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अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की 30 लाख की ठगी; 2 आरोपी गिरफ्तार

KHULASA FIRST

संवाददाता

24 अप्रैल 2026, 12:59 pm
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अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा

खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।
राज्य साइबर पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” और टेलीग्राम ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो खुद को कूरियर कंपनी और नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और लाखों रुपए ऐंठते थे।

ड्रग्स और अवैध सामग्री मिली
फरियादी हर्षित द्विवेदी ने बताया कि उन्हें एक कॉल आया, जिसमें कहा गया कि उनके पार्सल में ड्रग्स और अवैध सामग्री मिली है। इसके बाद कॉल को कथित नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी से जोड़ दिया गया।

रुपए ट्रांसफर करा लिए
यहां “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर “पुलिस क्लियरेंस” के नाम पर उनसे 30 लाख 25 हजार 719 रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। शिकायत के बाद साइबर पुलिस ने लखीमपुर खीरी निवासी सौरभ कुमार (24) और राजेश कुमार (27) को गिरफ्तार किया।

पुलिस ने फर्जी IP एड्रेस, बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की और उत्तर प्रदेश में दबिश देकर उन्हें पकड़ा।

लेन-देन के साक्ष्य मिले
जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करते थे। उनके खातों में 16 राज्यों से करोड़ों रुपए के लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। फरियादी के करीब 10 लाख रुपए सीधे आरोपियों के खाते में पहुंचे थे।

ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
पुलिस के अनुसार आरोपी पहले कूरियर कंपनी के कर्मचारी बनकर कॉल करते थे। पार्सल में ड्रग्स होने की बात कहकर पीड़ित को डराया जाता, फिर कॉल को फर्जी अधिकारी से जोड़ दिया जाता। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे।

देशभर में फैला था नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ कि इस गैंग का नेटवर्क जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में फैला हुआ था। आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदलते रहते थे ताकि पुलिस से बच सकें।

पुलिस की अपील
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती और “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें और किसी के साथ भी OTP या बैंक डिटेल्स साझा न करें।

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