स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: 5 अस्पताल और 121 क्लीनिकों के पंजीकरण किए निरस्त; इलाज पर लगाई रोक
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
शहर में स्वास्थ्य विभाग ने निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 अस्पतालों और 121 क्लीनिकों के पंजीकरण निरस्त कर दिए हैं। तय समयसीमा तक नवीनीकरण नहीं कराने पर यह कदम उठाया गया है।
इलाज और भर्ती पर भी रोक
इसके साथ ही इन संस्थानों में नए मरीजों के इलाज और भर्ती पर भी रोक लगा दी गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में हड़कंप मच गया है।
नवीनीकरण के लिए दिया गया था पर्याप्त समय
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पताल और क्लीनिक संचालन के लिए पंजीकरण का नवीनीकरण 1 जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक अनिवार्य किया गया था। इसके बावजूद कई संस्थानों ने आवेदन नहीं किया।
5 अस्पतालों और 121 क्लीनिकों पर कार्रवाई
समयसीमा बीतने के बाद विभाग ने सख्ती दिखाते हुए। 5 अस्पताल और 121 क्लीनिकों के पंजीकरण निरस्त कर दिए। इनमें से दो अस्पतालों ने स्वयं संस्थान बंद करने की जानकारी भी दी है।
जांच में सामने आई गंभीर खामियां
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत कोठारी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कुछ अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ नहीं मिला। कई संस्थानों के नगर निगम से दस्तावेज सत्यापित नहीं पाए गए।
कुछ ने नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया इन कारणों से 1 अप्रैल 2026 से इनका संचालन अवैध घोषित कर दिया गया है।
इन अस्पतालों पर गिरी गाज
एस.सी. गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल – स्टाफ की कमी
संकल्प हॉस्पिटल – दस्तावेज सत्यापित नहीं
नामदेव नर्सिंग होम – नवीनीकरण नहीं कराया
बटालिया आई हॉस्पिटल – स्वयं बंद करने का आवेदन
सरकार हॉस्पिटल – स्वयं बंद करने का आवेदन
क्लीनिकों की स्थिति और गंभीर
जांच में क्लीनिकों की स्थिति और चिंताजनक पाई गई। कुल 240 में से 89 क्लीनिकों ने आवेदन नहीं किया। 32 संस्थानों के दस्तावेज अधूरे पाए गए। निरस्त क्लीनिकों में एलोपैथी, आयुर्वेदिक, होम्योपैथी के साथ-साथ पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटर भी शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सख्त निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रभावित संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि तत्काल प्रभाव से नए मरीज भर्ती न करें। भर्ती मरीजों का इलाज पूरा कर जल्द डिस्चार्ज करें। संस्थान के बाहर लगे नाम-बोर्ड हटाएं।
आगे भी होगी सख्त कार्रवाई
सीएमएचओ ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी अस्पताल बिना वैध पंजीकरण के संचालित पाया जाता है, तो उसके खिलाफ मध्यप्रदेश नर्सिंग होम एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, जिन संचालकों से समयसीमा चूक गई है, वे एमपी ऑनलाइन के माध्यम से दोबारा आवेदन कर सकते हैं। पंजीकरण का नवीनीकरण हर तीन साल में अनिवार्य है।
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