ग्रामीण इलाकों में तेंदुए का आतंक: रहवासियों में खाैफ; 24 घंटे में दो हमले, संघर्ष कर बचाई जान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के ग्रामीण और जंगल से सटे इलाकों में इन दिनों तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों ने लोगों में डर का माहौल बना दिया है। बीते 24 घंटे के भीतर तेंदुए ने दो अलग-अलग स्थानों पर लोगों पर पीछे से हमला किया। हालांकि दोनों ही मामलों में पीड़ितों ने साहस दिखाते हुए संघर्ष किया और किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे।
पहली घटना मांगलिया क्षेत्र के ग्राम सुल्लाखेड़ी में हुई, जहां किसान अर्जुन अपने खेत में गुलाब के फूल तोड़ रहा था। खेत में चार फीट ऊंचे पौधों के बीच छिपे बैठे तेंदुए का उसे अंदाजा नहीं था। जैसे ही अर्जुन पास पहुंचा, तेंदुए ने अचानक पांच-छह फीट दूर से छलांग लगाकर उस पर हमला कर दिया। तेंदुए के तेज पंजे और दांत अर्जुन के हाथ में धंस गए, जबकि वह बार-बार गर्दन पर हमला करने की कोशिश करता रहा।
अर्जुन ने हिम्मत नहीं हारी और हाथों से तेंदुए को रोकते हुए जोर-जोर से मदद के लिए चिल्लाने लगा। उसकी आवाज सुनकर पास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण मौके पर पहुंचे। लोगों को आते देख तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया। गंभीर रूप से घायल अर्जुन को पहले स्थानीय अस्पताल और फिर एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया। वन विभाग ने एहतियातन क्षेत्र में पिंजरे भी लगा दिए हैं।
अर्जुन के मुताबिक, “अगर मैं चिल्लाता नहीं और उसे रोकने की कोशिश नहीं करता, तो तेंदुआ सीधे गर्दन पर हमला कर जान ले सकता था।” उसने बताया कि खेत में ऊंचे पौधों के कारण तेंदुआ दिखाई नहीं दिया और हमला पूरी तरह अचानक था।
दूसरी घटना में भी तेंदुए ने पीछे से हमला किया। यह हमला उस समय हुआ जब अर्जुन गावड़ नामक व्यक्ति जंगल में बकरी चरा रहा था। अचानक तेंदुए ने पीछे से झपट्टा मारकर उसे गिरा दिया और गर्दन पकड़ने की कोशिश की। लेकिन गावड़ के हाथ में मौजूद डंडा उसकी जान बचाने का सहारा बना। उसने लगातार दो बार डंडा घुमाकर तेंदुए पर वार किया, जिससे वह डरकर जंगल की ओर भाग गया। लगभग एक मिनट तक चले इस संघर्ष में गावड़ के कंधे और सीने पर नाखूनों के गहरे घाव आए।
वन विभाग के अनुसार, सुल्लाखेड़ी और आसपास के खेतों में कई जगह तेंदुए के पगमार्क मिले हैं। यह इलाका देवास जिले के जंगलों से जुड़ा हुआ है, खासकर शंकरगढ़ की पहाड़ियों से, जहां से तेंदुए के आने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से तेंदुए की गतिविधियां लगातार देखी जा रही थीं और इसकी सूचना पहले ही वन विभाग को दी जा चुकी थी।
इतना ही नहीं, पिछले कुछ महीनों से बायपास के आसपास विकसित हो रही टाउनशिप और देवगुराड़िया, सनावदिया जैसे क्षेत्रों में भी तेंदुए के दिखने की घटनाएं सामने आई हैं। करीब 20 दिन पहले बिचौली मर्दाना क्षेत्र में भी तेंदुआ सड़क पर घूमता हुआ देखा गया था।
इंदौर में तेंदुए के हमले पहले भी हो चुके हैं। वर्ष 2018 में लिंबोदी क्षेत्र में एक तेंदुआ घर से दो साल की बच्ची को उठा ले गया था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी। वहीं 2011 और 2008 में भी तेंदुए के हमलों में लोग घायल हो चुके हैं।
लगातार बढ़ रही इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि जंगल और बस्ती के बीच की दूरी तेजी से कम हो रही है। ऐसे में वन विभाग के लिए चुनौती और बढ़ गई है कि वह तेंदुए की गतिविधियों पर नियंत्रण रखे और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। फिलहाल विभाग अलर्ट पर है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
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