‘दीये जलाने से फुर्सत मिले तो जमीनी हालत भी देखिए’: इस नेता ने प्रदेश सरकार पर साधा निशाना
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली/भोपाल।
मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब सियासी और न्यायिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है।
बैहर-बिरसा क्षेत्र के आदिवासी बहुल इलाकों में पिछले कुछ महीनों के दौरान 30 से ज्यादा बच्चों की मौत की रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि बीमारी, कुपोषण, साफ पानी की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमजोर स्थिति के बीच बच्चों की जान जा रही है। उन्होंने सरकार से जमीनी स्थिति देखने और तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
हालांकि, बच्चों की मौतों के सटीक कारणों को लेकर जांच अभी जारी है। रिपोर्टों में मलेरिया, खसरा, निमोनिया, कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख हुआ है।
‘दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिले तो जमीनी हालत देखिए’
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि यदि सरकार को उत्सव और कार्यक्रमों से समय मिले तो उसे प्रदेश की जमीनी स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण और कथित मिलावटी दवाओं जैसे मुद्दों को उठाते हुए कहा कि इन समस्याओं का असर आम लोगों और बच्चों पर पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्हें लगातार छात्रों, युवाओं और आम लोगों से फीडबैक मिल रहा है।
बालाघाट में क्या है पूरा मामला?
बालाघाट के बैहर-बिरसा क्षेत्र के दूरदराज आदिवासी गांवों में बच्चों के बीमार होने और मौतों का मामला पिछले कुछ समय से सामने आ रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित इलाकों में कई बच्चे बुखार, रैश, सांस संबंधी समस्याओं और अन्य बीमारियों से जूझे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं और बड़ी संख्या में बच्चों एवं अन्य मरीजों की जांच तथा उपचार किया गया है। कुछ रिपोर्टों में गंभीर कुपोषण की स्थिति भी सामने आने की बात कही गई है।
सबसे अहम बात यह है कि 30 से अधिक मौतों के पीछे एक ही कारण होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। विशेषज्ञों और प्रशासन की ओर से अलग-अलग स्वास्थ्य कारणों की जांच की जा रही है।
हाईकोर्ट ने भी सरकार से मांगा जवाब
मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। 30 से अधिक बच्चों की मौत को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और बालाघाट कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
इससे पहले अदालत ने याचिका में सामने रखी गई जानकारी को लेकर याचिकाकर्ता को जमीनी स्थिति की पड़ताल करने और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए थे। यानी अदालत भी इस पूरे मामले में उपलब्ध तथ्यों और वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करना चाहती है।
‘मैं इंदौर आ रहा हूं, युवाओं से फीडबैक ले रहा हूं’
अपनी पोस्ट में राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे इंदौर आ रहे हैं और प्रदेश के छात्रों, युवाओं तथा आम लोगों से लगातार फीडबैक ले रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर कई चिंताजनक बातें सामने आ रही हैं।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोप भी लगाए हैं। ये राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीतिक टिप्पणियां हैं, जिन पर राज्य सरकार का पक्ष अलग हो सकता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
बालाघाट मामले ने एक बार फिर दूरदराज आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण और पेयजल की उपलब्धता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और उपचार अभियान चलाया जा रहा है, वहीं बच्चों की मौतों के कारणों को लेकर जांच जारी है।
अब निगाहें दो स्तरों पर हैं, एक तरफ सरकार और स्वास्थ्य विभाग की जांच से मौतों के वास्तविक कारणों की तस्वीर साफ होने पर और दूसरी तरफ हाईकोर्ट में सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर।
फिलहाल बालाघाट की यह घटना सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, पेयजल और समय पर इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
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