कीचड़ और पानी भरे जानलेवा गड्ढों में बैठने को मजबूर हुए बेबस रहवासी: स्मार्ट सिटी में विकास के दावों का हुआ खुलासा; नगर निगम के करोड़ों के बजट के बाद भी गायब हुई सड़कें
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के वार्ड-75 स्थित पालदा के भावना नगर में नगर निगम की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का संकट सामने आया है। शहर के भावना नगर में बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। क्षेत्र की मुख्य सड़कें गायब हो चुकी हैं और उनका स्थान पानी भरे गहरे गड्ढों तथा कीचड़ ने ले लिया है।
बारिश के दिनों में यह मार्ग जानलेवा साबित हो रहे हैं। हर दिन यहां से गुजरने वाले राहगीर, स्कूली बच्चे और दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। प्रशासनिक अनदेखी से तंग आकर अब क्षेत्रीय नागरिकों का धैर्य पूरी तरह जवाब दे चुका है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट और पार्षद कुणाल सोलंकी खुद मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की वादाखिलाफी और धरातल पर शून्य निर्माण कार्य से नाराज जनप्रतिनिधियों ने रहवासियों के साथ मिलकर अनूठा विरोध दर्ज कराया।
विरोध जताने के लिए वे किसी दफ्तर या मंच पर नहीं, बल्कि सीधे सड़क के बीचों-बीच बने पानी और कीचड़ से भरे गड्ढों में उतरकर बैठ गए। इस दौरान नगर निगम प्रशासन और व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि हर वर्ष टैक्स वसूलने वाला निगम प्रशासन आम जनता को चलने लायक एक सुरक्षित रास्ता तक उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। महापौर पुष्पमित्र भार्गव से लेकर निगम के तमाम आला अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार केवल कागज़ी आश्वासनों की घुट्टी पिलाई गई।
धरातल पर सुधार कार्य शुरू नहीं हुआ और हर दिन लोग हादसों का शिकार होते रहे। जब ज्ञापन और शांतिपूर्ण निवेदन का कोई असर नहीं हुआ, तो मजबूर होकर सड़कों पर उतरने का रास्ता चुनना पड़ा। बारिश में जलभराव के कारण रास्तों की गहराई का अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।
मौके पर मौजूद नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट और पार्षद कुणाल सोलंकी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि करोड़ों रुपए का बजट कागजों पर खर्च दिखाया जा रहा है, जबकि जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।
यह स्थिति निगम के विकास मॉडल और उसकी प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भावना नगर में तत्काल सड़क निर्माण और मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया, तो यह आंदोलन केवल भावना नगर तक सीमित नहीं रहेगा। जनता के हक और सुरक्षा की इस लड़ाई को सड़क से लेकर नगर निगम के सदन तक पूरी उग्रता के साथ लड़ा जाएगा।
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