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एलपीजी सप्लाई पर वैश्विक संकट का असर: जानिये कब तक सामान्य होंगे हालात; घरेलू उपभोक्ताओं के साथ ये होंगे प्रभावित

KHULASA FIRST

संवाददाता

15 अप्रैल 2026, 5:27 pm
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एलपीजी सप्लाई पर वैश्विक संकट का असर

खुलासा फर्स्ट, दिल्ली।
दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब घरेलू गैस सप्लाई पर भी साफ नजर आने लगा है। भारत में एलपीजी (LPG) की आपूर्ति मुख्य रूप से मध्य पूर्व पर निर्भर है, ऐसे में क्षेत्र में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एलपीजी सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में अब कुछ महीने नहीं, बल्कि कई साल लग सकते हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव से सप्लाई पर असर
मध्य पूर्व में जारी तनाव, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल और गैस की आपूर्ति पर असर पड़ा है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। इसके अलावा ईरान और इज़राइल के बीच तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिससे एलपीजी के परिवहन में बाधाएं बढ़ी हैं।

भारत की आयात पर निर्भरता
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60% आयात करता है। देश की बड़ी सप्लाई खाड़ी देशों यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान से आती है। ऐसे में वैश्विक हालात का सीधा असर भारत की गैस उपलब्धता और कीमतों पर पड़ रहा है।

सामान्य होने में 3–4 साल लगने की आशंका
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रभावित सप्लाई चेन को पूरी तरह सामान्य होने में कम से कम 3 से 4 साल या उससे अधिक समय लग सकता है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उत्पादन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ है या कुछ स्थायी नुकसान हुआ है।

सप्लाई में 40–50% तक कमी का अनुमान
विशेषज्ञ संस्थाओं की रिपोर्ट के मुताबिक, वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों के बावजूद एलपीजी सप्लाई में 40 से 50 प्रतिशत तक कमी बनी रह सकती है। इसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों और छोटे कारोबारों पर पड़ेगा।

सरकार के सामने चुनौती और रणनीति
स्थिति को संभालने के लिए सरकार कई विकल्पों पर काम कर रही है। इसमें अलग-अलग देशों से आयात बढ़ाना, सप्लाई रूट बदलना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और मांग को संतुलित करना शामिल है। सरकार का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

सीमित स्टोरेज भी चिंता का कारण
भारत में एलपीजी की सालाना मांग करीब 33 मिलियन टन है, लेकिन देश के पास सिर्फ लगभग 15 दिनों की खपत के बराबर ही स्टोरेज क्षमता है। ऐसे में सप्लाई में थोड़ी भी बाधा आने पर संकट गहराने की आशंका रहती है।

आम लोगों और कारोबार पर असर
एलपीजी महंगी होने से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार (MSME) प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ने की संभावना है।

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