दबंग के डर से निष्क्रिय पुलिस पर हाईकोर्ट सख्त: छुट्टी के दिन खुली कोर्ट; नाबालिग को पेश करने का आदेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। इंदौर हाईकोर्ट ने महू क्षेत्र में नाबालिग के कथित अपहरण के मामले में पुलिस की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए छुट्टी के दिन भी विशेष सुनवाई की और पुलिस को फटकार लगाई। कोर्ट ने आदेश दिया है कि नाबालिग को हर हाल में अगली तारीख पर पेश किया जाए।
40 दिन से लापता नाबालिग, पुलिस पर गंभीर आरोप
मामला महू तहसील के बडगोंदा थाना क्षेत्र का है, जहां अनुसूचित जाति की एक नाबालिग को करीब 40 दिन पहले कथित रूप से गांव के ही एक दबंग युवक द्वारा उठाकर ले जाने का आरोप है।
अवैध हिरासत में
पीड़िता के पिता का कहना है कि 23 फरवरी को उनकी बेटी को पवन सिंह नामक व्यक्ति अपने साथ ले गया था और तब से वह उसकी अवैध हिरासत में है। परिवार लगातार पुलिस से गुहार लगाता रहा, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने न तो गंभीरता दिखाई और न ही आरोपी के खिलाफ ठोस कार्रवाई की।
नामजद FIR की जगह ‘अज्ञात’ पर मामला दर्ज
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने शिकायत के बावजूद आरोपी का नाम एफआईआर में शामिल नहीं किया और अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर मामले को कमजोर कर दिया।
नहीं किए ठोस प्रयास
इतना ही नहीं, परिजनों का कहना है कि पुलिस ने बच्ची की तलाश के लिए भी कोई ठोस प्रयास नहीं किए, जिससे वे मजबूर होकर न्यायालय की शरण में पहुंचे।
हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
पीड़ित पक्ष ने अधिवक्ताओं के माध्यम से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने तत्काल संज्ञान लिया और अवकाश के दिन भी विशेष खंडपीठ गठित कर सुनवाई की।
पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की बेंच ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई और नामजद एफआईआर दर्ज न करने को लेकर कड़ी फटकार लगाई।
“हर हाल में बच्ची को पेश करो” – कोर्ट का सख्त आदेश
कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी को निर्देश देते हुए साफ कहा कि पुलिस सोमवार को नाबालिग को हर स्थिति में कोर्ट के सामने पेश करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस की भूमिका पर फिर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में पुलिस ने कार्रवाई करने से परहेज किया, जिससे एक नाबालिग की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।
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