40 लाख रुपए का लोन घोटाला: फर्जी दस्तावेजों से लिया; बैंक अफसरों सहित 5 पर FIR
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने केनरा बैंक से हुए 40 लाख रुपए के फर्जी लोन मामले में बड़ी कार्रवाई की है। जांच में बैंक अधिकारियों सहित कुल 5 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
केनरा बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर के उप महाप्रबंधक आनंद शिवानंद तोतड़ ने शिकायत दर्ज कराई। जांच में खुलासा हुआ कि चंद्रशेखर पचोरी ने मेसर्स आर. शिवम एंड कंपनी के नाम से बैंक में खाता खुलवाया और मशीनरी खरीद के नाम पर 40 लाख रुपए का लोन लिया।
बैंक को दी गई गलत जानकारी
ऋण प्रक्रिया में राममोहन अग्रवाल को को-ऑब्लिगेंट बनाया गया और उनकी संपत्ति को गिरवी दिखाया गया। बैंक को दी गई वैल्यूएशन और लीगल रिपोर्ट में संपत्ति को निर्विवाद और लोन के लिए उपयुक्त बताया गया। इसी आधार पर 8 मई 2018 को लोन स्वीकृत कर दिया गया।
जांच में बड़ा खुलासा
जिस संपत्ति को गिरवी दिखाया गया था, उस पर पहले से बहुमंजिला इमारत, फ्लैट और दुकानें बन चुकी थीं। संबंधित फ्लैट 2009-10 में ही बिक चुका था, यानी को-ऑब्लिगेंट वास्तविक मालिक नहीं था। इसके बावजूद बैंक कर्मचारियों ने भौतिक सत्यापन और ड्यू डिलिजेंस में लापरवाही बरती।
लोन एनपीए होने पर मामला सामने आया
लोन की किश्तें जमा नहीं होने पर 1 मई 2023 को खाता NPA घोषित किया गया। इसी दौरान पूरे मामले की परतें खुलीं।
FIR में शामिल आरोपी
EOW ने चंद्रशेखर पचोरी, राममोहन अग्रवाल, तत्कालीन शाखा प्रबंधक रजतिन गुप्ता, क्रेडिट मैनेजर कमलेश दिवानी और एक निजी मार्केटिंग फर्म के प्रोपराइटर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत लगाए गए हैं।
7 पॉइंट में समझें पूरा घोटाला
फर्म के नाम से खाता खुलवाया: 12 अप्रैल 2018 को मेसर्स आर. शिवम एंड कंपनी के नाम से खाता खुलवाया।
मशीनरी खरीद के नाम पर लोन: 40 लाख रुपए का टर्म लोन आवेदन किया गया, राममोहन अग्रवाल को को-ऑब्लिगेंट बनाया गया।
संपत्ति को गिरवी बताया: उषा नगर एक्सटेंशन, प्लॉट क्रमांक 277 को बंधक संपत्ति दिखाया।
फर्जी वैल्यूएशन और लीगल रिपोर्ट: बैंक को दी गई रिपोर्ट में संपत्ति ऋण के लिए उपयुक्त बताई गई।
असली स्थिति छिपाई गई: उसी प्लॉट पर पहले से बहुमंजिला इमारत, फ्लैट और दुकानें बन चुकी थीं।
बैंक स्तर पर लापरवाही: भौतिक सत्यापन, को-ऑब्लिगेंट की पात्रता और दस्तावेजों की जांच सही से नहीं की गई।
किश्तें रुकीं, खाता NPA बना: लोन की किश्तें जमा न होने पर 1 मई 2023 को खाता NPA घोषित, तब मामला सामने आया।
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