गार्डन और सरकारी जमीन पर तान दिए अवैध बंगले: कनाड़िया रोड पर भूमाफिया की मनमानी; निगम की सख्ती के बाद कॉलोनियां अवैध घोषित
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के कनाड़िया रोड क्षेत्र में एक ऐसा बड़ा भू-घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र और आम जनता के विश्वास को झकझोरकर रख दिया। कनाड़िया रोड स्थित मानवता नगर और सर्वसंपन्न नगर कॉलोनियों में सक्रिय भूमाफिया के नेटवर्क ने सरकारी नियमों, नगर-ग्राम निवेश के दिशा-निर्देशों और एनजीटी के आदेशों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है।
इस अवैध कारनामे के मुख्य सूत्रधारों में कॉलोनाइजर सरस्वती गावड़े, संतोष गावड़े और कनाड़िया रोड के कुख्यात भूमाफिया रमेश जाट के नाम प्रमुख हैं। इन्होंने न केवल निजी प्लॉटों का खेल खेला, बल्कि उस भूमि को भी बेच डाला, जो दशकों से रहवासियों के लिए उद्यान के रूप में आरक्षित थी।
रमेश जाट ने एक अन्य बिल्डर के साथ मिलकर जिस तरह से इस कॉलोनी की जमीन बेची और जो रजिस्ट्रियां करवाईं, उसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया, जब नगर निगम की कॉलोनी सेल ने बारीकी से जांच शुरू की और पाया कि स्वीकृत ले-आउट से कहीं अधिक क्षेत्र में निर्माण कर रखे गए हैं।
निगम की रिपोर्ट के अनुसार इन कॉलोनियों में न तो स्कूल के लिए जगह छोड़ी गई और न ही उद्यान के लिए, बल्कि जहां आरक्षित जमीन होना चाहिए थी, वहां बिल्डरों ने निजी प्लॉट काटकर बेच दिए।
इस अनियमितता के आधार पर 8 जुलाई 2025 को नगर निगम ने मानवता नगर और सर्वसंपन्न नगर को आधिकारिक रूप से अवैध घोषित कर दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और सरस्वती गावड़े, संतोष गावड़े व रमेश जाट की तिकड़ी करोड़ों रुपए की काली कमाई कर अपनी तिजोरी भर चुकी थी।
टीएनसी व नक्शे के विपरीत हो गई रजिस्ट्री- इस पूरे प्रकरण का सबसे चिंताजनक पहलू रजिस्ट्रियों का खेल है। भूमाफिया ने प्रशासनिक नियमों को धता बताते हुए न केवल अवैध प्लॉट काटे, बल्कि उनकी नियम-विरुद्ध रजिस्ट्रियां भी करवा लीं।
रहवासियों और नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार जिन जमीनों पर उद्यान और अन्य सुविधाएं प्रस्तावित थीं, उन्हें निजी प्लॉट बताकर बेचा गया और उनकी रजिस्ट्री भी करा ली गई।
हैरानी की बात यह कि रजिस्ट्रार कार्यालय के रिकॉर्ड में टीएनसी और ले-आउट के नक्शे उपलब्ध होने के बावजूद इन अवैध भूखंडों की रजिस्ट्री हो गई। सूत्रों के अनुसार रमेश जाट और उसके सहयोगियों ने लोगों को यह विश्वास दिलाकर पैसा ऐंठ लिया कि सब कुछ वैध है।
अब स्थिति यह है कि इन कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वालों के पास रजिस्ट्री तो है, लेकिन उसका भौतिक और कानूनी अस्तित्व संदिग्ध है। 12 अगस्त 2025 को हुई एक ऐसी ही रजिस्ट्री (संख्या: आर-12082801178073) के माध्यम से प्लॉट नंबर 55-आर माधुरी पति अभिजित चौहान को बेच दिया गया, जबकि यह जमीन रिकॉर्ड में उद्यान के लिए आरक्षित है। यह प्लॉट न तो स्वीकृत ले-आउट में है और न ही नगर-ग्राम निवेश विभाग की प्रणाली में।
भूमाफियाओं की संपत्ति की हो जांच
पीड़ित अब सरकार से मांग कर रहे हैं कि सरस्वती गावड़े, संतोष गावड़े और रमेश जाट जैसे भूमाफियाओं की संपत्ति की जांच कर उनकी काली कमाई जब्त की जाए।
प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिन लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई से ये घर खरीदे हैं, उन्हें न्याय मिले और बिल्डरों की इस अवैध साजिश को जड़ से खत्म किया जाए।
नगर निगम को बिना किसी राजनीतिक दबाव के इन अवैध निर्माणों को हटाकर उद्यान की भूमि मुक्त करानी चाहिए।
नए सिरे से भूखंडों की रजिस्ट्री करवाने की तैयारी
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुख्यात बिल्डर रमेश जाट और अन्य भूमाफियाओं द्वारा अब नए सिरे से भूखंडों की रजिस्ट्री करवाने की तैयारी की जा रही है। इस प्रक्रिया में कथित तौर पर रजिस्ट्री कार्यालय के कुछ अधिकारियों के साथ साठ-गांठ और सौदेबाजी के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
यह अत्यंत चिंताजनक है कि पूर्व में भी मानवता नगर और सर्वसंपन्न नगर में गार्डन की आरक्षित भूमि पर नियम विरुद्ध चार रजिस्ट्रियां संपन्न की जा चुकी हैं।
जब नगर निगम और टीएनसी के रिकॉर्ड में यह भूमि उद्यान के रूप में आरक्षित है तो रजिस्ट्री कार्यालय द्वारा किस आधार पर ये सौदे किए जा रहे हैं, यह जांच का विषय है।
भूमाफिया न केवल नियमों को ताक पर रख रहे हैं, बल्कि अपनी प्रभावशाली पहुंच के बल पर आम खरीदारों को कानूनी संकट में धकेल रहे हैं। रहवासियों का आरोप है कि भूमाफिया के दबाव और भ्रष्टाचार के चलते इन अवैध रजिस्ट्रियों को रोकने वाला कोई नहीं है, जिससे स्पष्ट होता है कि इस पूरे कार्य में एक बड़ा प्रशासनिक गठजोड़ सक्रिय है।
हम शासन और सरकार का अहित करने वाले, भ्रष्ट और सौदेबाज तथाकथित रजिस्ट्रार अधिकारियों के नाम और उनसे संबंधित पुख्ता दस्तावेजों का खुलासा करेंगे।
उद्यान की जमीन पर अवैध कब्जा व बोरिंग
सर्वसंपन्न नगर के रहवासियों का दर्द तो और भी गहरा है। कॉलोनी के मुख्य बोर्ड के पास स्थित अहिल्या उद्यान, जिसे दशकों से बच्चे खेलकूद और बुजुर्ग योग के लिए उपयोग करते आ रहे थे, उसे भी भूमाफिया ने नहीं बख्शा।
20 अगस्त 2025 को अभिजित चौहान ने अपने लोगों के साथ मिलकर उद्यान की पुरानी फेंसिंग को तोड़ दिया। कब्जे की नीयत से अवैध रूप से बोर्ड लगाकर बोरिंग भी करवा दिया, ताकि इसे एक निजी प्लॉट की शक्ल दी जा सके।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह जमीन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के रिकॉर्ड में प्लॉट नंबर 72 के पश्चिम में उद्यान के रूप में दर्ज है। रहवासियों ने जोन-19 के भवन अधिकारी विशाल राठौर को शिकायत की, तो संबंधित बिल्डरों को नोटिस जारी कर 7 दिन के भीतर जवाब मांगा गया, लेकिन मामला सौदेबाजी की भेंट चढ़ गया।
इसके बाद निगम ने उसी विवादित भूमि पर बड़ा बोर्ड लगाकर इसे देवी अहिल्या उद्यान सर्वसंपन्न नगर घोषित कर दिया। बोर्ड पर वैधानिक चेतावनी भी लिखवाई गई कि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग की है और किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या कब्जा भारतीय दंड संहिता की धारा 441 सहित अन्य कानूनों के तहत दंडनीय अपराध है।
निगम के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उद्यान का रखरखाव सर्वसंपन्न नगर रहवासी संघ करेगा और किसी भी अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई तुरंत की जाएगी।
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