चीनी मांझे पर हाई कोर्ट सख्त, कहा-तस्वीरें देख दिल खून के आंसू रोता है
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चीनी मांझे से मौतों और हादसों पर हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने राज्य सरकार पर नाराजगी जताई है। शुक्रवार की सुनवाई में अदालत ने कहा मीडिया में कार्रवाई की खबरें आ रही हैं, लेकिन जमीनी हालात नहीं बदले। टिप्पणी की चीनी मांझे से घायल और मरने वालों की तस्वीरें देखकर दिल खून के आंसू रोता है।
यह टिप्पणी जस्टिस विजयकुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने चीनी मांझे के अवैध निर्माण, बिक्री और उपयोग से जुड़ी स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की। याचिका मकर संक्रांति के दौरान हुए हादसों और गंभीर चोटों की रिपोर्ट के आधार पर दायर की गई है।
कोर्ट ने कहा प्रतिबंध के बावजूद लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, जो प्रशासन की विफलता दर्शाती हैं। जजों ने कहा नॉयलोन मांझे से उनके स्टाफ और स्टेनो तक घायल हो चुके हैं।
आरोपी नाबालिग तो अभिभावक होंगे जिम्मेदार: अदालत ने साफ किया चीनी मांझा बेचने या इस्तेमाल करने पर बीएनएस 2023 की धारा 106(1) के तहत केस दर्ज हो सकता है। नाबालिग के अभिभावक भी जिम्मेदार माने जाएंगे।
समस्या इंदौर संभाग में ज्यादा गंभीर है। गुजरात का उदाहरण देते हुए बेंच ने कहा वहां पतंग उत्सव होते हैं, लेकिन ऐसे हादसे नहीं होते। सरकार ने बताया गुजरात ने 2018 में ही चीनी मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
जागरूकता काफी नहीं: सीनियर एडवोकेट विवेक शरण ने पीड़ितों को मुआवजा देने, नॉयलोन मांझे को खतरनाक प्लास्टिक कचरा घोषित करने और सख्त कार्रवाई के सुझाव दिए। कोर्ट ने कहा जागरूकता अभियान काफी नहीं है।
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