शराब दुकानों की नीलामी ठंडी: इतने करोड़ में बिकी दुकानें अब इतने में भी नहीं बिक रहीं, इतने ठेके अटके
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश में नई आबकारी नीति का असर अब साफ दिखने लगा है। कीमतों में बढ़ोतरी और नवीनीकरण व्यवस्था खत्म करने के फैसले के बाद शराब दुकानों की नीलामी सुस्त पड़ गई है। हालात यह हैं कि प्रदेशभर में 400 से ज्यादा शराब दुकानें अब तक बिना खरीदार के पड़ी हैं। इनमें इंदौर की 8 प्रमुख दुकानें भी शामिल हैं, जो पिछले साल ऊंचे दामों पर बिकी थीं, लेकिन इस बार कम कीमत पर भी कोई बोली लगाने को तैयार नहीं है।
पिछले साल 102 करोड़, अब 86 करोड़ में भी खरीदार नहीं
इंदौर की जिन 8 दुकानों पर सबसे ज्यादा नजर है, वे पिछली नीलामी में 102 करोड़ रुपए से अधिक में बिकी थीं। इस बार सरकार ने कीमत घटाकर करीब 86 करोड़ रुपए तक कर दी, इसके बावजूद इन पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। इन दुकानों की मूल आरक्षित कीमत करीब 123 करोड़ रुपए तय की गई थी, जिसे करीब 30% तक कम करने के बाद भी खरीदार सामने नहीं आए।
नई आबकारी नीति बनी वजह
मध्यप्रदेश सरकार की आबकारी नीति 2026-27 के तहत राज्य की सभी 3553 शराब दुकानों की कीमतों में करीब 20% तक वृद्धि की गई थी। इसके साथ ही वर्षों से चली आ रही ठेकों के नवीनीकरण की व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया। इस बदलाव के बाद सभी दुकानों के लिए नई सिरे से नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन बढ़ी हुई कीमत और अनिश्चितता के कारण कारोबारियों ने दूरी बनाना शुरू कर दिया है।
दोबारा नीलामी भी बेअसर
सरकार ने बिना बिके ठेकों के लिए दोबारा नीलामी की प्रक्रिया शुरू की है। आज फिर टेंडर खोले जाने हैं, लेकिन इससे पहले हुई नीलामी में भी कीमतों में करीब 30% तक कटौती के बावजूद अधिकांश दुकानों के लिए कोई टेंडर नहीं आया। ऐसे में इस बार भी स्थिति में खास सुधार की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।
इंदौर के प्रमुख इलाकों की दुकानें भी अटकीं
इंदौर जिले की कुल 173 शराब दुकानों में से 8 अभी तक नहीं बिक पाई हैं। इनमें शहर के प्रमुख और व्यावसायिक इलाके शामिल हैं, जैसे : पलासिया क्रमांक-1, बड़ी ग्वालटोली, पलसीकर कॉलोनी, महूनाका, सरवटे बस स्टैंड, अंजनी नगर, चिमनबाग, तोपखाना। आमतौर पर ये इलाके हाई डिमांड वाले माने जाते हैं, लेकिन इस बार यहां भी खरीदारों की दिलचस्पी कम नजर आ रही है।
व्यापारियों की चिंता: जोखिम ज्यादा, मुनाफा अनिश्चित
शराब कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि बढ़ी हुई बेस प्राइस, नई शर्तें और नवीनीकरण की सुविधा खत्म होने से जोखिम बढ़ गया है। हर साल नई बोली लगाने की अनिवार्यता के कारण निवेश सुरक्षित नहीं रह गया है।
सरकार के सामने चुनौती
शराब दुकानों की नीलामी से राज्य सरकार को बड़ा राजस्व मिलता है। ऐसे में 400 से ज्यादा दुकानों का नहीं बिकना सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। यदि जल्द ही खरीदार नहीं मिले, तो सरकार को या तो कीमतों में और कटौती करनी पड़ सकती है या नीति में बदलाव पर विचार करना पड़ सकता है।
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