शराब कारोबार की संरचना में बड़ा बदलाव: अब इतनी हो गई ठेकेदारों की संख्या; आबकारी विभाग ने कार्रवाई में क्या किया जब्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश के इंदौर सहित पूरे राज्य में नई आबकारी नीति के बाद शराब कारोबार की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सरकार के अनुसार, लंबे समय से सक्रिय बड़े ठेकेदारों का सिंडीकेट टूट गया है और छोटे ठेकेदारों की भागीदारी बढ़ी है।
ठेकेदारों की संख्या में बड़ा इजाफा
आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पहले जहां ठेकेदारों की संख्या 489 थी, वहीं अब यह बढ़कर 919 तक पहुंच गई है। पिछले वर्ष कुल 849 ठेकेदार थे, लेकिन नई नीति के तहत छोटे समूहों और नए बोलीदारों को अधिक अवसर दिए जाने से इस संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
नई नीति से बदली शराब दुकानों की व्यवस्था
नई आबकारी नीति के तहत सभी शराब दुकानों के टेंडर नए सिरे से जारी किए गए हैं। बड़े ठेकेदारों की जगह छोटे ग्रुप और सिंगल यूनिट को भी मौका दिया गया। इंदौर में 173 शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई। कई दुकानों के संचालन के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
राजस्व में बढ़ोतरी का अनुमान
आबकारी विभाग के अनुसार, इस वित्त वर्ष में राज्य को लगभग 20 हजार करोड़ रुपए तक का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। पिछले वर्ष यह लक्ष्य 16,724 करोड़ रुपए तय किया गया था। विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
मोनोपॉली खत्म करने का दावा
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस नीति का उद्देश्य शराब कारोबार में एकाधिकार (सिंडीकेट) को समाप्त करना और अधिक लोगों को व्यवसाय में अवसर देना है। इसके चलते बड़े ठेकेदारों का प्रभाव कम हुआ है और नए छोटे ठेकेदार बाजार में आए हैं।
आबकारी विभाग की कार्रवाई
इसी बीच आबकारी विभाग ने अलग-अलग क्षेत्रों में छापेमारी कर 101 देसी और विदेशी शराब की बोतलें भी जब्त की हैं। विभाग का कहना है कि अवैध शराब कारोबार पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। नई आबकारी नीति के लागू होने के बाद शराब कारोबार की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इंदौर सहित पूरे प्रदेश में ठेकेदारों की संख्या बढ़ी है और सरकार इसे मोनोपॉली खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है।
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