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आईडीए चेयरमैन की दौड़ अंतिम चरण में: पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री के अलग-अलग दांव; फैसला मुख्यमंत्री पर टिका

KHULASA FIRST

संवाददाता

05 अप्रैल 2026, 2:21 pm
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आईडीए चेयरमैन की दौड़ अंतिम चरण में

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के चेयरमैन पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कैबिनेट मंत्री दर्जे वाले इस अहम पद के लिए दावेदारों की दौड़ अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अलग-अलग खेमों से नाम सामने आने के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के फैसले पर टिकी हैं।

ताकतवर पद, इसलिए तेज लॉबिंग
आईडीए प्रदेश के सबसे समृद्ध प्राधिकरणों में गिना जाता है, ऐसे में इसके चेयरमैन पद को लेकर लंबे समय से लॉबिंग चल रही है। अब जब नियुक्ति का समय नजदीक है, तो पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री और संगठन-तीनों स्तर से अलग-अलग नाम आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

पूर्व सीएम गुट से सुदर्शन गुप्ता सबसे आगे
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरा है। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। इंदौर के कई विधायक मालिनी गौड़, महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा और मनोज पटेल—भी उनके पक्ष में माने जा रहे हैं। हाल ही में शिवराज सिंह चौहान और सीएम मोहन यादव की मुलाकात के बाद इस नाम को और बल मिलने की चर्चा है।

संगठन से मुकेश राजावत का नाम
दूसरी ओर संगठन स्तर से मुकेश राजावत का नाम भी सामने आया है। नगराध्यक्ष पद से चूकने के बाद अब उन्हें आईडीए चेयरमैन के लिए विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी संगठन में उनके लंबे अनुभव को इस दावेदारी की वजह माना जा रहा है।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की भूमिका अहम
आईडीए नगरीय प्रशासन विभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की राय को निर्णायक माना जा रहा है। उनके करीबी हरिनारायण यादव का नाम भी चर्चा में है, जो पहले आईडीए बोर्ड से जुड़े रह चुके हैं। इसके अलावा कमलेश शर्मा का नाम भी मंत्री गुट से उभरकर सामने आया है, जिन्हें संगठन और संघ के कुछ वर्गों का समर्थन बताया जा रहा है।

जातीय संतुलन भी बन सकता है फैक्टर
सियासी गलियारों में यह चर्चा भी है कि यदि महापौर और नगराध्यक्ष पहले से ही ब्राह्मण वर्ग से हैं, तो क्या तीसरा बड़ा पद भी उसी वर्ग को दिया जाएगा। ऐसे में जातीय संतुलन भी इस नियुक्ति में अहम भूमिका निभा सकता है।

सरप्राइज नाम की भी संभावना
इन तमाम दावेदारों के बीच किसी नए या चौंकाने वाले चेहरे की एंट्री से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। भाजपा पहले भी इस तरह के फैसले लेकर सभी को चौंकाती रही है। ऐसे में अंतिम फैसला पूरी तरह मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निर्भर है, जो न केवल चेयरमैन का नाम तय करेगा, बल्कि इंदौर की सियासत में शक्ति संतुलन का संकेत भी देगा।


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