स्लाइड से अंबानी गायब: अडानी बरकरार; विपक्ष के नेता की ‘डेस्ट्रॉयर्स ऑफ डेमोक्रेसी’ लिस्ट को लेकर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर/ नई दिल्ली।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 19 सितंबर के इंदौर कार्यक्रम और 24 सितंबर की दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई गई ‘डेस्ट्रॉयर्स ऑफ डेमोक्रेसी’ स्लाइड को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है।
वजह है दोनों स्लाइड्स में नामों का अंतर। इंदौर में दिखाई गई सूची में उद्योगपति मुकेश अंबानी का नाम था, जबकि पांच दिन बाद दिल्ली में दिखाई गई सूची में उनका नाम नजर नहीं आया। वहीं गौतम अडानी दोनों प्रस्तुतियों में शामिल रहे।
इंदौर में छह नामों का जिक्र
19 सितंबर को इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मौजूदा राजनीतिक और संस्थागत व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने एक प्रस्तुति के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, गौतम अडानी और मुकेश अंबानी का नाम लिया था।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि देश की व्यवस्था पर कुछ प्रभावशाली लोगों का नियंत्रण है और इसका असर छात्रों तथा शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। ये उनके राजनीतिक आरोप थे, जिनका उन्होंने कार्यक्रम में अपने तर्कों के साथ उल्लेख किया।
दिल्ली में बदली सूची
24 सितंबर को नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और SIR को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
इसी दौरान दिखाई गई प्रस्तुति में ‘डेस्ट्रॉयर्स ऑफ डेमोक्रेसी’ शीर्षक के तहत सूची बदली हुई नजर आई। इसमें गौतम अडानी, मोहन भागवत, अमित शाह, नरेंद्र मोदी, अजीत डोभाल के साथ पीके मिश्रा और सीईसी ज्ञानेश कुमार के नाम शामिल थे। मुकेश अंबानी इस सूची में नजर नहीं आए।
यही बदलाव अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, केवल दो प्रस्तुतियों में नामों के बदलने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी व्यक्ति के प्रति राहुल गांधी का राजनीतिक रुख बदल गया है। इसके पीछे प्रस्तुति के विषय, संदर्भ या उस समय उठाए जा रहे मुद्दे जैसे कारण हो सकते हैं।
SIR विवाद के बीच दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस
दिल्ली की प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य मुद्दा SIR और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद थे। एक अखबार की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा SIR से संबंधित मामलों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद राहुल गांधी ने इसे लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा कि अधिकारियों द्वारा अलग-अलग मुद्दों पर राय या चिंता जताई गई थी, लेकिन SIR से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।
अडानी का नाम दोनों सूचियों में
दोनों प्रस्तुतियों में एक समानता भी दिखाई देती है। गौतम अडानी का नाम इंदौर और दिल्ली, दोनों जगह की सूची में मौजूद रहा। मुकेश अंबानी का नाम केवल इंदौर वाली प्रस्तुति में दिखाई दिया, जबकि दिल्ली वाली सूची में उनकी जगह अन्य नाम जोड़े गए।
इस बदलाव ने सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है। हालांकि, अंबानी का नाम हटाने को लेकर राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इसे केवल दो अलग-अलग प्रस्तुतियों में दिखाई देने वाली सूची का अंतर माना जा सकता है।
MP कनेक्शन इसलिए महत्वपूर्ण
इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश कनेक्शन इसलिए चर्चा में है क्योंकि पहली सूची 19 सितंबर को इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में सामने आई थी।
राहुल गांधी का यह कार्यक्रम छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था। इसके पांच दिन बाद दिल्ली में चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुति का फोकस बदल गया।
इसलिए फिलहाल सबसे स्पष्ट तथ्य यही है कि 19 सितंबर की इंदौर प्रस्तुति और 24 सितंबर की दिल्ली प्रस्तुति में नामों की सूची एक जैसी नहीं थी। मुकेश अंबानी का नाम इंदौर वाली सूची में था, लेकिन दिल्ली वाली सूची में नहीं दिखा।
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