद रखती हैं।
'हम सच्चाई के रास्ते पर हैं'
परिवार की तीनों दादियों से जुड़े सवाल पर शिवांगिनी ने कहा कि वह सच्चाई के रास्ते पर खड़ी हैं और उन्हें किसी से डर नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अपने धर्म और संस्कारों पर विश्वास करती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले उन्हें कई बातों की जानकारी नहीं थी, लेकिन अब परिस्थितियां उनके सामने अधिक स्पष्ट हो रही हैं।
कई दशक पुराना है संपत्ति विवाद
सिंधिया परिवार की संपत्ति को लेकर विवाद लंबे समय से है। इसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनकी बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे सहित परिवार के अन्य सदस्य भी अलग-अलग समय पर पक्षकार रहे हैं।
विवाद में चल और अचल संपत्तियों के साथ-साथ ट्रस्ट और अन्य संपत्तियों को लेकर भी कानूनी सवाल उठते रहे हैं। संपत्ति के बंटवारे को लेकर अलग-अलग अदालतों में मामले भी चले हैं।
जुलाई 2026 में समझौते की खबरें आई थीं
जुलाई 2026 में इस विवाद को लेकर समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की खबरें सामने आई थीं। ग्वालियर जिला अदालत में समझौते से जुड़े आवेदन पेश किए जाने और मामले के समाधान की दिशा में बढ़ने की जानकारी सामने आई थी।
हालांकि, संपत्ति के अंतिम बंटवारे और सभी पक्षों के अधिकारों की कानूनी स्थिति अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
करीब 40 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति का आंकड़ा भी इस विवाद के संदर्भ में चर्चा में रहा है, हालांकि संपत्ति के वास्तविक मूल्य और अंतिम हिस्सेदारी को लेकर आधिकारिक कानूनी स्थिति अलग विषय है।
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