एक फुटेज और मिल जाता तो जिंदा होता हत्यारा पति: पुलिस से बस एक कदम आगे चलता रहा अखिलेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

• पत्नी की हत्या के बाद इंदौर से भोपाल, फिर वृंदावन भाग निकला था हत्यारा...
• सीसीटीवी ने खोला हत्यारे के पूरे सफर का राज
• लेकिन आखिरी कड़ी टूटते ही पुलिस के हाथ रहे खाली
रविश राजेंद्र सिंह 79870-55743 खुलासा फर्स्ट,इंदौर।
डाक विभाग में असिस्टेंट पोस्ट मास्टर उर्मिला सैनी हत्याकांड का सबसे बड़ा सवाल अब सामने आ रहा है, क्या आरोपी अखिलेश सैनी को जिंदा पकड़ा जा सकता था? सूत्रों के मुताबिक जवाब है -हां, लेकिन पुलिस उससे सिर्फ एक कदम पीछे रह गई। हत्या के बाद अखिलेश के हर कदम का पीछा पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए किया। इंदौर से भोपाल और फिर वृंदावन तक पुलिस उसकी लोकेशन तक पहुंच गई थी।
बिना किसी आरोपी के दूर संचार उपयोग में लिए। लेकिन वृंदावन में आगे का फुटेज नहीं मिलने से उसकी मूवमेंट टूट गई। इसी एक गैप का फायदा उठाकर आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर निकल गया और बाद में कथित तौर पर गंजबासौदा के पास रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या कर ली। यदि पुलिस उसकी आगे की एक और मुमेंट का पता लगा लेती तो संभवत हत्यारा जिंदा पकड़ा जा सकता था।
जानकारी के मुताबिक 11 जुलाई को पत्नी उर्मिला सैनी की बेरहमी से हत्या करने के बाद अखिलेश घर से निकला। पुलिस को जैसे ही वारदात की जानकारी मिली, संयोगितागंज थाना पुलिस ने तीन विशेष टीमें बनाकर उसकी तलाश शुरू कर दी। जांच का सबसे बड़ा आधार बना सीसीटीवी नेटवर्क। सूत्रों के अनुसार फुटेज में सबसे पहले आरोपी बच्चों के स्कूल जाता दिखाई दिया। स्कूल में बच्चों से मिलने के बाद अखिलेश रेलवे स्टेशन पहुंचा।
पकड़ा ना जाए इसलिए पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने रेलवे स्टेशन के बाहर से ऑटो लिया और सीधे चार्टर्ड बस कार्यालय पहुंच गया, जो उसके घर के पास ही था। वहां से उसने भोपाल का टिकट खरीदा और बस में बैठकर राजधानी पहुंच गया। इधर हत्या की घटना के बाद पुलिस टीम ने इंदौर से लेकर भोपाल तक उसकी पूरी यात्रा का डिजिटल ट्रैक तैयार कर लिया था। भोपाल पहुंचने के बाद आरोपी एक दिन तक वहीं रुका ।
इस दौरान पुलिस दो दिन तक सीसीटीवी फुटेज की मदद से भोपाल में उसकी तलाश करते रही , लेकिन हत्यारा अखिलेश भोपाल में एक दिन होने के वावजूद किसी होटल में ना रुकते हुए इधर से उधर भटकता रहा अगले दिन वह लोक परिवहन से भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचा और ट्रेन पकड़कर 13 जुलाई को सीधे वृंदावन पहुंच गया। 13 से 17 जुलाई तक वह वृंदावन की गलियों, आश्रमों और सार्वजनिक स्थानों पर भटकता रहा।
उसने किसी होटल में कमरा नहीं लिया, बल्कि फुटपाथों पर रात बिताई और सरकारी शौचालयों का उपयोग करता रहा, ताकि उसकी कोई औपचारिक एंट्री दर्ज न हो और पुलिस तक उसकी लोकेशन न पहुंचे। इस बीच उसके वृंदावन में होने की सूचना लगते ही संयोगितागंज पुलिस की टीम वृंदावन तक पहुंच गई थी। स्थानीय सीसीटीवी फुटेज में आरोपी कई स्थानों पर नजर भी आया। लेकिन इसके बाद उसका कोई नया फुटेज नहीं मिला।
यही वह मोड़ था, जहां पुलिस की डिजिटल चेन टूट गई। आगे की लोकेशन नहीं मिलने के कारण टीम उसके अगले रूट का अनुमान नहीं लगा सकी और उसे वृंदावन में ढूढती रही लेकिन उसका कोई सुराग नही लगा। यहां से पुलिस टीम की तलाश अधूरी रह गई।
पुलिस को पहले से था आत्महत्या का अंदेशा : जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने शुरुआती दौर में ही यह आकलन कर लिया था कि जिस क्रूरता से अखिलेश ने अपनी पत्नी की हत्या की, उसके बाद वह आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है।
इसी आशंका के चलते तीनों टीमें लगातार दिन-रात उसकी तलाश में लगी रहीं। कोशिश यही थी कि आरोपी को जिंदा गिरफ्तार किया जाए, ताकि हत्या की असली वजह, उसकी मानसिक स्थिति और पूरी घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।
...और खत्म हो गई तलाश
सूत्रों के मुताबिक 17 जुलाई को आरोपी वृंदावन से किसी साधन से भोपाल लौटा। संभवत 18 तारीख को उसने गंजबासौदा क्षेत्र के रेलवे ट्रैक पर लेटकर या कूदकर ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली। और उसका शव 19 तारीख को रेलवे ट्रैक पर बिना सिर के मिला शव के पास से अखिलेश के दस्तावेज मिले लेकिन परिजनाें ने उसका सिर नही मिलने के कारण उसके नही होने की बात कही जिसके चलते शव का डीएनए कराया गया। जिसकी रिपोर्ट 10 दिन बाद आएगी।
एक फुटेज... और बदल सकती थी पूरी कहानी
इस पूरे घटनाक्रम में यदि वृंदावन में आरोपी की आगे की मूवमेंट का एक और फुटेज मिल जाता, तो संभव है पुलिस उसके अगले ठिकाने तक पहुंच जाती। तब न केवल आरोपी जिंदा गिरफ्तार होता, इस केस ने एक बार फिर साबित किया है कि आधुनिक जांच में सीसीटीवी और डिजिटल ट्रैकिंग कितनी महत्वपूर्ण है।
इंदौर से वृंदावन तक पुलिस ने आरोपी का पीछा लगभग बिना रुके किया, लेकिन सिर्फ एक कड़ी टूटने से पूरा ऑपरेशन अधूरा रह गया। पुलिस की कोशिश आरोपी को मारना नहीं, बल्कि जिंदा पकड़कर कानून के कटघरे तक लाना थी। मगर आरोपी ने पुलिस की उस कोशिश से पहले ही अपनी जीवनलीला समाप्त कर दी।
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