निगम के नोटिस पर हाईकोर्ट नाराज: शुल्क जमा कराने के 3 दिन बाद बिल्डिंग रोकने का आदेश; भवन अधिकारी तलब
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम के बिल्डिंग ऑफिसर और बिल्डिंग इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। अब ऐसा ही एक मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां निगम की कार्रवाई पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने मामले में भवन अधिकारी पल्लवी पाल को तलब कर उनसे जवाब मांगा है।
80 लाख रुपए शुल्क जमा किया, तीन दिन बाद नोटिस
मामला भंडारी ब्रिज के पास डीआरपी लाइन क्षेत्र का है। पचोरवाला बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उन्होंने नगर निगम से बिल्डिंग निर्माण की अनुमति ली थी और इसके लिए करीब 80 लाख रुपए शुल्क जमा किया था।
अनुमति के तीन दिन बाद दिया नोटिस
याचिकाकर्ता के मुताबिक, अनुमति मिलने के महज तीन दिन बाद जोन-3 की भवन अधिकारी पल्लवी पाल ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया। नोटिस का जवाब मिलने के तीन दिन बाद ही भवन निर्माण का काम रोकने का आदेश भी जारी कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने पूछा- किस आधार पर रोका काम?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भवन अधिकारी पल्लवी पाल को तलब किया। कोर्ट ने उनसे पूछा कि 13 जुलाई को नोटिस और इसके ठीक तीन दिन बाद 16 जुलाई को काम बंद करने का आदेश किस आधार पर जारी किया गया।
अधिकारी की ओर से बताया गया कि उन्हें इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की ओर से लीज से संबंधित पत्र मिला था। इसके बाद मौके का निरीक्षण किया गया, जहां कथित अनियमितताएं मिलीं।
कोर्ट ने कार्रवाई की मंशा पर उठाए सवाल
अधिकारी की दलील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप भट्ट ने सवाल उठाया कि एक ही अधिकारी तीन दिन के अंतराल में दो अलग-अलग रुख कैसे अपना सकता है।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अधिकारियों की कार्रवाई को उचित नहीं माना और टिप्पणी की कि जारी किए गए पत्र गलत मंशा से किए गए प्रतीत होते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में अधिकारों का मनमाने तरीके से इस्तेमाल किए जाने की स्थिति दिखाई देती है।
प्रमुख सचिव और निगमायुक्त को जांच के निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश की प्रति विभाग के प्रमुख सचिव और नगर निगम आयुक्त को भेजने के निर्देश दिए हैं। दोनों अधिकारियों को मामले की प्रारंभिक जांच कराने को कहा गया है।
प्रमुख सचिव से अधिकारी पल्लवी पाल की कार्रवाई को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जबकि नगर निगम आयुक्त से रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
कोर्ट ने नगर निगम, IDA और भवन अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है। साथ ही भवन अधिकारी द्वारा 16 जुलाई को जारी किए गए काम रोकने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
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