पूर्व आईएएस की दबंगई: नियम ताक पर रख खड़ी की अवैध इमारत; निगम की नाक के नीचे कानून का मखौल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के पॉश इलाके बसंत विहार कॉलोनी में नियमों का उल्लंघन कर किए जा रहे निर्माण कार्य ने प्रशासनिक महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल के पीछे स्थित प्लॉट नंबर सी-93, जो पूर्व आईएएस एवं इंदौर के पूर्व कमिश्नर एसबी सिंह का है, वहां चल रहा निर्माण कार्य अब विवादों के घेरे में है।
आरोप है कि एक जिम्मेदार पद पर रहे अधिकारी ने शातिर तरीके से नगर निगम को गुमराह कर न केवल स्वीकृत मापदंडों को बदला, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और पड़ोसियों के जीवन को भी खतरे में डाल दिया है।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस भूखंड के लिए पूर्व में पार्किंग प्लस 4 मंजिल यानी 12 मीटर ऊंचे निर्माण की अनुमति ली गई थी, लेकिन धरातल पर जो हो रहा है वह स्वीकृत नक्शों से पूरी तरह उलट है।
भूखंड के दक्षिण में 12 मीटर और पश्चिम में 7.50 मीटर चौड़ी सड़क स्थित है, जिस पर सार्वजनिक आवागमन बाधित हो रहा है। शिकायत है कि सिंह ने मिलीभगत से 15 मीटर के भूखंड को गलत तरीके से 15.24 मीटर दर्शाकर अनुमति हासिल कर ली।
इस हेरफेर का सीधा असर सार्वजनिक मार्ग पर पड़ा है, जिसकी चौड़ाई घटकर अब मात्र 7.3 मीटर रह गई है। नगर निगम के नियमों का उल्लंघन कर इस प्रकार सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण करना सीधे तौर पर प्रशासनिक पद के दुरुपयोग का खुलासा करता है।
बिना सुरक्षा मानक कर रहे प्री-फेब स्ट्रक्चर का उपयोग
सबसे चिंताजनक पहलू इस निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री और तकनीक है। बिना किसी सुरक्षा मानक के प्री-फेब स्ट्रक्चर का उपयोग कर किया जा रहा यह निर्माण न केवल अवैध है, बल्कि एक बड़ा सुरक्षा जोखिम भी है।
यदि भविष्य में यहां कोई अनहोनी या आग लगने की घटना होती है तो यह असुरक्षित ढांचा आसपास के रिहायशी मकानों के लिए काल बन सकता है। एक पूर्व आईएएस अधिकारी द्वारा कानून की धज्जियां उड़ाते हुए इस प्रकार का निर्माण करना न केवल निगम प्रशासन की लचर व्यवस्था को सामने लाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि रसूखदारों के लिए नियम-कायदे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
नोटिसों का भी नहीं हुआ कोई असर
निर्माण की शुरुआत से ही यह कार्य विवादों में रहा है। खुदाई के दौरान भूखंड को 18 फीट की गहराई तक खोद दिया गया, जिससे आसपास की सड़कों की मिट्टी धंस गई। इस लापरवाही के कारण पड़ोसी संजय श्रीवास्तव (सी-93/सी-94) का मकान गिरने के कगार पर पहुंच गया था।
उस दौरान निगम आयुक्त को लिखित शिकायत दी गई थी और बिल्डिंग अधिकारी द्वारा नोटिस भी जारी किए गए थे। लेकिन अफसोस कि इन नोटिसों का कोई असर नहीं हुआ और निर्माण कार्य रुकने के बजाय और तेजी से आगे बढ़ता गया।
बेसमेंट भरने और प्लिंथ लेवल बनाने के बाद अब पूरे भूखंड पर सभी सेटबैक एमओएस नियमों को दरकिनार करते हुए ग्राउंड फ्लोर सहित चार मंजिला इमारत खड़ी की जा रही है।
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