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फर्जी डिग्री से चल रहा था अवैध गर्भपात का खेल: कॉल रिकॉर्ड्स से होगा बड़ा खुलासा

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 मार्च 2026, 5:30 pm
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फर्जी डिग्री से चल रहा था अवैध गर्भपात का खेल

खुलासा फर्स्ट, इंदौर/महू।
महू में काली माता मंदिर के पीछे संचालित अवैध क्लिनिक मामले में मुख्य आरोपी अमीषा के खिलाफ पुलिस वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा ले रही है। खुद को डॉक्टर बताकर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली अमीषा की डिग्री और दावों की असलियत जानने के लिए तकनीकी टीम को अमीषा और एक अन्य संदिग्ध के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) हाथ लगे हैं।

इससे इस काले कारोबार के पीछे सक्रिय संपर्कों का बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है। पुलिस इन कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए उन चेहरों की पहचान में जुटी है, जो इस अवैध धंधे को पर्दे के पीछे संरक्षण दे रहे थे।

पुलिसिया पूछताछ में अमीषा ने इंदौर के एक निजी कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई का दावा किया, लेकिन जब मूल दस्तावेज मांगे गए तो वह केवल एक संदिग्ध मार्कशीट की फोटोकॉपी ही दिखा सकी। डॉक्टर की सफेद वर्दी की आड़ में चल रहे इस फर्जीवाड़े की पुष्टि के लिए एएसपी रूपेश द्विवेदी ने संबंधित यूनिवर्सिटी से पत्राचार की बात कही है, ताकि मार्कशीट की सत्यता की जांच की जा सके।

पुलिस ने 26 फरवरी को पूछताछ के दौरान उन संदिग्ध कार सवारों की जानकारी भी जुटाई है, जो शातिर तरीके से भाग निकले थे। पुलिस की उनसे मोबाइल पर बात हुई है, जिसमें कार सवार ने खुद को फार्मासिस्ट बताते हुए पत्नी के इलाज के लिए वहां आने का जिक्र किया है। पुलिस इस दलील की गहराई से पुष्टि कर रही है, क्योंकि कहानी गले नहीं उतर रही है।

नाबालिग की तलाश: मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है एक नाबालिग के अवैध गर्भपात की बात सामने आई है, लेकिन मौके से भाग जाने के कारण पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। हैरानी है 12 दिन बाद भी पुलिस न आरोपियों तक पहुंच सकी है न पुलिस लिखी संदिग्ध कार को जब्त किया जा सका है। पुलिस अब तक उन चेहरों की महज कहानियां सुन रही है, जो जांच के दौरान सामने आए हैं, लेकिन किसी को नामजद कर गिरफ्तार नहीं किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम क्लिनिक से बरामद प्रतिबंधित दवाओं, सर्जिकल उपकरणों और उन संदिग्ध केमिकलों की जांच कर रही है जिनका उपयोग भ्रूण की स्थिति जांचने वाली मशीनों में किया जाता है। इसकी पुष्टि होते ही साफ हो जाएगा यहां बड़े पैमाने पर अवैध प्रक्रिया की जा रही थीं। क्लिनिक से सोनोग्राफी रिपोर्ट मिलने पर शहर के कुछ सोनोग्राफी सेंटर भी जांच के दायरे में हैं।

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