प्रशासनिक नियुक्तियों पर हाईकोर्ट का अहम फैसला: वरिष्ठता को मिलेगी प्राथमिकता; पदनाम नहीं होगा आधार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर इंदौर हाईकोर्ट ने बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे पदों पर नियुक्ति का आधार केवल वरिष्ठता होगा, न कि पदनाम (डेजिग्नेशन)। इस फैसले के साथ ही उच्च शिक्षा विभाग के आदेश को भी संशोधित कर दिया गया है।
प्रभारी प्राचार्य विवाद में आया फैसला
मामला शासकीय माता जीजाबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय (ओल्ड जीडीसी) में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति से जुड़ा है। यहां नियमित प्राचार्य के सेवानिवृत्त होने के बाद वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए डॉ. मंजू शर्मा की जगह डॉ. अशोक सचदेवा को प्रभारी प्राचार्य का कार्यभार सौंप दिया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए डॉ. मंजू शर्मा ने हाईकोर्ट का रुख किया।
वरिष्ठता बनाम पदनाम पर स्पष्ट रुख
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकलपीठ ने कहा कि प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति के लिए पदनाम को वरिष्ठता का आधार नहीं माना जा सकता। नियुक्ति प्रक्रिया में वास्तविक सेवा वरिष्ठता को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि नियमित प्राचार्य की नियुक्ति होने तक डॉ. मंजू शर्मा को प्रभारी प्राचार्य का कार्यभार सौंपा जाए।
नियुक्ति क्रम को लेकर विवाद
याचिकाकर्ता डॉ. मंजू शर्मा ने कोर्ट को बताया कि उनकी नियुक्ति 12 सितंबर 1983 को सहायक प्राध्यापक (गृह विज्ञान) के रूप में हुई थी और 8 दिसंबर 2006 को उन्हें प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया। वहीं, डॉ. अशोक सचदेवा की नियुक्ति 15 नवंबर 1983 को हुई थी और वे 30 अक्टूबर 1989 को नियमित हुए। उन्हें 13 जून 2018 को प्रोफेसर का पदनाम दिया गया था।
यूजीसी नियमों पर भी हुई बहस
डॉ. सचदेवा की ओर से दलील दी गई कि प्रोफेसर का पदनाम ही वास्तविक पदोन्नति है और यूजीसी के 2010 के नियमों में नियुक्ति, पदोन्नति और पदनाम को समान माना गया है। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्धारण में सेवा की वरिष्ठता ही निर्णायक होगी।
फैसले के व्यापक मायने
हाईकोर्ट का यह निर्णय प्रदेश में प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों के लिए एक अहम नजीर माना जा रहा है। इससे भविष्य में नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और वरिष्ठ कर्मचारियों को प्राथमिकता सुनिश्चित होगी।
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