आज जमेगी इंदौैर की झांकी: 103 बरस की हुई पुरखों की परंपरा
KHULASA FIRST
संवाददाता

अहिल्या नगरी में छाया अनंत चतुर्दशी का उत्साह, सूर्यास्त के बाद से शुरू होगा उत्सव का उल्लास
90 अखाड़ों का दिखेगा दमखम, पहलवानों के करतबों का बेसब्री से है इंतजार
झिलमिल झांकियों व बप्पा की विदाई के संग आज रतजगा करेगा शहर
28 खूबसूरत झांकियों का कारवां निकलेगा सड़कों पर, मिलों की झांकियों पर रहेगी सबकी नजर
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कभी तिल रखने की जगह नहीं होती थी इंदौर की सड़कों पर, जिधर नजर घुमाओ, सिर ही सिर नजर आते थे। सिर पर पुट्टल उठाए हजारों लोग यूं उमड़े आते थे जैसे कोई कुंभ का मेला।
दिन से ही सड़क के दोनों छोरों पर पल्लियां बिछ जाती थीं। जगह घेरने की ऐसी मारामारी कि घंटों पहले ही लोग घरों से निकल जाते थे। जरूरी भी था, रातभर जागना जो होता था। रातभर सिनेमाघर आबाद होते थे।
झांकियों के संग फिल्म देखने का ऐसा जज्बा होता था कि झांकी मार्ग की टॉकीज में टिकट ब्लैक होते थे। शहर का सालभर का धंधा दो दिन में पूरा हो जाता था और शहर को खाली होने में दो दिन लग जाते थे।
घर-आंगन अगल-बगल के गांव, कस्बों, शहरों से आने वाले रिश्तेदारों से आबाद हो जाते थे। अतीत की ऐसी अनेक स्मृतियां हैं, जिन्हें लिखें तो पन्ने कम पड़ जाएं। आज इन स्मृतियों का स्मरण सिर्फ इसलिए कि झांकी बंदोबस्त से जुड़े तमाम जिम्मेदार जानें कि ये सिर्फ झांकियों को निकाल भर देने की जिम्मेदारी नहीं, ये हमारे डीएनए में रचा-बसा उत्सव है।
शुक्रवार को सूर्य के अस्ताचल होते ही अहिल्या नगरी उत्सव के उल्लास में निमग्न हो जाएगी। गगन पर चौदहवीं का जगमगाता चांद तो होगा, लेकिन सितारे नील गगन से उतरकर जमीन पर आ जाएंगे।
झिलमिल-झिलमिल इन सितारों की जगमगाहट को लाखों लाख आंखें अपलक निहारेंगी। ये सितारे जमीन पर उतार लाई है हमारे पुरखों की परंपरा। ये लोक परंपरा इस साल 103 बरस की हो गई है।
झांकियों और अखाड़ों से जीवंत इस लोकोत्सव में इस बार भी मिल मजदूरों ने प्राण फूंक दिए हैं। अखाड़ों के पहलवानों, उस्तादों और खलीफाओं ने पूरा दमखम झोंक दिया है। बस, इंतजार है उन लाखोलाख कद्रदानों का, जो श्रमिकों के श्रम से सींची इस कलाकारी को निहारने आंखों ही आंखों में पूरी रात गुजार देंगे। पलक झपकाए बगैर।
नींद आज देह से, आंखों से कोसों दूर रहेगी और उत्सव का उल्लास आत्मा से गलबहियां करेगा। झिलमिल झांकियों व विघ्नहर्ता गणपति बप्पा के संग आज रतजगा करेगा अपन का इंदौर।
साथ होगी उन मिलों की झांकियां जिनके दम पर 100 बरस देखते ही देखते ही गुजर गए। दमखम के दम पर अखाड़ों के करतबों से सजी ये रात बिरलों को ही नसीब होती है। तो चले आइये, सपरिवार उत्सव के इस उल्लास में शामिल होने। बंदोबस्त पूरे हैं, आपको रत्तीभर भी दिक्कत न होगी।
एक बार फिर अहिल्या नगरी में चहुंओर अनंत चतुर्दशी का उत्साह छा गया है। उत्सव का उल्लास सूर्यास्त के बाद से शुरू होगा, लेकिन उत्साह एक दिन पहले से मन में कुलांचे मार रहा है। समूचा शहर दुल्हन की तरह सज संवर गया है।
पूरा 12-15 किमी का चल समारोह रोशनी से नहा गया है। स्वागत मंचों की बाढ़ सी आ गई है। वंदनवार, तोरणद्वार बप्पा की विदाई के इस उत्सव के अभिनंदन को आतुर हो चले हैं। 28 रंगारंग झांकियों का कारवां जब सड़क पर उतरेगा तो आलम क्या होगा? ये रोमांच ही उत्सव में शामिल होने का अपरोक्ष न्योता दे रहा है।
28 झांकियों में से 15 उन मिलों की होंगी जिनके दम पर इस लोकोत्सव का आगाज हुआ था। मिलें तो दम तोड़ चुकी हैं, लेकिन परंपरा आज भी जिंदा है। ये जज्बा कहीं देखने को मिला है क्या?
देशभर की मिलें बंद हो गईं, जिंदगी खानाबदोश हो गई, फिर भी परंपरा दरबदर न हुई? इंदौर इस मामले में भारत में सिरमौर है। आज भी मिलों के उन उजड़े आंगन में ही शेड लगते हैं और झांकियां सजती हैं। वो ही मिल मजदूरों की पीढ़ियां बेजान पुतलों में प्राण फूंकती हैं, जिनके बाप दादाओं ने कभी इस परंपरा को स्थापित किया था।
आज का उत्सव भी बंद हो चुकी मिलों की झांकियों के साथ शुरू होगा। शुभारंभ दिन ढलने के बाद होगा। सबसे आगे खजराना गणेश की झांकी होगी। भगवान गणेश ही 101 बरस के इस लोकोत्सव का श्रीगणेश करेंगे।
इस झांकी के बाद इंदौर विकास प्राधिकरण व इंदौर नगर निगम की नयनाभिराम झांकियां रहेंगी। इन तीन ‘सरकारी’ झांकियों के बाद शुरू होगा मिल की असली झांकियों का सिलसिला।
6 मिल की झांकियां शामिल होंगी, भंडारी मिल ( होप टेक्सटाइल), कल्याण मिल, हुकुमचंद मिल, मालवा मिल, स्वदेशी मिल व राजकुमार मिल के नाम एक बार फिर जगमगाएंगे। इनके पीछे रहेगी संस्था स्पूतनिक ट्यूटोरियल की झांकी व शास्त्री क्लब छोटा गणपति की झांकी।
15 झांकियां मिलों की रहेंगी व 11 झांकियां अन्य निजी संस्थाओं की। साथ में होंगे 90 अखाड़े। सबके सब बरसों पुराने। अखाड़े भी अपनी-अपनी साज-सज्जा के संग शामिल होंगे, जो किसी झांकी से कम नहीं रहेंगे।
अखाड़ों में पहलवानों के करतब तो शामिल रहेंगे ही, इस बार महिला पहलवानों व युवतियों का दमखम भी दमदारी से देखने को मिलेगा। हर अखाड़े की कला के प्रदर्शन का वक्त जरूर बेहद महीन रखा गया है, लेकिन फिर भी वे इस रत्तीभर वक्त में भी कुछ कर गुजरने के जज्बे से लबरेज हैं।
मालवा का सालाना जलसा आया, तो आ रहे हैं न आप...झांकी मार्ग पर अपराह्न 4 बजे से ट्रैफिक रोक दिया जाएगा। झांकियां पहले भंडारी मिल रेलवे क्रॉसिंग से शुरू होती थीं, अब डीआरपी लाइन व राजकुमारे ब्रिज के मुहाने से शामिल होंगी।
डीआरपी लाइन से उत्सव का ये कारवां सबसे पहले चिमनबाग मैदान में दस्तक देगा और फिर चिकमंगलूर चौराहा पहुंचेगा। फिर असली रंगत वाली जगह जेल रोड पहुंचेगा। कभी इस हिस्से से झांकी देखना किसी चुनौती व गर्व से कम नहीं होता था।
जेल रोड से झांकियां एमजी रोड पर आएंगी और स्मृतियों में खो गए श्रीकृष्ण टॉकीज के सामने से गुजरते हुए अपने किशनपुरा पुल (कृष्णपुरा) पर आएंगी। यहां से होलकर युगीन छतरियों को प्रणाम करती नंदलालपुरा में प्रवेश करेंगी और फिर यहां से शहर की लंबी-चौड़ी नई सड़क (जवाहर मार्ग) पर आ जाएंगी।
इमली साहिब गुरुद्वारा पर शीश नवाकर उत्सव का ये उल्लास यशवंत रोड चौराहा को क्रॉस कर पीपली बाजार, राम लक्ष्मण बाजार के मुहाने पर पहुंचेगा। फिर बंबई बाजार का इलाका रोशन होगा और कालिका माता दरबार बप्पा के जयकारों से गुंजायमान होगा।
नृसिंह बाजार चौराहे को पार कर 101 बरस की ये परंपरा भगवान नृसिंह को दंडवत कर सर सेठ हुकुमचंद के आशियाने शीश महल के सामने से गुजरेगी और मारोठिया बाजार के मुहाने से गुजरकर सीतलामाता बाजार में दस्तक देगी।
फिर आएगा भगवान जानकीनाथ का गोराकुंड चौराहा। यहां से एक बार फिर उत्सव का ये काफिला एमजी रोड पर आ जाएगा और खजूरी बाजार की अब चौड़ी हो चली सड़क पकड़ लेगा।
मोरसली गली के सामने से गुजरते हुए ये लोक परंपरा अपनी आराध्या देवी मां अहिल्या के आंगन राजवाड़ा चौक में दस्तक देगी और कृष्णपुरा से गुजरती हुई मृगनयनी एम्पोरियम के सामने से सरपट अपने-अपने मिल-मुकाम का रास्ता पकड़ लेगी।
तब तक दिन निकल जाएगा और समूची रात उत्सव मनाकर इंदौर व इंदौरी अपने-अपने घर लौट जाएंगे। अलसाई आंखों में उत्सव का नजारा समाए हुए… तो आ रहे हैं न आप? अपन के इंदौर के, अपने मालवा के इस सालाना जलसे में? इंतजार रहेगा भिया...!!
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