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जुपिटर हॉस्पिटल में तीन घंटे तड़पता रहा घायल: डॉक्टर थे विदेश जाने की तैयारी में परिजनों से झूठ बोलता रहा स्टाफ; विधायक पुत्र एकलव्यसिंह गौड़ ने बताया अपराध

KHULASA FIRST

संवाददाता

22 मार्च 2026, 4:30 pm
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खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता फिर बेनकाब हुई है। छत्रीपुरा थाना क्षेत्र के सिलावटपुरा में हादसे में घायल युवक को इलाज के लिए तीन इमली स्थित विशेष जुपिटर हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन वहां इलाज के नाम पर जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। गंभीर युवक तीन घंटे तड़पता रहा जबकि अस्पताल स्टाफ झूठ पर झूठ बोलता रहा।

घटना 20 मार्च की शाम करीब 7 बजे का है। गौरव गोयल को एक्सीडेंट के बाद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। उसके पैर की नस कट चुकी थी और हड्‌डी फ्रैक्चर थी। ऐसी स्थिति में तुरंत इलाज जरूरी था। परिजनों का आरोप है अस्पताल स्टाफ ने पहले फॉर्मेलिटी पूरी करवाई। पैसे जमा करवा लिए, लेकिन इलाज शुरू नहीं किया।

करीब तीन घंटे तक परिजन डॉक्टर का इंतजार करते रहे। स्टाफ बार-बार यही कहता रहा—डॉक्टर रास्ते में हैं। सच्चाई का खुलासा हुआ, तो सभी हैरान रह गए—जिस डॉक्टर के आने का इंतजार कराया जा रहा था, वह विदेश जाने की तैयारी में था।

झूठ, लापरवाही और पैसा वसूली का घातक खेल
परिजनों का आरोप है अस्पताल प्रबंधन जानबूझकर मरीज को रोककर रखना चाहता था ताकि इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली जा सके। डॉक्टर की अनुपस्थिति के बावजूद मरीज को रैफर नहीं किया गया, जो सीधे-सीधे जान से खिलवाड़ है।

आखिरकार दूसरे अस्पताल में छह घंटे चला ऑपरेशन
हालत बिगड़ती देख परिजनों ने मजबूरी में उसे दूसरे अस्पताल ले जाने का फैसला किया। बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तुरंत स्थिति संभाली और करीब 5-6 घंटे तक लंबा ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया है।

विधायक पुत्र भड़के, अस्पताल प्रबंधन को लगाई फटकार
जू्पिटर में मौजूद विधायक मालिनी गौड़ के पुत्र एकलव्यसिंह गौड़ ने भी अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। साफ कहा जब डॉक्टर नहीं थे तो मरीज को तुरंत दूसरे अस्पताल भेजना चाहिए था, जबकि झूठे आश्वासन देकर समय बर्बाद किया।

‘गोल्डन ऑवर’ की धज्जियां उड़ाते अस्पताल
एक तरफ सरकार ‘राहवीर योजना’ के तहत गोल्डन ऑवर में इलाज सुनिश्चित करने के लिए 25,000 रुपए तक इनाम और 1.5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा दे रही है, दूसरी तरफ निजी अस्पताल इस व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं। गोल्डन ऑवर यानी दुर्घटना के बाद का पहला घंटा, जिसमें इलाज से जान बचाई जा सकती है, उसी समय को यहां पैसे के लिए बर्बाद कर दिया गया।

कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
मामला सिर्फ एक अस्पताल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। कलेक्टर शिवम वर्मा और सीएमएचओ से मांग की गई है निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई अस्पताल मरीज की जान से इस तरह खिलवाड़ न कर सके। अस्पताल इलाज के बजाय सिर्फ “कमाई के केंद्र” बन जाएंगे तो सड़क हादसों में घायलों को बचाने के लिए बनाई गई योजनाएं सिर्फ कागजों में ही रह जाएंगी। यह मामला चेतावनी है सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो अगला शिकार कोई भी हो सकता है।

पुलिस सीसीटीवी फुटेज से कर रही पड़ताल
मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा रही है। माना जा रहा है जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

5 लाख मुआवजे की मांग, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
पीड़ित पक्ष ने अस्पताल प्रबंधन को शिकायत कर 5 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है। साथ ही साफ चेतावनी दी है सात दिनों में कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला उपभोक्ता फोरम और अन्य संबंधित अधिकारियों तक ले जाया जाएगा।

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