खबर
Top News

भुनसारे ही गूंजा: वीर अलीजा सरकार की जय; हनुमान जन्मोत्सव के पूर्व वीर बगीची, सुभाष चौक से निकली भव्य-दिव्य प्रभातफेरी

KHULASA FIRST

संवाददाता

01 अप्रैल 2026, 1:35 pm
246 views
शेयर करें:
भुनसारे ही गूंजा

हनुमान लला के जयकारों से गूंज उठा पुराना इंदौर, दो शोभायात्राओं में उमड़ा जनसैलाब

वीर बगीची से निकली प्रभातफेरी ने रणजीत बाबा की यात्रा-सा पेश किया नजारा

बाल-ब्रह्मचारी बाबा साहेब के शिष्य गादीपति पवनानंद महाराज ने प्रभातफेरी के साथ अलीजा दरबार को दिया नया रूप, हेलिकॉप्टर से बरसे फूल

5 बजे से शुरू हुई प्रभातफेरी 10 बजे तक मार्ग में ही, सैकड़ों मंचों से भव्य स्वागत

सुभाष चौक हनुमानजी मंदिर से भी निकली शोभायात्रा, बीच शहर के बाजारों में उत्सव-सा माहौल

पुराने इंदौर में रातभर से चल रहा था जागरण, अंधेरे-अंधेरे ही शुरू हुआ उत्सव का उल्लास, अद्‌भुत दृश्य का साक्षी बना शहर

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वे गुरु भगवन तो वामन कद के ही थे, लेकिन विराट अवतार थे। बाल ब्रह्मचारी गुरुजी महाराज। जन-जन के वे ‘अन्नदाता' थे। असल नाम श्रीश्री प्रभुवानंदजी महाराज था, लेकिन नाम कोई जुबां पर न तब लेता था, न अब। एक छोटी-सी झोली में मिश्री व तुलसी दल लिए जब वे सिर पर लाल पाग बांध पश्चिमी इंदौर के बाजारों व मोहल्लों में निकल जाते थे तो ऐसा कोई दर नहीं होता था, जहां से वीर अलीजा सरकार की जय-जयकार न होती हो।

उसी छोटी-सी एक झोली से वे अनेक भंडारे कर देते थे। उनका दरबार वीर हनुमानजी सरकार के प्राचीनतम दिव्य-भव्य विग्रह से सुशोभित था। आज वही स्थान अलौकिक आभा के साथ चमत्कारिक देव स्थान के रूप में अद्‌भुत आभा लिए दमक रहा है। ये सब हुआ उन्हीं गुरु के सुयोग्य शिष्य बाल ब्रह्मचारी पवनानंदजी महाराज के संकल्प, साधना, प्रार्थना व पूजन के कारण।

आज वीर बगीची व अलीजा सरकार का दरबार इंदौर का एक बड़ा देवस्थान बनकर उभरा है। प्रभातफेरी ने इस स्थान को एक नई व अलौकिक ऊंचाई दी है। आज अहिल्या नगरी में गुरु के प्रति शिष्य की इस अनूठी गुरुभक्ति के साक्षात दर्शन किए और वीर बगीची के विराट स्वरूप को भी हृदय में महसूस किया। अलसुबह से दिन चढ़ने तक पुराने इंदौर में गूंजते अलीजा सरकार के जयघोष इस बात के साक्षी थे कि वीर बगीची की पर प्रभातफेरी भी अब इंदौर का एक बड़ा व विहंगम उत्सव हो गई है।

बु धवार की भोर पुराने इंदौर में आज हनुमानजी सरकार की भक्ति की अनुपम बयार लेकर आई। एक तरफ भूतेश्वर महादेव पंचकुइया वाला इलाका था, दूजी तरफ हमारा अपना राजवाड़ा का क्षेत्र व सुभाष चौक। एक तरफ थे वीर अलीजा सरकार तो दूसरी तरफ थे सुभाष चौक के हनुमानजी सरकार।

एक तरफ गूंज रहा था वीर अलीजा सरकार की जय का गगनभेदी जयघोष तो दूसरी तरफ हो रहा था हनुमान लला का गुणानुवाद। दोनों स्थान के बीच 2 किमी से ज्यादा का फासला था, लेकिन इस फासले को हनुमानजी के भक्तों ने पूरी तरह पाट दिया था।

दोनों स्थान से एक साथ जब प्रभातफेरी निकली तो एक से दूजे छोर तक जनसमुद्र ही हिलोरें ले रहा था। वीर बगीची की प्रभातफेरी में तो हनुमानजी के भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि नजारा रणजीत अष्टमी पर रणजीत सरकार की प्रभातफेरी-सा हूबहू हो गया। गादीपति संत श्रीश्री पवनानंदजी महाराज की अगुआई में निकली इस प्रभातफेरी में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विधायक रमेश मेंदोला प्रमुख रूप से शामिल हुए।

‘भुनसारे' ही वीर अलीजा सरकार की जय-जय शुरू हो गई थी। यानी सूर्योदय के घंटों पहले, ब्रह्ममुहूर्त में घंटे-घड़ियाल गूंजने लग गए थे। सुबह 4 बजे से भक्तों का सैलाब उमड़ने लगा। 5 बजते-बजते तो माहौल ऐसा हो गया, जैसे रणजीत हनुमानजी की सालाना यात्रा में हो जाता है।

न सिर्फ पुरुष, बल्कि बड़ी संख्या में मातृशक्ति की उपस्थिति बता रही थी कि वीर अलीजा बाबा की प्रभातफेरी अब पश्चिमी इंदौर का बड़ा सालाना उत्सव हो गई है। दिन निकलने के पहले ही प्रभातफेरी पुराने इंदौर की सड़कों पर निकल आई। वीर बगीची देवस्थान से जैसे ही अनेकानेक सुगंधित पुष्पों से सजा रथ बाहर आया, रथ को अपने हाथों से खींचने की होड़ मच गई।

रथ के आगे-आगे का मार्ग युवाओं की टोलियां झाड़ू से बुहारती चल रही थीं। दर्जनों भजन मंडलियों से गूंजती राम-हनुमान गुणगान की स्वर लहरियों ने वातावरण को अंजनी के लाल के नाम कर रखा था। अलग-अलग झांकियां भी दर्शनीय थीं।

सड़क के दोनों किनारे श्रद्धालुओं से अटे पड़े थे। ओटले, अटारी, छत, गैलरियां भी भक्तों से पटी पड़ी थीं। चारों तरफ से बरसते पुष्पों की बौछार यूं लग रही थी जैसे नीलगगन से भी समस्त देवता अलीजा सरकार के नगर भ्रमण उत्सव का स्वागत कर रहे हों।

हेलिकॉप्टर से बरसे फूल
वीर बगीची की ये प्रभातफेरी सुबह 6 बजे तक बड़ा गणपति से निकलकर टोरी कॉर्नर के आगे तक बढ़ चली थी। तब तक यात्रा का अंतिम सिरा अंतिम चौराहा तक भी नहीं आया था। रथ बगीची से निकला, तब तक हनुमानजी सरकार का ये कारवां गौराकुंड तक जा पहुंचा था।

यात्रा भूतेश्वर महादेव मंदिर, पंचकुइया मुक्तिधाम मार्ग से अंतिम चौराहा, गणेशगंज, बड़ा गणपति चौराहा, गोपाल निवास चौराहा, टोरी कॉर्नर, गौराकुंड चौराहा, सीतलामाता बाजार, लोहारपट्टी, कैलाश मार्ग होते हुए पुनः वीर बगीची देवस्थान पहुंचेगी।

खबर लिखे जाने तक प्रभातफेरी कैलाश मार्ग, मल्हारगंज में थी। इस पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा हो रही थी। दूसरी तरफ राजवाड़ा व उससे लगे शहर के प्राचीन बाजारों में सुभाष चौक हनुमानजी की प्रभातफेरी का भ्रमण चल रहा था। पश्चिमी इंदौर में बुधवार सुबह से 11 बजे के बाद तक हनुमानजी सरकार की भक्ति छाई हुई थी।

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!