हाईकोर्ट से बड़ा झटका: जेल में बंद पूर्व परिवहन आरक्षक की अस्थायी जमानत याचिका भी खारिज
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश के चर्चित आरटीओ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा को हाईकोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी 60 दिन की अस्थायी (टेंपरेरी) जमानत याचिका खारिज कर दी है।
हालांकि अदालत का विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन केस स्टेटस में याचिका खारिज दर्शाई गई है। इससे पहले भी सौरभ शर्मा की नियमित जमानत याचिका जिला अदालत और बाद में हाईकोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है। ऐसे में अस्थायी जमानत पर भी राहत नहीं मिलने से उनकी जेल से बाहर आने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
पत्नी की बीमारी और बच्चों की जिम्मेदारी का दिया था हवाला
सौरभ शर्मा ने अपनी याचिका में कहा था कि उनकी पत्नी दिव्या तिवारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। उन्हें डिविएटेड नेजल सेप्टम (DNS) और क्रोनिक साइनसाइटिस की समस्या है, जिसके लिए फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी (FESS) कराना आवश्यक है।
याचिका में तर्क दिया गया कि ऑपरेशन और रिकवरी के दौरान पत्नी की देखभाल के लिए उनका मौजूद रहना जरूरी है। साथ ही दो नाबालिग बच्चों की जिम्मेदारी का भी हवाला दिया गया। हालांकि कोर्ट ने इन आधारों को जमानत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना और याचिका खारिज कर दी।
क्या है पूरा मामला?
सौरभ शर्मा मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में आरक्षक पद पर कार्यरत थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, करीब 28 हजार रुपये मासिक वेतन होने के बावजूद उन्होंने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में 11.60 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। लगभग 51.89 किलोग्राम सोना जब्त किया गया। नकदी और सोना मेंदोरी स्थित एक इनोवा वाहन से बरामद हुआ। नकदी, सोना, अचल संपत्ति और निवेश समेत 108.24 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त, फ्रीज या अटैच की गईं। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक है।
सह-आरोपियों ने भी सौरभ शर्मा पर डाली जिम्मेदारी
जांच के दौरान पत्नी, मां, सास और अन्य सहयोगियों के बयान भी दर्ज किए गए। सूत्रों के मुताबिक कई सह-आरोपियों ने कंपनियों, निवेश और संपत्तियों के वास्तविक नियंत्रण की जिम्मेदारी सौरभ शर्मा पर ही डाली है। इसी आधार पर अदालत ने मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए पहले नियमित जमानत देने से इनकार किया था। अब अस्थायी जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई है।
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