सेवा नहीं ‘लूट का सेंटर’ बनते जा रहे अस्पताल: अस्पतालों में दवाइयों का खेल
KHULASA FIRST
संवाददाता
मरीजों की जेब पर डाका, जिंदगी से होते खिलवाड़ पर सिस्टम की खामोशी पर उठ रहे सवाल
डॉक्टर और फार्मासिस्ट की मिलीभगत से जेनेरिक दवा देकर एथिकल का पैसा वसूला जा रहा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिस अस्पताल को कभी ‘भगवान का घर’ कहा जाता था, आज वही कई मामलों में ‘कमाई का अड्डा’ बनते नजर आ रहे हैं। एक अस्वस्थ व्यक्ति को उसका परिवार जिंदगी की आस लेकर अस्पताल पहुंचाता है, लेकिन यहां पूरा ध्यान इलाज पर नहीं, बल्कि बिल पर दिया जाता है। मरीज की नाजुक हालत, परिजन की मजबूरी और सिस्टम की ढिलाई, इन तीनों के ऐसे खतरनाक गठजोड़ का खुलासा हुआ है, जिसमें इंसानियत कहीं खोती नजर आ रही है। हर दिन कोई न कोई परिवार इस खेल का शिकार बन रहा है।
मामला प्रमिला अस्पताल में भर्ती 80 वर्षीय महिला नंदकुंवर शर्मा का है, जिनके परिजन ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक अस्पताल में जेनेरिक (सस्ती) दवाइयां दी जा रही हैं, लेकिन बिल एथिकल (ब्रांडेड) दवाओं का थमाया जा रहा है। 200 रुपए का इंजेक्शन 1200 रुपए में बेचा गया। दवाइयों के नाम और बिल में भारी अंतर है। इसे लेकर अस्पताल में घंटों हंगामा चलता रहा, लेकिन कोई जिम्मेदार सामने नहीं आया।
पंजीकृत फार्मासिस्ट नदारद, अनट्रेंड स्टाफ चला रहा मेडिकल- महिला के परिजन का कहना है मेडिकल स्टोर पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट मौजूद ही नहीं था। खुलेआम बदतमीजी कर रहे कर्मचारियों ने तो यहां तक कह दिया कि कर लो जो करना है, करोड़ों की पगड़ी दी है। यह स्थिति ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का सीधा उल्लंघन है।
सीएमएचओ और प्रशासन पर उठे सवाल
अस्पताल में इलाज के नाम पर चल रहे लूट के इस खेल को लेकर सीएमएचओ की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। मेडिकल स्टोर और अस्पताल की जांच तक नहीं होती। मरीजों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कलेक्टर व सीएमएचओ से कार्रवाई की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों का आक्रोश
पार्षद भरत रघुवंशी ने कहा मेडिकल स्टोर पर बड़ा खेल चल रहा है। जेनेरिक दवाइयां देकर ब्रांडेड का पैसा वसूला जा रहा। कलेक्टर और सीएमएचओ से शिकायत की जाएगी। जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री तक मामला ले जाया जाएगा।
दस्तावेजों में पंजीकृत फार्मासिस्ट अनुपस्थित!
5 फरवरी 2026 को जारी दस्तावेजों के अनुसार मोहम्मद अनस अंसारी (बी-फार्मा) को प्रमिला फार्मेसी के लिए पंजीकृत फार्मासिस्ट के रूप में अनुमोदन दिया गया। लाइसेंस वैधता 2027 तक है, लेकिन इसके बावजूद मौके पर उनकी अनुपस्थिति गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करती है।
8 दिन से भर्ती, हालत में कोई सुधार नहीं
पीड़ित परिजन के मुताबिक बुजुर्ग महिला उम्र के अनुसार इलाज के लिए 8 दिन से अस्पताल में भर्ती है, लेकिन अब तक कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। शंका होने पर उन्होंने जांच की तो दवाइयों के नाम पर हो रहे इस खेल का खुलासा हुआ।
जवाब देने से बचते रहे डॉक्टर
मामले में डॉ. भरत जैन से जवाब मांगने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। और तो और अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई प्रतिनिधि घंटों सामने नहीं आया। बाद में डॉ. जैन ने कहा कि वे अधिकृत बयान नहीं देना चाहते। परिवार का मामला था।
‘महापौर से जुड़े परिवार’ के साथ यह हाल…
यह मामला और भी गंभीर इसलिए हो जाता है, क्योंकि पीड़ित महिला शहर के प्रथम नागरिक (महापौर) के परिवार से जुड़ी है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम मरीजों व उनके परिजन के साथ कैसी लूट होती होगी।
जेनेरिक व एथिकल दवाओं की कीमतों में अंतर
जेनेरिक दवाएं 30 से 80% तक सस्ती होती हैं, जबकि एथिकल (ब्रांडेड) दवाएं मार्केटिंग के कारण महंगी होती हैं। हालांकि दोनों की प्रभावशीलता और गुणवत्ता समान ही रहती है। इसी अंतर के चलते आमतौर पर अस्पतालों में सस्ती दवा देकर महंगी का बिल थमाया जाता है, ताकि मोटी कमाई की जा सके।
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