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एम्स में चूहों का आतंक: एनआईसीयू वार्ड तक पहुंचे; 20 नवजात है भर्ती, 3 दिन में 25 से ज्यादा मृत मिले

KHULASA FIRST

संवाददाता

11 अप्रैल 2026, 1:47 pm
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एम्स में चूहों का आतंक

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
राजधानी के एम्स अस्पताल में इन दिनों चूहों की बढ़ती मौजूदगी ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम के डक्ट में पनपे चूहे अब वार्ड, कॉरिडोर और यहां तक कि एनआईसीयू तक पहुंच चुके हैं। पिछले तीन दिनों में अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों से 25 से अधिक मृत चूहे मिलने की पुष्टि हुई है।

चूहों के कारण हो चुकी है दो नवजातों की मौत
यह स्थिति इसलिए और संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि बीते साल इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के कारण दो नवजातों की मौत हो चुकी है, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे।

AC डक्ट बना चूहों का ठिकाना
जानकारी के अनुसार, एम्स भोपाल में लगे सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम के डक्ट में लंबे समय से चूहों का बसेरा बना हुआ है। अब तक पेस्ट कंट्रोल केवल वार्ड और निचले हिस्सों तक सीमित रहा, जिससे डक्ट के भीतर उनकी संख्या लगातार बढ़ती गई।

अप्रैल की शुरुआत में एसी मेंटेनेंस के दौरान जब तकनीकी टीम ने डक्ट की जांच की, तो बड़ी संख्या में चूहों की मौजूदगी सामने आई। इसके बाद प्रबंधन ने डक्ट के अंदर भी पेस्ट कंट्रोल कराने का निर्णय लिया।

पेस्ट कंट्रोल के बाद बढ़ी मुश्किल
तीन दिन तक चले पेस्ट कंट्रोल अभियान के बाद एक नई समस्या सामने आई। दवा के असर से चूहे डक्ट से बाहर निकलकर वार्ड और कॉरिडोर में आने लगे। इसी दौरान बड़ी संख्या में उनकी मौत भी हुई।

सफाई कर्मचारियों को तीन दिनों में 25 से ज्यादा मृत चूहे विभिन्न संवेदनशील स्थानों से मिले हैं। इससे अस्पताल के वातावरण पर नकारात्मक असर पड़ रहा है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।

एनआईसीयू में सबसे ज्यादा खतरा
एम्स के एनआईसीयू में फिलहाल करीब 20 नवजात भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यहां भी चूहों की आवाजाही देखी जा रही है, जो बेहद चिंताजनक है। शिशु रोग विभाग के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चूहे एनआईसीयू में घूमते नजर आते हैं और कुछ समय बाद मर जाते हैं।

इससे नवजातों को काटने का खतरा तो है ही, साथ ही संक्रमण का जोखिम भी काफी अधिक हो जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि कोई गंभीर घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी मेडिकल स्टाफ पर आ सकती है, जबकि इस समस्या से प्रबंधन को कई बार अवगत कराया जा चुका है।

संक्रमण का बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, चूहों के शरीर, बाल, पैरों और मल-मूत्र में कई खतरनाक बैक्टीरिया और रोगजनक होते हैं। ये संक्रमण फैलाने में सक्षम होते हैं। एनआईसीयू में भर्ती नवजात पहले से ही कमजोर होते हैं, ऐसे में मामूली संक्रमण भी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

प्रबंधन का पक्ष
एम्स प्रबंधन का कहना है कि वायरल वीडियो पेस्ट कंट्रोल के दौरान का है। उनके मुताबिक, दवा के असर से चूहे बाहर निकलते हैं और कुछ समय बाद मर जाते हैं। प्रबंधन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया प्रशिक्षित टीम की निगरानी में की जा रही है। मृत चूहों को तुरंत हटाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों को साफ किया जा रहा है।

पहले भी हो चुका है बड़ा हादसा
इंदौर के एमवाय अस्पताल में 31 अगस्त-1 सितंबर 2025 की रात के एनआईसीयू में चूहों ने दो नवजातों को काट लिया था, जिनकी बाद में मौत हो गई थी। यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां इसे गंभीर लापरवाही माना गया और एक डॉक्टर सहित 8 लोगों को सस्पेंड किया गया था।

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