सत्ता और संगठन के बीच साधना होगा संतुलन: नई टीम की परीक्षा; मध्य प्रदेश भाजपा में बदलाव
KHULASA FIRST
संवाददाता

प्रभारी से संगठन महामंत्री तक सब नए, प्रदेश भाजपा में बदली कमान, अब सत्ता से तालमेल और कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतना होगा टीम का पहला इम्तिहान
बाहर से आए प्रभारी, अनुभवी संगठनकर्ता की वापसी और चार नेताओं को दूसरे राज्यों का जिम्मा, भाजपा के ताजा फेरबदल में छिपे हैं कई संकेत
मुंबई और नागपुर से चलेगा संगठन का सूत्र, आदिवासी अंचल पर विशेष ध्यान
नई सूची ने बदला प्रदेश का सांगठनिक नक्शा; राजनीतिक चेहरा, क्षेत्रीय निगरानी और रोजमर्रा का संचालन अब अलग हाथों में, कसौटी पर होगा तालमेल
हेमंत उपाध्याय 99930-99008, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भाजपा ने मध्य प्रदेश में प्रभारी से लेकर संगठन महामंत्री तक पूरी टीम बदलकर एक साफ संदेश दिया है कि संगठन को नए सिरे से कसना है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से जारी सूची में त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को प्रदेश प्रभारी बनाया गया है।
वे डॉ. महेंद्र सिंह की जगह लेंगे। उत्तर प्रदेश की रेखा वर्मा सह प्रभारी होंगी। चंद्रशेखर नए प्रदेश संगठन महामंत्री हैं। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश को मध्य प्रदेश का दायित्व फिर सौंपा गया है और सतीश धोंड को जनजाति संपर्क का प्रभार मिला है। शिव प्रकाश को मध्य प्रदेश समेत आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गोवा के संगठनात्मक मामलों का प्रभार भी सौंपा गया है।
केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश के बीच कड़ी होंगे बिप्लब देब... नई व्यवस्था में तीन स्तर दिखते हैं। बिप्लब देब राजनीतिक मोर्चे पर केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश के बीच कड़ी होंगे। शिव प्रकाश कई राज्यों के क्षेत्रीय प्रभारी के रूप में संगठन की दिशा देखेंगे।
चंद्रशेखर के जिम्मे जिला और मंडल की कमेटियों से लेकर अभियानों तक का रोजमर्रा का काम रहेगा। भाजपा में संगठन महामंत्री को रीढ़ माना जाता है, इसलिए इस पद पर बदलाव सबसे अहम संकेत है।
इस बदलाव पर राजनीति के पंडितों की राय है कि नई टीम के अनुभव से सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बेहतर होगा। सत्ता और संगठन में समन्वय इस फेरबदल का सबसे बड़ा तर्क माना जा सकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम के बीच बेहतर संवाद बैठाने के लिए शिव प्रकाश जैसे अनुभवी चेहरे की वापसी अहम मानी जा सकती है। कभी सतना के सांसद गणेश सिंह के निजी सहायक रह चुके बिप्लब देब का चयन अलग संकेत देता है।
वे प्रदेश के किसी खेमे से नहीं हैं। जानकारों का कहना है कि भाजपा की परंपरा में बाहरी नेता को प्रभारी बनाने का लाभ यह गिना जाता है कि वह गुटबाजी से ऊपर रहकर संवाद कर सके।
प्रदेश के नेता, राष्ट्रीय मंच... मध्य प्रदेश के चार नेताओं को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी मिली है। अरविंद भदौरिया आंध्र प्रदेश के प्रभारी बने हैं। गजेंद्र पटेल को झारखंड, कविता पाटीदार को राजस्थान और लालसिंह आर्य को पश्चिम बंगाल में सह प्रभारी बनाया गया है।
यह प्रदेश के नेताओं के बढ़ते कद का संकेत है। दूसरी ओर इसका असर यह भी हो सकता है कि ये नेता प्रदेश की राजनीति को पहले जितना समय न दे पाएं। संगठन के लिए यह भी देखने की बात होगी कि इनकी जगह प्रदेश में कौन-सा नेतृत्व उभरता है।
आदिवासी अंचल पर नजर... सतीश धोंड को जनजाति संपर्क का प्रभार मिला है। संगठनात्मक बदलाव के तहत सतीश धोंड को प्रदेश सह-महामंत्री (संगठन) महाराष्ट्र के साथ-साथ मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में ‘जनजाति संपर्क’ का महत्वपूर्ण प्रभार सौंपा गया है। उनका केंद्रीय कार्यालय नागपुर तय किया गया है।
झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में गजेंद्र पटेल की नियुक्ति को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है, क्योंकि पटेल आदिवासी समुदाय से हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर पकड़ किसी भी दल के लिए सत्ता की राह तय करती है।
आशीष अग्रवाल को अहम दायित्व... प्रदेश मीडिया प्रभारी का पद लंबे समय से खाली था। आशीष अग्रवाल के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनने के बाद ब्रजगोपाल लोया को यह जिम्मेदारी मिली है।
लोया पहले ही सह मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। दो बार प्रदेश में मीडिया प्रभारी का अहम दायित्व संभाल चुके आशीष राज्य के ऐसे पहले नेता भी हैं, जिन्हें अब राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी दी गई है।
नई टीम के सामने पहली कसौटी कार्यकर्ताओं की सक्रियता और सरकार से तालमेल की होगी। दूसरी कसौटी आदिवासी अंचल में पकड़ की रहेगी। कागज पर ढांचा साफ है, लेकिन नतीजे जमीन पर काम से तय होंगे।
कमजोरी और चुनौतियां
सबसे बड़ी चुनौती समय की है। शिव प्रकाश का केंद्र मुंबई है और उनके जिम्मे पांच राज्य हैं। सतीश धोंड का केंद्र नागपुर है और वे चार राज्य देखेंगे। मध्य प्रदेश के हिस्से कितना समय आएगा, यह सवाल बना रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बिप्लब देब को राज्य की जमीनी राजनीति और क्षेत्रीय समीकरण समझने में वक्त लग सकता है। केंद्रीय नेतृत्व ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक चंद्रशेखर को मध्य प्रदेश भाजपा का नया प्रदेश संगठन महामंत्री नियुक्त किया है।
मध्य प्रदेश भाजपा में यह बेहद अहम पद जनवरी में हितानंद शर्मा की संघ में वापसी के बाद से खाली था। चंद्रशेखर के सामने कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतने की चुनौती होगी। नई टीम को प्रदेश के स्थापित नेताओं और पुराने पदाधिकारियों के साथ तालमेल बैठाना होगा। सत्ता के सामने परीक्षा यह है कि वह संगठन की नई टीम के साथ कैसे रिश्ता बनाती है।
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