39वीं किस्त से पहले योजना से लाखों नाम हटे: खाते में नहीं आएगी राशि; उम्र समेत इन वजहों से लाभार्थी सूची से बाहर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश की लाड़ली बहना योजना की 39वीं किस्त का इंतजार कर रही महिलाओं के लिए बड़ी खबर है। किस्त जारी होने से पहले 7 लाख से ज्यादा महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में इन महिलाओं के बैंक खातों में इस बार योजना की राशि नहीं आएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आमतौर पर हर महीने की 10 से 15 तारीख के बीच लाड़ली बहनों के खातों में राशि ट्रांसफर करते हैं। इससे पहले योजना की 38वीं किस्त 12 जून को जारी की थी। अब 39वीं किस्त से पहले लाभार्थियों की संख्या में बड़ी कमी सामने आई है।
क्यों हटाए जा रहे हैं महिलाओं के नाम?
लाड़ली बहना योजना में फिलहाल नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं। वहीं, पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करने वाली महिलाओं के नाम लगातार हटाए जा रहे हैं।
इनमें उम्र सीमा पूरी होना, अपात्र पाए जाना, स्वयं योजना छोड़ना, मृत्यु, समग्र आईडी में समस्या और आधार संबंधी जानकारी का रिकॉर्ड से मेल नहीं खाना जैसे कारण शामिल हैं।
योजना शुरू होने के समय करीब 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 आवेदन प्राप्त हुए थे। आपत्तियों और जांच के बाद बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। अब लाभार्थियों की संख्या घटकर करीब 1 करोड़ 25 लाख रह गई है।
इंदौर में करीब 20 हजार महिलाएं हुईं बाहर
इंदौर जिले में योजना की शुरुआत में 4 लाख 57 हजार 742 महिलाओं ने आवेदन किया था। अब करीब 4 लाख 38 हजार 88 महिलाओं को ही हर महीने योजना की राशि मिल रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा के मुताबिक, निर्धारित पात्रता के आधार पर ही महिलाओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है। जो महिलाएं पात्रता की शर्तों से बाहर हो रही हैं, उनके नाम लाभार्थी सूची से हटाए जा रहे हैं।
60 साल की उम्र सबसे बड़ी वजह
इंदौर में नाम हटने के प्रमुख कारणों में उम्र सीमा भी शामिल है। पिछले करीब साढ़े तीन साल में 60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर 14,151 महिलाएं योजना से बाहर हुईं। इसके अलावा 452 महिलाएं जांच में अपात्र पाई गईं। 973 महिलाओं ने खुद योजना का लाभ छोड़ दिया। 763 महिलाओं की मृत्यु हो गई। 2,406 नाम समग्र आईडी से जुड़ी समस्या के कारण हटाए गए।
903 महिलाओं के आधार और समग्र डेटा का मिलान नहीं होने पर नाम हटाए गए।
सहरिया, बैगा और भारिया महिलाओं को भी नहीं मिल रहा लाभ
लाड़ली बहना योजना से बाहर होने वाली महिलाओं में मध्यप्रदेश की विशेष रूप से कमजोर जनजातियों (PVTG) की महिलाएं भी शामिल हैं।
सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय की करीब 5 लाख महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इसका कारण यह है कि इन समुदायों की महिला मुखियाओं को पहले से आहार अनुदान योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जा रही है।
1,500 रुपए की दूसरी सरकारी सहायता बनी पात्रता में अड़चन
आहार अनुदान योजना के तहत इन जनजातीय परिवारों की महिला मुखिया को हर महीने 1,500 रुपए दिए जाते हैं। लाड़ली बहना योजना के पात्रता नियमों में ऐसी महिलाओं को अपात्र माना गया है, जिनके परिवार के किसी सदस्य को किसी अन्य सरकारी योजना के तहत 1,500 रुपए या उससे अधिक की राशि मिल रही हो।
यही नियम सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय की महिलाओं पर लागू हुआ है। सरकार का तर्क है कि उन्हें पहले से 1,500 रुपए की सहायता मिल रही है, इसलिए वे लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
मंत्री ने नियम को लेकर क्या कहा?
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने पात्रता संबंधी नियम की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, लाड़ली बहना योजना के पात्रता नियमों के पैरा 4.4 में सरकारी योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर प्रावधान किया गया है। मंत्री का कहना है कि पात्रता के ये नियम सभी महिलाओं पर समान रूप से लागू होते हैं।
किन परिस्थितियों में महिला अपात्र होती है?
योजना की पात्रता शर्तों के अनुसार परिवार से जुड़ी कई स्थितियों में महिला को लाभ से बाहर किया जा सकता है। इनमें प्रमुख परिवार की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपए से ज्यादा होना।
परिवार के किसी सदस्य का आयकरदाता होना। परिवार के किसी सदस्य का सरकारी नौकरी में होना या सरकारी संस्था से पेंशन लेना। परिवार के किसी सदस्य का सरकारी बोर्ड, निगम या मंडल का सदस्य होना। परिवार के किसी सदस्य को निर्धारित सीमा से अधिक राशि वाली अन्य सरकारी योजना का लाभ मिलना।
अब तक 56 हजार करोड़ से ज्यादा बांटे
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2023 से जून 2026 तक लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं के बैंक खातों में 56 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है।
राशि सीधे DBT के माध्यम से खातों में भेजी जाती है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने योजना के लिए 23,882.81 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया है।
1,500 रुपए हुई मासिक किस्त
लाड़ली बहना योजना की शुरुआत में महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपए दिए जाते थे। बाद में इसे बढ़ाकर 1,250 रुपए किया गया और नवंबर 2025 से मासिक सहायता राशि 1,500 रुपए कर दी गई।
हालांकि, राशि बढ़ने के बावजूद योजना में नए लाभार्थियों के पंजीयन नहीं होने से पात्रता की प्रक्रिया से बाहर हुई महिलाओं की संख्या लगातार चर्चा में है।
2023 में शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना
लाड़ली बहना योजना की शुरुआत मार्च 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी। योजना का उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था।
अब योजना की 39वीं किस्त से पहले लाभार्थियों की सूची में हुई कटौती के कारण बड़ी संख्या में महिलाओं को इस बार खाते में राशि आने का इंतजार नहीं रहेगा। हालांकि, किस्त की आधिकारिक तारीख और इस बार की अंतिम लाभार्थी संख्या सरकार की ओर से जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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