हनी ट्रैप पार्ट-2: पुलिस चालान में यह मास्टरमाइंड; इसे बताया सहयोगी, रसूखदारों के वीडियो की भी जांच, 600 पन्नों में सामने आई कहानी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश में 2019 के चर्चित हनी ट्रैप मामले के बाद अब हनी ट्रैप पार्ट-2 की जांच में कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। 18 मई 2026 को इंदौर में दर्ज मामले में पुलिस ने करीब 600 पन्नों का चालान पेश किया है।
चालान में पुलिस ने श्वेता विजय जैन को गिरोह की मास्टरमाइंड और सरगना बताया है, जबकि सागर की रेशू चौधरी को उसकी सहयोगी बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह पर लोगों के फोटो-वीडियो हासिल कर उन्हें कथित तौर पर ब्लैकमेल करने और अवैध वसूली की कोशिश का आरोप है। मामले में शराब और प्रॉपर्टी कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद कार्रवाई शुरू हुई थी।
ऐसे खुला हनी ट्रैप पार्ट-2 का मामला
चिंटू ठाकुर ने 18 मई को इंदौर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। उनके आरोप के मुताबिक, 28 अप्रैल की रात करीब 11.15 बजे अलका दीक्षित, उनके बेटे जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और अन्य लोगों ने उन्हें सुपर कॉरिडोर पर रोका था।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने प्रॉपर्टी कारोबार में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने या एक करोड़ रुपये देने का दबाव बनाया।
ऐसा नहीं करने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। आरोपियों ने उनके फोटो और वीडियो होने की बात भी कही थी।
शिकायत के बाद पुलिस ने अलका दीक्षित, जयदीप और लाखन को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उज्जैन के पत्रकार और लाखन के साथी जितेंद्र पुरोहित तथा पुलिस आरक्षक विनोद शर्मा के नाम भी सामने आए। दोनों को बाद में गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में सामने आया श्वेता जैन का नाम
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती शिकायत में श्वेता विजय जैन का नाम नहीं था। बाद में चिंटू ठाकुर के बयान में श्वेता का नाम सामने आया।
ठाकुर ने पुलिस को बताया कि घटना के दौरान आरोपियों ने श्वेता का भी नाम लिया था और आवेदन में उसका नाम लिखना छूट गया था।
इसके बाद पुलिस ने 19 मई की रात भोपाल से श्वेता जैन को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान पुलिस के अनुसार, सागर निवासी रेशू चौधरी का नाम सामने आया। रेशू को 21 मई को इंदौर के शिप्रा पुल के पास से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार श्वेता ने तैयार किया था गिरोह
चालान में पुलिस ने श्वेता जैन को इस मामले की मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताया है। पुलिस के मुताबिक, श्वेता पहले भी हनी ट्रैप से जुड़े मामले में आरोपी रह चुकी है और जेल से बाहर आने के बाद उसने नए लोगों को अपने साथ जोड़कर कथित तौर पर दोबारा इसी तरह का गिरोह तैयार किया।
पुलिस का दावा है कि श्वेता ने फोटो और वीडियो तैयार करने तथा उन्हें एडिट करने में कथित तौर पर दक्ष रेशू चौधरी को अपने साथ जोड़ा था। वहीं अलका दीक्षित की श्वेता से जेल में पहचान होने और बाद में दोनों के संपर्क में रहने की बात भी जांच में सामने आई है।
चिंटू ठाकुर को फंसाने की बनाई थी कथित योजना
पुलिस के चालान के अनुसार, श्वेता और अलका की मुलाकात 2019 में जिला जेल इंदौर में हुई थी। श्वेता के जेल से बाहर आने के बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा। इसी दौरान लखन चौधरी की भी श्वेता से पहचान कराई गई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने चिंटू ठाकुर को प्रॉपर्टी कारोबार में हिस्सेदारी के लिए दबाव में लेने की योजना बनाई थी। कथित योजना के तहत रेशू की मदद से फोटो और वीडियो तैयार कर ठाकुर पर दबाव बनाने की बात सामने आई है।
रेशू के पास से फोटो बरामद होने का दावा
पुलिस के अनुसार, श्वेता ने पूछताछ में रेशू को इस काम में शामिल करने की बात कही है। रेशू ने भी पुलिस को दिए बयान में चिंटू ठाकुर की फोटो एडिट करने की बात स्वीकार करने का दावा किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, ठाकुर की एक फोटो रेशू के सागर स्थित घर से बरामद हुई है। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस तरह की सामग्री का इस्तेमाल पहले किसी अन्य व्यक्ति को ब्लैकमेल करने के लिए किया गया था या नहीं।
9 मोबाइल और 2 पेनड्राइव की फोरेंसिक जांच
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 मोबाइल फोन, 2 पेनड्राइव और स्पाई कैमरा समेत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इन्हें जून में फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट का इंतजार है। फोरेंसिक जांच में मुख्य रूप से यह पता लगाया जा रहा है कि उपकरणों में मॉर्फ्ड या डीपफेक फोटो-वीडियो मौजूद हैं या नहीं।
अश्लील सामग्री तैयार या एडिट करने वाले ऐप अथवा सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ या नहीं। फोटो-वीडियो किसी अन्य व्यक्ति को भेजे या शेयर किए गए या नहीं।
ब्लैकमेलिंग अथवा वसूली से जुड़ी चैट, ऑडियो या वीडियो मौजूद हैं या नहीं। इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया या नहीं। फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद जांच की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
रेशू की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का भी जिक्र
पुलिस के चालान में रेशू चौधरी के पारिवारिक सदस्यों के बयानों का भी उल्लेख है। उसके भाई के अनुसार, रेशू प्रॉपर्टी और स्टेशनरी कारोबार से जुड़ी थी।
उसने मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जाने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। बाद में उसने ग्रेजुएशन और एमएससी की पढ़ाई की तथा कोचिंग भी संचालित की।
बयान के मुताबिक, कोरोना काल में रेशू सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी और इसके बाद राजनीति में सक्रिय हुई। वह स्थानीय और प्रदेश स्तर के नेताओं के संपर्क में थी और सागर की नरयावली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा रखती थी। हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए अन्य आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।
श्वेता के राजनीतिक संपर्कों का भी उल्लेख
श्वेता जैन के संबंध में पुलिस ने उसके परिजनों के बयान भी दर्ज किए हैं। इनमें उसके NGO चलाने और राजनीति में सक्रिय रहने का उल्लेख है।
पुलिस के अनुसार, श्वेता का सागर से लेकर भोपाल और दिल्ली तक आना-जाना था और वह कई राजनीतिक लोगों के संपर्क में रही थी। इन बयानों में लगाए गए आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
कॉल डिटेल से मुलाकातों के सुराग
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल की जांच में श्वेता, रेशू और अलका के बीच लगातार संपर्क की जानकारी मिली है। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर इनकी मुलाकातों का भी उल्लेख किया है।
जांच के अनुसार, श्वेता और रेशू दिल्ली के जंतर-मंतर, नेशनल गैलरी और रेलवे स्टेशन सहित भोपाल के कुछ स्थानों पर मिली थीं। श्वेता और अलका के इंदौर जिला कोर्ट में मिलने की जानकारी भी पुलिस ने चालान में शामिल की है।
संगठित अपराध की धाराएं भी जोड़ी गईं
पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद मामले में आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध से जुड़ी धाराएं 111(2)(ख) और 111(3) भी जोड़ी हैं। जिला अदालत से कुछ आरोपियों की जमानत खारिज होने के बाद कुछ आरोपी हाईकोर्ट पहुंचे हैं।
पुलिस ने चालान पेश कर दिया है। जांच के दौरान नए साक्ष्य सामने आने पर पूरक चालान भी पेश किया जा सकता है। अब न्यायालय में आरोप तय होने की प्रक्रिया के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी जांच की अगली कड़ी
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम कड़ी जब्त मोबाइल, पेनड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक रिपोर्ट मानी जा रही है।
रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने में मदद मिल सकती है कि कथित फोटो-वीडियो कैसे तैयार किए गए, उनका इस्तेमाल किस तरह हुआ और क्या इनके जरिए अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया था।
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