मध्यम वर्ग पर महंगाई की मार: इतना बढ़ गया घरेलू बजट; बिजली-गैस से लेकर खाना-पीना सब महंगा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अप्रैल की शुरुआत के साथ ही मध्यम वर्गीय परिवारों की जेब पर महंगाई का दबाव साफ नजर आने लगा है। बिजली, रसोई गैस, खाद्य तेल, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी के चलते घर का मासिक बजट करीब 15% तक बढ़ गया है। इसका सीधा असर रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ रहा है। चाहे वह किचन हो, बच्चों की पढ़ाई या बाहर खाने-पीने की आदत।
तेल और घी भी हुआ महंगा
लोगों के अनुसार सरकार पहले ही बिजली और गैस के दाम बढ़ा चुकी है। अब तेल 40 रुपए और घी 30 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। बाजार में सामान खरीदने गए तो कई चीजें लिस्ट से हटानी पड़ीं।”
हर मध्यम वर्गीय घर की यही कहानी
दरअसल, यह स्थिति अब सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के लगभग हर मध्यम वर्गीय घर की यही कहानी बन चुकी है। वैश्विक स्तर पर जारी ईरान-इजराइल संघर्ष और घरेलू स्तर पर बढ़ी ऊर्जा कीमतों ने मिलकर महंगाई को और तेज कर दिया है।
सरसों तेल से समझिए महंगाई का गणित
महंगाई की जड़ में सबसे बड़ा कारण ट्रांसपोर्ट और आयात लागत का बढ़ना है। अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते शिपिंग महंगी हो गई है, वहीं डीजल कीमतों ने ट्रकों का खर्च बढ़ा दिया है।
दबाव घरेलू तेलों पर भी पड़ा
भारत में सरसों तेल का उत्पादन होता है, लेकिन रिफाइंड ऑयल (सोयाबीन, पाम ऑयल) बड़े पैमाने पर इंडोनेशिया, मलेशिया और अर्जेंटीना से आयात होता है। जब आयात महंगा हुआ तो इसका दबाव घरेलू तेलों पर भी पड़ा।
इसके अलावा फैक्ट्री संचालन में बिजली और ईंधन महंगा हुआ, पैकेजिंग (प्लास्टिक) की लागत बढ़ी, ट्रेडर्स द्वारा स्टॉक रोकने से बाजार में कृत्रिम तेजी आई। इन सभी कारणों से खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है।
बिजली और गैस की बढ़ोतरी: दोहरी मार
बिजली दरों और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ने मिडिल क्लास की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पहले जहां लोग गैस के विकल्प के रूप में बिजली का उपयोग करते थे, अब वह भी महंगा पड़ने लगा है। छोटे-छोटे बढ़े हुए ये खर्च मिलकर हर महीने सैकड़ों रुपए का अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं।
AC और EV का खर्च भी बढ़ा
बिजली महंगी होने का असर सिर्फ बिल तक सीमित नहीं है, बल्कि लाइफस्टाइल पर भी साफ दिख रहा है। 1.5 टन इनवर्टर AC रोज 12 घंटे चलाने पर करीब ₹173 अतिरिक्त खर्च। EV कार को महीने में 10 बार चार्ज करने पर ₹128 अतिरिक्त खर्च। यानी सिर्फ AC और EV मिलाकर हर महीने करीब ₹300 का अतिरिक्त भार बढ़ गया है।
नाश्ता और बाहर खाना भी महंगा
खाद्य तेल और कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल, रेस्टोरेंट और ठेलों पर भी असर पड़ा है। थाली के दाम ₹15 से ₹30 तक बढ़े। पोहा, समोसा और चाय ₹1 से ₹5 तक महंगे। कई छोटे कारोबारियों को गैस की कमी के कारण कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे लागत बढ़ने के साथ-साथ कई जगह मेन्यू में कटौती भी करनी पड़ी है।
आगे और बढ़ सकती है महंगाई
कच्चे माल की कमी के कारण पैकेजिंग उत्पाद 30% से 60% तक महंगे हो गए हैं। इसका असर दवाइयों, डेयरी उत्पादों और रोजमर्रा की वस्तुओं पर दिख रहा है।
दवाइयों की सप्लाई पर खतरा
यदि हालात नहीं सुधरे तो मई-जून में दवाइयों की कमी हो सकती है, खासकर सरकारी अस्पतालों में।
रियल एस्टेट भी प्रभावित
निर्माण सामग्री 20-30% तक महंगी हो चुकी है। वहीं, गाइडलाइन दरों में 20% वृद्धि से घर खरीदना और मुश्किल हो गया है।
आयात निर्भरता बढ़ा रही असर
खाड़ी देशों पर निर्भरता के कारण सप्लाई बाधित होने का सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ा है। हालांकि, फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता से थोड़ी राहत जरूर है।
राहत की उम्मीद कम, सावधानी जरूरी
कुल मिलाकर, अप्रैल में महंगाई ने मिडिल क्लास की कमर तोड़नी शुरू कर दी है। घरेलू बजट लगातार बढ़ रहा है और अगर वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में और दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में परिवारों को खर्चों में कटौती और बेहतर बजट प्लानिंग के जरिए ही इस बढ़ती महंगाई का सामना करना होगा।
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