अगस्त में छोड़ने का ऐलान: सितंबर में वापसी; अब 2032 तक संभालेंगे इस समूह की कमान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, मुंबई।
टाटा समूह की कमान को लेकर पिछले कुछ महीनों से चल रही अनिश्चितता फिलहाल खत्म होती नजर आ रही है।
Tata Sons के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन के लिए नए पांच साल के कार्यकाल को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही वे अब 2032 तक टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने रह सकते हैं।
यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि महज एक महीने पहले, 12 अगस्त 2026 को चंद्रशेखरन ने घोषणा की थी कि वे फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे।
उन्होंने उस समय कहा था कि उनके पांच साल के विस्तार के प्रस्ताव को बोर्ड में सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिल सका था।
अगस्त में अचानक क्यों लिया था पीछे हटने का फैसला?
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होना था। अगस्त में अपने फैसले की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा था कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके अगले पांच साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी।
उनके मुताबिक यह प्रस्ताव Tata Sons की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड के सामने भी रखा गया था, लेकिन 24 फरवरी 2026 की बोर्ड बैठक में एक सदस्य के समर्थन नहीं करने के कारण प्रस्ताव को सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिल सका।
करीब छह महीने तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं होने के बाद चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को कहा था कि वे फरवरी 2027 के बाद अपने कार्यकाल के विस्तार के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे। Tata Trusts ने भी इसके बाद नए चेयरमैन के चयन के लिए प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी।
अब बोर्ड ने फिर बढ़ाया कार्यकाल
17 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार Tata Sons बोर्ड ने अब चंद्रशेखरन को एक और पांच साल का कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी है। यानी उनका नया कार्यकाल 2032 तक जारी रह सकता है।
Reuters ने मामले से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया कि यह फैसला अगस्त में चंद्रशेखरन द्वारा दोबारा नियुक्ति की पेशकश न करने के फैसले के बाद आया है। उनके रुख में बदलाव के कारणों को आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है। Tata Sons ने इस रिपोर्ट पर तत्काल सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की थी।
Tata Trusts के पास 66% हिस्सेदारी
Tata Sons में Tata Trusts की हिस्सेदारी करीब 66% है। यही वजह है कि चेयरमैन की नियुक्ति और समूह की भविष्य की दिशा में ट्रस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण है।
अगस्त में चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति से पीछे हटने के बाद Tata Trusts ने उत्तराधिकारी तलाशने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी।
उस समय रिपोर्टों में समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व और रणनीतिक मुद्दों को लेकर मतभेदों की बात सामने आई थी।
अब नए बोर्ड फैसले के बाद नेतृत्व परिवर्तन की वह प्रक्रिया किस दिशा में जाती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
Tata Sons की लिस्टिंग का मुद्दा भी अहम
चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल का फैसला ऐसे समय हुआ है जब Tata Sons की संभावित स्टॉक मार्केट लिस्टिंग भी चर्चा में है।
हाल ही में RBI ने Tata Sons को अपने मौजूदा नियामकीय वर्गीकरण से बाहर करने की मांग स्वीकार नहीं की।
इसके बाद कंपनी के लिए भविष्य में सार्वजनिक लिस्टिंग का रास्ता खुला रहने की स्थिति बनी है। Tata Sons के पास मार्च 2025 तक करीब ₹1.75 लाख करोड़ की standalone assets थीं और RBI के नियमों के तहत कंपनी पर लिस्टिंग से जुड़े प्रावधान लागू हो सकते हैं।
ऐसे समय में चेयरमैन के कार्यकाल को लेकर स्पष्टता समूह की आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
2017 में संभाली थी कमान
एन. चंद्रशेखरन जनवरी 2017 में Tata Sons के चेयरमैन बने थे। इससे पहले वे Tata Consultancy Services (TCS) के CEO और MD रह चुके थे।
उन्होंने टाटा समूह में अपना करियर 1987 में TCS से शुरू किया था और लगभग चार दशक तक समूह से जुड़े रहे।
चेयरमैन के रूप में उनके कार्यकाल में समूह ने एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, डिजिटल और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया।
चंद्रशेखरन के दौर में बदला टाटा समूह का कारोबार
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने कई बड़े निवेश और विस्तार किए। इनमें Air India का अधिग्रहण, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में प्रवेश, बैटरी और नई ऊर्जा से जुड़े निवेश शामिल हैं।
आपकी ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2020 में समूह का रेवेन्यू करीब ₹7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसी अवधि में समूह का मुनाफा करीब 32 हजार करोड़ से बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपए बताया गया है।
लिस्टेड टाटा कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण भी 2020 के करीब ₹9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में करीब 24.39 लाख करोड़ रुपए बताया गया है।
इन आंकड़ों का आधार और परिभाषा अलग-अलग कंपनियों/समूह की रिपोर्टिंग पर निर्भर कर सकती है, इसलिए इन्हें Tata Sons की standalone financial performance से अलग समझना जरूरी है।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ा अपडेट यही है कि Tata Sons बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन के पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी दे दी है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना था।
अगले चरण में संबंधित कॉर्पोरेट और शेयरहोल्डर प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही उनकी 2032 तक की नियुक्ति की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
अगस्त में इस्तीफे की घोषणा से लेकर सितंबर में नए कार्यकाल की मंजूरी तक महज एक महीने में टाटा समूह की नेतृत्व कहानी ने बड़ा मोड़ लिया है।
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